दवाओं के 'अवैध परीक्षण' पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित

Image caption अदालत ने जनहित याचिकाओं पर सुनावाई करते हुए परीक्षणों पर चिंता प्रकट की

सुप्रीम कोर्ट ने देश में कथित तौर पर दवाओं के अवैध परीक्षण पर चिंता जताई है और कहा है कि मानवों का ‘गिनी पिग’ की तरह इस्तेमाल किया जाना एक दुर्भाग्यपूर्ण बात है.

अदालत ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की जिसमें आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश और देश के कई और हिस्सों में बड़े पैमाने पर दवाओं के अवैध परीक्षण किए जा रहे हैं.

न्यायाधीश आर एम लोढ़ा की एक सदस्यीय पीठ ने इस बारे में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के जवाब नहीं देने के लिए उनकी आलोचना की.

अदालत ने कहा, "इस बारे में ज़िम्मेदारी का कुछ तो अहसास होना चाहिए...मानवों का इस्तेमाल गिनी पिग की तरह हो रहा है. ये दुर्भाग्यपूर्ण है."

अदालत ने इस बारे में सरकार और मेडिकल काउंसिल को जवाब देने के लिए और आठ सप्ताह का समय दिया है.

सुप्रीम कोर्ट इन कथित अवैध परीक्षणों के बारे में दो अलग जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था. एक याचिक डॉक्टरों के एक समूह ने दायर की थी जबकि दूसरी याचिका एक ग़ैर सरकारी संगठन की थी.

इनमें कहा गया था कि कथित रूप से बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ किशोरों, आदिवासियों और दलितों समेत ग़रीब लोगों पर दवाओं और टीकों का अवैध परीक्षण कर रही हैं.

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से एक विशेषज्ञ समिति के गठन का आदेश देने का भी आग्रह किया जिसका दायित्व भारत और विदेशो में ऐसे परीक्षणों के प्रावधानों की जाँच करना और इस संबंध में दिशानिर्देशों को तय करना होगा.

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