सूखे की आशंका से घबराई सरकार, पीएमओ का बयान

 मंगलवार, 24 जुलाई, 2012 को 08:34 IST तक के समाचार

सरकार ने सूखे की आशंका जताई है

देश में सूखे की स्थिति को लेकर अब सरकार भी चिंता में दिखने लगी है. सूखे को लेकर न सिर्फ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चिंता जताई है, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बारे में एक बयान भी जारी किया है.

प्रधानमंत्री कार्यलय ने बयान जारी कर स्वीकार किया है कि देश में अभी तक औसत से 22 फीसदी कम बारिश हुई है जिसकी वजह से रोज़मर्रा इस्तेमाल होने वाली चीजें महंगी हो रही हैं. चीनी, दाल और सब्जियों के भाव भी कम बारिश होने की वजह से ही बढ़ रहे हैं.

बयान में आशंका जताई गई है कि मानसून में कमी आने की वजह से हालात और ख़राब हो सकते हैं. ख़ासकर कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में.

पीएमओ ने ये भी कहा है कि पिछले साल के मुक़ाबले देश में पानी भी कम जमा हुआ है.

निर्देश

सरकार ने विभिन्न विभागों और मंत्रालयों को निर्देश दिया है कि वो राज्य सरकारों के सपंर्क में रहें ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके.

हालांकि प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार सूखे से निपटने के लिए सरकार तैयार है.

उन्होंने कहा कि सूखे से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा कोष में 4524 करोड़ रुपए हैं.

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री की यह चिंता नेशनल रिमोट सेंसिंग केंद्र की तरफ़ से केंद्र सरकार को दी गई चेतावनी के बाद आई है.

रिमोट सेंसिंग केंद्र ने देश के छह प्रमुख राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में ज्यादातर हिस्से में सूखे की चेतावनी दी है. इन राज्‍यों के अधिकतर हिस्‍से में खरीफ़ की बुवाई की गुंजाइश नहीं रह गई है.

बयान में कहा गया है कि जून के आख़िर में वर्षा में दर्ज की गई कमी से चिंता का माहौल बना है लेकिन ख़ासतौर पर कर्नाटक, महाराष्‍ट्र, गुजरात और राजस्‍थान में अगले हफ्ते वर्षा की गहनता और व्‍यापकता पर सावधानी से निगरानी की ज़रूरत है.

स्थिति नियंत्रण में

हालांकि जल संसाधन मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस मामलें में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, क्‍योंकि हिमालय के पहाड़ी इलाकों, पूर्वोत्‍तर और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में हो रही भारी वर्षा के जल से जलाशय भर रहे हैं.

बयान के मुताबिक़ पिछले वर्ष की तुलना में फ़सल बुआई के क्षेत्र में क़रीब आठ मिलियन हेक्‍टेयर की कमी भी दर्ज की गई है.

बयान में ये भी कहा गया है कि इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने किस प्रकार से तैयारी की है.

इसमें कहा गया है कि मनरेगा योजना के अंतर्गत मज़दूरी के लिए किसी भी अतिरिक्‍त आवश्‍यकता को ग्रामीण विकास विभाग द्वारा पूरा किया जायेगा.

मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान राज्‍यों को 12 हज़ार करोड़ रूपए पहले से ही जारी किए जा चुके हैं. इसके अलावा राष्‍ट्रीय आपदा राहत कोष के अंतर्गत वर्तमान में 4524 करोड़ रूपए की धनराशि का पर्याप्‍त कोष उपलब्‍ध है.

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