छत्तीसगढ़ में गर्भाशय 'घोटाले' की जाँच

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Image caption प्राथमिक जाँच के बाद नौ डॉक्टरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है

छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के निजी अस्पतालों द्वारा एक सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिए बिना कारण सैकड़ों महिलाओं के गर्भाशयों को निकाल लेने के आरोपों की जाँच कर रही है.

ऐसा अनुमान है कि पिछले छह महीनों में प्रदेश में लगभग दो हज़ार और पिछले ढाई साल में सात हज़ार महिलाओं का अकारण ऑपरेशन किया गया.

ये ऑपरेशन एक सरकारी स्वास्थ्य योजना का फ़ायदा उठाने के लिए किए गए जिसमें निजी अस्पताल ग़रीबों के इलाज के लिए अस्पतालों को आर्थिक मदद देती है.

इस मामले को लेकर प्रदेश में विपक्षी दलों ने विधानसभा में काफ़ी हंगामा किया और डॉक्टरों, नर्सिंग होमों और बीमा कंपनियों की मिलीभगत से हुए इस कथित घोटाले की जाँच की माँग की.

राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने कहा है कि प्राथमिक जाँच के बाद नौ डॉक्टरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है.

उन्होंने कहा,"लगभग 35 से अधिक निजी अस्पतालों की जाँच की जा रही है. हम कुछ कड़े क़दम उठाने जा रहे हैं."

योजना

ये मामला राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का फायदा उठाने से जुड़ा है.

इसमें सरकार ग़रीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करनेवाले लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा कार्ड जारी करती है और गरीबों के इलाज के लिए पैसे देती है.

सरकार के पास आई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार डॉक्टरों ने स्त्री रोगों का इलाज करने आईं दूरवर्ती इलाक़ों की महिलाओं को ये कहकर डराया कि यदि वे गर्भाशय नहीं निकलवातीं तो उन्हें कैंसर हो सकता है.

कुछ चिकित्सकों का कहना है कि कुछेक मामलों में तो ऐसा करना जीवन को बचाने के लिए ज़रूरी हो सकता है मगर बहुत सारे ऐसे मामले थे जिनमें इसे टाला जा सकता था.

सरकार के पास ऐसी भी कुछ रिपोर्टें आई हैं जिनमें पीठ की दर्द का इलाज करवाने आई महिलाओं का भी गर्भाशय निकलवा दिया गया.

प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता रवींद्र चौबे ने आरोप लगया कि ये घोटाल स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों और निजी अस्पतालों की मिलीभगत से हुआ.

उन्होंने कहा, "सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण निजी अस्पताल और डॉक्टर पैसे बना रहे हैं."

विपक्षी नेताओं ने विधानसभा में आरोप लगाया कि पिछले पाँच साल में प्रदेश में ऐसे 50 हज़ार से अधिक ऑपरेशन हो चुके हैं.

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