दंगों में क्षतिग्रस्त धार्मिक स्थलों की जानकारी मांगी

सुप्रीम कोर्ट
Image caption सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है.

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से 2002 के दंगों में क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक स्थलों की जानकारी मांगी है.

अदालत ने खास कर क्षतिग्रस्त हुए मुस्लिम धार्मिक स्थलों को मुआवजा दिए जाने की मांग से जुड़े मामले में राज्य सरकार को सर्वेक्षण करा कर ये जानकारी मुहैया कराने को कहा है.

न्यायामूर्ति केएस राधाकृष्णन और न्यायामूर्ति दीपक मिश्रा ने राज्य सरकार से ये भी बताने को कहा है कि दंगों में प्रभावित हुए धार्मिक स्थलों के निर्माण और मरम्मत के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी.

अदालत ने ये निर्देश गुजरात सरकार की तरफ से दायर उस अपील पर दिया है जिसमें धार्मिक स्थलों को हुए नुकसान के लिए मुआवजा दिए जाने के गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी.

'मोदी के लिए झटका'

इस मामले में याचिकाकर्ता शकील अहमद अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर खुशी जताई है.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कहा, “ये सीधा साधा सा मामला है. धार्मिक स्थलों को नुकसान हुआ है, इसलिए उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए. वैसे धार्मिक स्थल को बनाना और उसे खड़ा करना एक समुदाय की जिम्मेदारी होती है. सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती. लेकिन अगर नुकसान हुआ है, तो उसका मुआवजा देना सरकार की जिम्मेदारी बनती है.”

वरिष्ठ पत्रकार अजय उमठ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक और झटका मानते हैं.

उनका कहना है, “गुजरात सरकार को ये झटका पहले भी लग चुका है जब फरवरी में हाई कोर्ट ने कहा था कि आपको मुआवजा देना पड़ेगा. गुजरात हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से कहा था कि वो जल्द से जल्द इस्लामिक रिलीफ कमेटी नाम के गैर सरकारी संगठन के साथ बात करके इस मामले को निपटाए लेकिन गुजरात सरकार ने इस बारे में संवाद करने की बजाय हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला गुजरात सरकार के लिए बड़ा झटका है.”

इस्लामिक रिलीफ कमेटी के अनुसार दंगों में कुल 535 धार्मिक स्थलों को नुकसान हुआ था जिनमें से दर्जनों स्थलों की मरम्मत होनी अभी बाकी है.

‘दलील में दम नहीं’

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले की कार्यवाही शुरू होते ही गुजरात सरकार ने कहा कि उसके सरकारी खजाने का इस्तेमाल धार्मिक स्थलों के निर्माण और मरम्मत के लिए नहीं किया जा सकता.

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Image caption दंगों के दौरान सैकड़ों धार्मिक स्थलों को नुकसान हुआ.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि वो इस मामले पर भी विचार करेगी क्या सरकारी पैसे का इस्तेमाल क्षतिग्रस्त धार्मिक स्थलों की मरम्मत के लिए किया जा सकता है.

अंसारी कहते हैं, “ये तो सिर्फ एक बहाना है कि धार्मिक स्थलों को मुआवजा देने में धर्मनिरपेक्षता आड़े आ रहा है. सच तो ये है कि मुआवजा देने या दंगा पीड़ितों के पुनर्वास में उन्होंने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है.”

अंसारी के अनुसार सोलह से सत्रह हजार परिवार अब भी शिविरों में रह रहे हैं, उनके पुनर्वास के लिए सरकार कोई खास कदम नहीं उठा रही है.

दूसरी तरफ उमठ सरकार की इस दलील में ज्यादा दम नहीं देखते हैं कि धार्मिक स्थलों के निर्माण और मरम्मत पर सरकारी पैसे को खर्च नहीं किया जा सकता. उनके मुताबिक, “अंबाजी मंदिर, सोमनाथ मंदिर और द्वारकाधीश जैसे कई मंदिरों में राज्य सरकार खुद ट्रस्टी है और वहां ट्रस्टी ही कलेक्टर होता है. ऐसे में इस दलील में दम नहीं दिखता कि धार्मिक स्थलों में सरकार की दखंलदाजी नहीं होनी चाहिए. सरकार इन मंदिरों में काफी मरम्मत भी करवाती है.”

धार्मिक स्थलों के लिए मुआवजे के इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीति गर्मा सकती है क्योंकि जल्द ही राज्य में विधानसभा चुनाव भी होने हैं.

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