पिंकी प्रामाणिक मामले पर सरकार को निर्देश

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Image caption पिंकी प्रामाणिक अभी हिरासत में हैं

कोलकाता हाई कोर्ट ने पिंकी प्रामाणिक के मानवाधिकार हनन के मामले पर पश्चिम बंगाल सरकार को दो सप्ताह के अंदर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.

भारती मुत्सुद्दी और रविशंकर चटर्जी की जनहित याचिका पर जस्टिस जेएन पटेल की अगुआई वाली खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिया.

सुनवाई के दौरान भारती मुत्सुद्दी और रविशंकर चटर्जी ने आरोप लगाया कि न सिर्फ पिंकी प्रामाणिक के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि उनका एक एमएमएस भी फैलाया जा रहा है.

यहाँ ये बताना जरूरी है कि बलात्कार के जिस आरोप में पिंकी प्रामाणिक को हिरासत में लिया गया है, वो मामला निचली अदालत में है और ये मामला उससे अलग है.

याचिका में कहा गया है कि पिंकी प्रामाणिक को पुरुषों के वॉर्ड में रखा गया है और उन्हें पुरुष पुलिसकर्मी ही बाहर लेकर जाते हैं, जो उनके अधिकारों का उल्लंघन है.

जवाब में पश्चिम बंगाल सरकार के वकील अशोक बनर्जी ने अदालत में कहा कि पिंकी ने खुद ये आरोप नहीं लगाया है और न ही पिंकी के घरवालों ने ये आरोप लगाए हैं. इस दौरान दो बार पिंकी की अदालत में पेशी हुई. वहाँ पिंकी खुद कह सकती थी.

एमएमएस के बारे में उनका कहना था कि कहाँ हैं ये एमएमएस और इस बारे में पुलिस में शिकायत क्यों नहीं की गई.

आरोप

पिंकी प्रामाणिक बलात्कार के आरोप में जेल में बंद हैं. आरोप लगाने वाली महिला ने दावा किया था कि पिंकी ने उनके साथ बलात्कार किया और यातनाएं दी.

महिला ने ये भी दावा किया कि एशियाई खेलों में पदक जीत चुकीं एथलीट पिंकी प्रामाणिक ने टूर्नामेंट में खेलने के लिए अपने पुरुष होने की पहचान पर पर्दा डालने के मकसद से मेडिकल जांच करने वालों को घूस दी थी.

प्रामाणिक ने वर्ष 2006 में दोहा में आयोजित एशियाई खेलों में 4x400 मीटर रिले दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था.

उसी साल मेलबोर्न में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने रजत पदक जीता था. महिला के आरोप के आधार पर पुलिस ने पिंकी को गिरफ्तार कर लिया था.

अदालत ने ही पिंकी का लिंग तय करने के लिए डॉक्टरी जांच का आदेश दिया था. लेकिन अभी डॉक्टर ये तय नहीं कर पाए हैं कि पिंकी पुरुष हैं या महिला.

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