बिना यौनकर्मियों के एड्स सम्मेलन

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Image caption विदेशी यौनकर्मियों को अमरीकी वीजा न मिलने की यौनकर्मी निंदा कर रहे हैं

अमरीका की राजधानी वॉशिंगटन में 21 जुलाई से शुरु हो रहे विश्व एड्स सम्मेलन में इस बार दूसरे देशों के यौनकर्मी भाग नहीं ले रहे हैं. ऐसा पहली बार हो रहा है क्योंकि अमरीकी कानून दूसरे देशों को यौनकर्मियों को वीजा नहीं देता है.

यौनकर्मियों के अंतर-राष्ट्रीय संगठनों ने कोलकाता में एक समानांतर सम्मेलन का आयोजन किया है जो वॉशिंगटन सम्मेलन के साथ ही शुरु होगा.

'ग्लोबल नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्क प्रोजेक्ट' के प्रमुख एंड्रयू हंटर इस सम्मेलन के सिलसिले में कोलकाता आए हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, ''लोगों के दिमाग में एक गलत धारणा बन चुकी है कि ये यौनकर्मी ही एड्स फैलाते हैं. सच ये है कि महिला यौनकर्मियों के पास आने वाले पुरुष ही एड्स फैलाते हैं. यौनकर्मियों को एड्स के बारे में और जागरुक करके ही एड्स पर काबू पाया जा सकता है, लेकिन इन्हीं यौनकर्मियोंको एड्स सम्मेलन में नहीं जाने दिया गया.''

अमरीका की आलोचना

यौनकर्मियों के संगठनों का कहना है कि सिर्फ अमरीका में नहीं बल्कि दूसरे कई देशों में भी ऐसे ही कानून हैं जहां विदेशी यौनकर्मियों को आने की अनुमति नहीं है.

किन्नरों के एक नेता लक्ष्मी नारायण कहते हैं, ''जापान में भी ऐसे ही कानून हैं, लेकिन जब वहां विश्व एड्स सम्मेलन हुआ था, तब जापान की सरकार ने संबंधित नियम को कुछ दिनों के लिए हटा दिया था. लेकिन खुद को महान गणतांत्रिक देश बताने वाला अमरीका यौनकर्मियों की बात सुनने के लिए राजी नहीं है.''

लक्ष्मी नारायण कहते हैं कि अमरीका गणतंत्र के बारे में, समानता के बारे में बड़े दावे करता है लेकिन समानता का मतलब होता है किन्नर हो या राष्ट्रपति, सबके लिए एक जैसा कानून हो.

वे ये भी कहते हैं कि एड्स सम्मेलन में यदि यौनकर्मी भाग नहीं ले पाएंगे तो ये सम्मेलन कितना फायदेमंद होगा.

पाबंदी की वजह से यौनकर्मी वॉशिंगटन सम्मेलन में भले ही नहीं जा पा रहे हैं, पर कोलकाता में एक समानांतर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है जिसमें शामिल होने के लिए दुनियाभर से महिला-पुरुष यौनकर्मी और किन्नर यहां पहुंच रहे हैं.

वॉशिंगटन और कोलकाता सम्मेलन, वेबकॉस्टिंग के जरिए एक-दूसरे से जुड़ेंगे और चर्चा में भी शामिल होंगे.

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