दरगाह पर फिल्मी हस्तियों का आना ग़ैर इस्लामी?

Image caption दरगाह में लाखों लोग कामयाबी की दुआ माँगने जाते हैं

भारत में साम्प्रदायिक सद्भाव की प्रतीक ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में फिल्म और टीवी सीरियल निर्माताओं और कलाकारों के आने और अपनी फिल्म की कामयाबी के लिए दुआ करने पर विवाद उठ खड़ा हुआ है.

दरगाह दीवान सैयद जेनुअल आबेदीन अली खान ने इस पर कड़ी आपत्ति की है.

वे कहते है कि फिल्मों और धारावाहिकों में अश्लीलता को बढ़ावा दिया जाता है और ऐसी फिल्मों के लिए अजमेर शरीफ में मन्नत माँगना बहुत गलत है.

मगर दरगाह में खादिमों की संस्था अंजुमन दरगाह दीवान के इस बयान से सहमत नहीं है.

दरगाह दीवान ने बीबीसी से कहा कि इस तरह फिल्मों और धारावाहिकों की सफलता के लिए ख्वाजा के दरबार में मन्नत माँगना इस्लामी शरीयत और सूफी सिद्धांतों के खिलाफ है.

उनका कहना है कि ऐसी चीजों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

उलेमा की खामोशी

सज्जादा नशींन और दीवान अली खान को हैरत है कि इतने बड़े मुद्दे पर इस्लामी विद्वान और उलेमा खामोश हैं.

दरगाह दीवान का ये बयान भारत में टीवी धारावाहिकों की मशहूर निर्माता एकता कपूर के दरगाह में दुआ करने के एक दिन बाद आया है.

एकता कपूर ने शुक्रवार को अजमेर में अपनी नयी फिल्म 'क्या सुपर कूल हैं हम' की कामयाबी के लिए दुआ की थी.

Image caption जेनुअल आबेदीन अली खान, दरगाह दीवान

दरगाह दीवान कहते हैं कि मुल्क के उलेमाओ, दारुल उफ्ता, मुफ्ती और इस्लामी विद्वानों को इस बारे में अपनी राय का इजहार करना चाहिए.

“आप अपने लिए दुआ करो, अपने परिवार के लिए करो, दुआ पर किस को ऐतराज है, मगर ये फिल्में अश्लीलता फैलाती हैं, आप नाम ही देखिए ऐसी फिल्मों के. क्या ऐसी फिल्मों की सफलता के लिए यहाँ दुआ की इजाजत देना ठीक है?”

मगर अंजुमन के सदर हिस्सामुदीन ने बीबीसी से कहा “ये तो वो मक़ाम है जो किसी जात, धर्म, मुल्क, रंग और नस्ल में फर्क नहीं कर सकता. ये तो वो दर है जो सभी के लिए खुला है. मुझे समझ में नहीं आता दरगाह दीवान क्यों ये सवाल उठा रहे है?”

उधर सज्जादा नशींन जेनुअल आबेदीन खान कहने लगे, “पहले हिमेश रेशमिया यहाँ बुरका पहन कर दुआ कर गए, फिर कटरीना कैफ जब आईं तो उनके लिबास को लेकर विवाद उठा. पिछले कई सालों से हम देख रहे हैं कि फिल्म निर्देशक, अभिनेता और अभिनेत्रियां अपनी फिल्मों को आस्ताने पर पेश करते हैं, फिर सार्वजनिक तौर पर उनकी कामयाबी के लिए दुआ करते हैं. वो मीडिया के सामने इस बारे में बयानबाज़ी करते है. ये सब इस्लामी शरियत के लिहाज से ठीक नहीं है.”

अंजुमन के पूर्व सचिव महमूद हसन चिश्ती कहते हैं, “गरीब नवाज के यहां तो कोई भी आ सकता है. यहाँ सदियों से फनकार, संगीतकार, फिल्म निर्माता और खिलाड़ी आते रहे हैं. ये तो अल्लाह की बारगाह है, सब के लिए खुली है. यहाँ तो सभी धर्मों के लोग आते हैं. दलाई लामा भी आए थे. न जाने क्यों दरगाह दीवान ऐसी बातें कह रहे हैं. हमारी फिल्में पुरस्कृत होती हैं, कई फिल्म कलाकार संसद में नामित हुए हैं. ऐसे में इस तरह सवाल उठाना ठीक नहीं है”

दरगाह दीवान का कहना था कि इस्लाम में नाच गाने, चलचित्र और अश्लीलता को हराम करार दिया गया. आज गैर शरई कामों के लिए यहाँ मन्नत मांगी जा रही है. इसे सहन नहीं किया जा सकता.

यूँ तो कई सालों से फ़िल्मी सितारे और निर्देशक ख्वाजा के दरबार में हाजिरी देते रहे हैं. हाल के वर्षों में इसमें और भी तेजी आई है. मगर इस पर ऐसा विवाद पहली बार उठा है.

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