गरीब छात्रों के 'बाल काटने' के मामले में जांच

बैंगलोर स्कूल भेदभाव
Image caption कार्यकर्ताओं का आरोप है कि गरीब बच्चों के साथ निजी स्कूलों में बड़े पैमाने पर भेदभाव हो रहा है.

सरकार ने एक निजी स्कूल में आर्थिक दृष्टि से कमजोर परिवारों से संबंध रखने वाले बच्चों के साथ कथित भेदभाव के मामले में जांच के आदेश दिए हैं.

आरोप है कि स्कूल ने गरीब बच्चों के बाल काट दिए थे ताकि वो अन्य छात्रों से अलग दिखें. कथित भेदभाव के शिकार हुए बच्चों का संबंध अल्पसंख्यक और दलित समुदायों से है और उनका दाखिला शिक्षा के अधिकार कानून के तहत हुआ था.

इस कानून के तहत सभी स्कूलों - निजी और सरकारी - को कुल दाखिले का 25 प्रतिशत आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित करना होता है.

लेकिन निजी स्कूलों की तरफ से इसका विरोध किया जा रहा है.

कार्रवाई

शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कुमार नायक ने बीबीसी से कहा, "हम मामले की जांच कर रहे हैं. अगर जूर्म साबित हो जाता है तो जरूरी कार्रवाई की जाएगी."

मामले के सामने आने के बाद दलित कार्यकर्ताओं ने गरीब बच्चों के साथ भेदभाव पूर्ण रवैए के लिए ऑक्सफोर्ड स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाही की मांग की है.

दलित साम्राज्य स्थापना समीति के अध्यक्ष डी नारायन ने कहा, "हमारी लगातार शिकायत के बाद भी प्रशासन ने कुछ नहीं किया. ये शर्म की बात है."

नारायन ने बीबीसी से कहा कि शिक्षक ने इन बच्चों को इसलिए जलील किया क्योंकि वो समाज के पिछड़े तबकों से संबंध रखते थे.

उन्होंने कहा, "प्रार्थना सभा के दौरान उन्होंने अलग खड़ा किया जाता था और उन्हें मजबूर किया जाता था कि वो क्लास में पीछे बैठें."

नारायन का कहना था कि ये इकलौती घटना नहीं है बल्कि शिक्षा के अधिकार कानून के लागू होने के बाद बड़े पैमाने पर गरीब बच्चों के साथ भेदभाव हो रहा है.

हड़ताल

कर्नाटक और राज्य की राजधानी बैंगलौर के तकरीबन 1000 स्कूल दाखिले में 25 प्रतिशत आरक्षण के विरोध में हड़ताल पर हैं.

सरकार की आर्थिक मदद के बिना चलाए जा रहे स्कूलों के संगठन ने बड़े पैमाने पर भेदभाव की बात से इंकार किया है लेकिन उनका कहना है कि वो ऑक्सफोर्ड स्कूल के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच कर रहे हैं.

स्कूल प्रबंधन ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है.

बाल काटे जाने वाले एक बच्चे के अभिवावक नयाज पाशा ने कहा, "स्कूल प्रबंधन ने कहा कि किसी और बच्चे ने मेरे बेटे के बाल काट दिए होंगे. लेकिन मैंने उनकी बातों पर यकीन नहीं किया."

नयाज पाशा ने दावा किया कि उनके बच्चों के साथ खूले आम भेदभाव किया जाता है. उन्हें दूसरे बच्चों की तरह टाई और बेल्ट भी नहीं दिए गए हैं.

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