राष्ट्रपति चुनाव: शुरुआत में प्रणब का पलड़ा भारी

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भारत में राष्ट्रपति चुनाव में मतों की गिनती संसद भवन में चल रही है.

कुछ समय बाद चुनाव के परिणाम आने की संभावना है.

इस चुनाव में यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी और भाजपा सहित कई अन्य दलों के समर्थन से मैदान में उतरे पीए संगमा के बीच मुख्य मुक़ाबला है.

भारत के पूर्व राष्ट्रपतियों पर एक नज़र

आंकड़ों के हिसाब से प्रणब मुखर्जी का पलड़ा भारी दिखता है.

मतगणना

कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना का काम अब से कुछ देर पहले शुरु हुआ.

मतगणना कक्ष में प्रणब मुखर्जी और पीए संगमा दोनों के प्रतिनिधि मौजूद हैं.

कुल 4,896 मतदाताओं में से 776 सांसद और 4,120 विधायकों को अपने मतों का प्रयोग करना होता है. गुरुवार को हुए मतदान में इस बार 95 प्रतिशत मतदान हुआ है.

मतगणना की शुरुआत में नियमानुसार संसद भवन में हुई मतगणना की मतपेटियाँ पहले खोली गई हैं, इसके बाद राज्यों के आई मतपेटियों को एक-एक करके खोला जाएगा.

मुलायम सिंह सहित कुल 15 सांसदों के मत विभिन्न वजहों से खारिज कर दिए गए.

शेष 748 मतों में से 527 मत प्रणब मुखर्जी तो मिले हैं जबकि पीए संगमा को 206 मत मिले हैं.

नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम के बीच प्रणब मुखर्जी यूपीए के अधिकृत उम्मीदवार घोषित किए गए थे.

कांग्रेस के बाद यूपीए के सबसे बड़े घटक दल तृणमूल कांग्रेस ने प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने से इनकार कर दिया था और अपनी ओर से पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का नाम आगे किया था.

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Image caption प्रणब मुखर्जी चार दशकों से अधिक समय से राजनीति में हैं

लेकिन पिछले हफ़्ते वो भी साथ आ गईं और प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने का फ़ैसला किया.

इसके अलावा प्रणब मुखर्जी को समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी का समर्थन मिला हुआ है.

वाममोर्चे के दो घटक दलों सीपीएम और फॉर्वर्ड ब्लॉक ने प्रणब मुखर्जी को वोट दिया है, जबकि सीपीआई और आरएसपी ने चुनाव में हिस्सा न लेने का फ़ैसला किया है.

प्रमुख विपक्षी गठबंधन एनडीए के दो प्रमुख घटक दलों, जनता दल यूनाइटेड और शिवसेना ने प्रणब मुखर्जी को समर्थन दिया.

दूसरी ओर पीए संगमा को प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने समर्थन देने की घोषणा की है और उनके साथ एनडीए की कुछ और पार्टियाँ हैं.

हालांकि पीए संगमा का कहना है कि आदिवासी होने के नाते उन्हें यूपीए की ओर से भी बहुत से मत मिलेंगे.

लेकिन विश्लेषक मान रहे हैं कि प्रणब मुखर्जी का पलड़ा भारी है.

अभी तक सिर्फ मुलायम सिंह यादव के वोट को अवैध माना गया है क्योंकि उन्होंने पहले पीए संगमा और फिर प्रणब मुखर्जी को वोट दिया था. उनका वोट इस आधार पर खारिज किया गया कि उन्होंने इसे गुप्त नहीं रखा.

गुजरात से बीजेपी के एक विधायक ने प्रणब मुखर्जी के समर्थन में यह कहते हुए वोट दिया था कि वो नरेंद्र मोदी की कार्यशैली से नाराज़ हैं.

मतगणना में जो भी राष्ट्रपति चुना जाएगा उसे 25 जुलाई को पद की शपथ दिलाई जाएगी.

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