मनरेगा में भुगतान में देरी से मनमोहन चिंतित

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Image caption मनमोहन सिंह ने पंचायती राज की भूमिका बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया है

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी क़ानून (मनरेगा) के तहत हो रहे काम के बाद भुगतान में हो रहे विलंब पर चिंता जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि इस खामी को तुरंत दूर किया जाना चाहिए.

इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीण विकास की सभी योजनाओं की स्थिति का मूल्यांकन करने के निर्देश दिए हैं.

उन्होंने कहा, "मैं ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश से यह जानकर चकित हुआ कि योजनाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया अच्छी स्थिति में नहीं है. काफ़ी समय पहले जब मैं योजना आयोग में था, तो हमने कुछ ग्रामीण विकास योजनाओं के मूल्यांकन का कार्य शुरु किया था."

उनका कहना था, "मैं नहीं जानता कि इसमें सुस्ती क्यों आ गई है. लेकिन मैं योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया कि वे इस कमी को दूर करें."

प्रधानमंत्री ने शनिवार को यूपीए के महात्वाकांक्षी ग्रामीण रोज़गार कार्यक्रम मनरेगा की समीक्षा रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि इस तरह की समीक्षा विकास योजनाओं का आकलन करने की एक अभिनव पहल है.

उन्होंने कहा कि मनरेगा यूपीए सरकार की सबसे लोकप्रिय और सफल योजनाओं में से एक है.

इस योजना को छह वर्ष पूरे हो चुके हैं.

'भूमिहीन लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए'

प्रधानमंत्री ने कहा, "आंकड़े सारी सच्चाई बयान नहीं करते. मनरेगा को यदि संख्या के लिहाज से देखा जाए तो यह एक अच्छी गाथा है..यह बहुत से लोगों को साथ लेकर चलती है...मुझे याद नहीं आता कि हाल के दिनों में किसी और योजना ने मनरेगा की तरह इतने लोगों को लुभाया है."

देर से भुगतान की समस्या का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "देर से भुगतान की समस्या का निदान हम जितनी जल्दी कर लेंगे, मैं समझता हूँ हमें उतने ही अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे."

उन्होंने आंध्र प्रदेश की तारीफ़ करते हुए कहा कि यह जानकर अच्छा लगा कि वहाँ आंकड़े तुरंत भर दिए जाते हैं और ऑनलाइन (यानी इंटरनेट के ज़रिए) भुगतान भी कर दिया जाता है.

मनमोहन सिंह ने कहा, "इससे देर से भुगतान की समस्या ही हल हो जाती है. इस प्रयोग को दूसरी जगह भी दोहराया जाना चाहिए."

Image caption किसान शिकायत करते रहे हैं कि नरेगा के बाद उन्हें मजदूर मिलने में परेशानी हो रही है

'मनरेगा-समीक्षा' जारी करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना ने सुरक्षा का जो ढाँचा खड़ा किया है उससे ग्रामीण भारत में अक्सर आने वाले दबावों और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में सहायता मिली है.

मनरेगा की वजह से पैदा होने वाले मज़दूरों की कमी की शिकायतों पर उन्होंने कहा, "कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी, निर्माण के क्षेत्र में मज़दूरों की बढ़ती मांग और मनरेगा का साझा असर ये हुआ है कृषि मज़दूरों का बाज़ार प्रतिस्पर्धात्मक हुआ है और उनकी मज़दूरी में बढ़ोत्तरी हुई है. किसान इसकी शिकायत भी करते हैं लेकिन मज़दूरों की मांग बढ़ना ही एक तरीक़ा है जिससे भूमिहीन लोगों का जीवन स्तर सुधारा जा सके."

उनका कहना था कि पंजायती राज संस्थाओं को इसमें भूमिका निभाने की आवश्यकता है.

इस अवसर पर मौजूद ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि सभी योजनाओं का मूल्यांकन नियमित रुप से होना चाहिए और इसके लिए योजना आयोग को एक स्वतंत्र इकाई का गठन करना चाहिए.

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