छत्तीसगढ में निर्दोष लोग मारे गए:रिपोर्ट

सीआरपीएफ की गोलीबारी में मारे गए आदिवासी
Image caption सीआरपीएफ ने इन मृतकों को नक्सली बताया है

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सीआरपीएफ की गोलीबारी में निर्दोष लोगों के कथित तौर पर मारे जाने की खबरों के बीच कॉ-ऑर्डिनेशन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स ऑर्गेनाइजेशन (सीडीआरओ) ने इस घटना की जमीनी पड़ताल करने का दावा किया है.

सीडीआरओ का कहना है कि उसके कार्यकर्ताओं ने बीजापुर जिले के उस इलाके का दौरा किया है जहां 28 जून 2012 को सीआरपीएफ की गोलीबारी में 17 आदिवासी कथित तौर पर मारे गए थे.

सीडीआरओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि 28 जून की रात आठ बजे के आसपास, तीन गांवों के लगभग 60 आदिवासी खुले आसमान के नीचे बैठक कर रहे थे.

नक्सली नहीं आम आदिवासी मारे गए: ग्रामीण

Image caption सीडीआरओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि सीआरपीएफ ने आदिवासियों पर तीस मिनट तक गोलियां चलाईं

इसमें कहा गया है कि दिनभर काम में लगे रहने के कारण रात के वक्त ये बैठक बुलाई गई थी जिसमें खेती-किसानी के बारे में चर्चा की जा रही थी क्योंकि बुआई का मौसम नजदीक आ रहा था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आदिवासियों के पास कोई हथियार नहीं थे, बैठक चल ही रही थी कि सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन के जवान वहां पहुंचे और उन्होंने इलाके को घेर लिया.

आदिवासियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि रात दस बजे के आसपास जवानों ने बिना कोई चेतावनी दिए गोलियां चलाना शुरु कर दिया.

न्यायिक जांच का फैसला

रिपोर्ट के मुताबिक, गोलीबारी तीस मिनट तक जारी रही और इसमें 16 आदिवासी मारे गए. एक आदिवासी सुरेश की बीजापुर अस्पताल में अगले दिन मौत हुई जो गोलीबारी में घायल हुआ था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि मृतकों में छह नाबालिग भी शामिल थे. इसमें ये भी कहा गया है कि जो लोग गोलियों से नहीं मरे, सिर्फ घायल हुए, उन्हें सुरक्षाबलों ने कुल्हाड़ी जैसे धारदार हथियारों से मारा.

सीडीआरओ ने मारे गए लोगों के नाम उनकी उम्र के साथ जारी किए हैं.

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