मैला ढोने की प्रथा रोकने के लिए कानून बनेगा

Image caption मैला ढोने वालों का मुद्दा आमिर खान ने सत्यमेव जयते कार्यक्रम में उठाया था

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री मुकुल वासनिक ने कहा है कि सरकार जल्द ही मैला ढोने की प्रथा को खत्म करने के लिए कानून बनाएगी और इस काम में लगे लोगों की नए सिरे से गणना कराई जाएगी.

गौरतलब है कि इस प्रथा को रोकने के लिए एक बिल तैयार है जिसे संसद में पारित करवाया जाना बाकी है. प्रॉहिब्शन ऑफ इंपलॉयमेंट एज़ मैनुएल स्कैवेंजर्स ऐंड रिहैबलिटेशन बिल, 2012 को मानसून सत्र में पेश भी किया जा सकता है.

सोमवार को मुकुल वासनिक ने फिल्म अभिनेता आमिर खान के साथ नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान ये बात कही.

मैला ढोने की प्रथा और इस काम में लगे लोगों की समस्याओं को लेकर फिल्म अभिनेता आमिर खान ने सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की.

आमिर खान ने प्रधानमंत्री का ध्यान उस तबके की ओर आकर्षित किया जो आज भी अपने हाथ से मल-मूत्र उठाकर सफाई का काम करते हैं.

प्रधानमंत्री ने उन्हें इस मुद्दे पर प्राथमिकता से काम करने का आश्वासन दिया और समाज कल्याण मंत्री मुकुल वासनिक से मुलाकात का सुझाव दिया.

वासनिक ने आश्वासन दिया कि देश भर में इस प्रथा को खत्म करने के लिए जल्द ही कड़े कानून बनाए जाएंगे.

मुकुल वासनिक ने ये भी कहा कि इस प्रथा से जुड़े लोगों की नए सिरे से गणना कराई जाएगी.

पत्रकारों से बातचीत के दौरान वासनिक ने कहा, "यह काफी दुखद है कि आजादी के छह दशक बाद भी एक वर्ग हाथों से मैला ढोने का काम करता है."

उन्होंने कहा कि इस प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह प्रतिबद्घ है और इसे खत्म करने के लिए राज्यों से भी सहयोग मांगा जाएगा.

आमिर खान ने हाल ही में इस मुद्दे को अपने टेलीविजन कार्यक्रम सत्यमेव जयते में उठाया था.

ऐसा माना जा रहा है कि देश में अभी भी करीब तीन लाख लोग सिर पर मैला ढोने के काम में लगे हैं और समाज में उपेक्षा की की नजर से देखे जाते हैं.

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