असम: हज़ारों लोग घर छोड़कर भागे

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Image caption कोकराझार में हुई हिंसा में अब तक 14 लोग मारे जा चुके हैं

असम के कोकराझार और चिरांग में हुई जातीय हिंसा के बाद वहां हज़ारों की संख्या में लोग अपना घर छोड़कर भाग गए हैं और अब तक हुई हिंसा में 19 लोग मारे जा चुके हैं जबकि आठ घायल हैं.

ज़िला कलेक्टर डोनल्ड गिलफेलॉन ने बीबीसी को बताया है कि स्थिति तनावपूर्ण है और ज़िले में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है.

उनका कहना था कि छिटपुट हिंसा के कारण हर समुदाय एक दूसरे का घर जला रहा है और इन लोगों को रोकने के लिए अर्धसैनिक बलों को फायरिंग भी करनी पड़ी है लेकिन इसमें अभी तक किसी की मौत नहीं हुई है.

गिलफेलॉन का कहना था,'' हमने ज़िले में 64 शरणार्थी कैंप खोले हैं जिसमें से 45 बोसाई गांव में खोले गए हैं.इन कैंपों में 63,678 लोग रह रहे हैं और इनमें मुसलमान और बोडो दोनों ही जाति के लोग हैं.''

पिछले चौबीस घंटों में दो लोग मारे जा चुके है और स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए सेना फ्लैग मार्च भी कर रही है.

डोनल्ड गिलफेलॉन का कहना था पिछले तीन महीनों से अल्पसंख्यक समुदाय पर हमले हो रहे हैं और उन्हें लग रहा है कि बोडो ये हमले करवा रहा है.

कारण

उनका कहना था, ''बोडो ने इन लोगों पर हमला नहीं किया है. इन पर केएलओ संगठन हमला कर रहा है लेकिन इन्हें लगा कि बोडो ने इन पर हमला किया है हालांकि ऐसा नहीं है.''

अभी भी दूरदराज के इलाकों में छिटपुट हिंसा हो रही है और लोगों से अपील की जा रही है कि अफवाहों पर न जाएँ और अपने घरों में ही रहें.

साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि बोडो के इलाकों में अल्पसंख्यकों के ज़मीन कब्जा करने के कारण भी हिंसा भड़की है.

40 जोन को संवेदनशील घोषित किया गया है और छह अर्धसैनिक बलों की कंपनियां तैनात की गई है.

गुरुवार को कोकराझार ज़िले में मुस्लिम समुदाय के दो छात्र नेताओं पर अज्ञात लोगों ने गोली चलाई. जवाबी हमले में बोडो लिबरेशन टाइगर्स संगठन के चार पूर्व सदस्य मारे गए.

इसके बाद फैली हिंसा में कोकराझार में 12 और चिरांग में पांच लोग मारे गए.

पुलिस का कहना था कि चिरांग ज़िले के हसारो बाज़ार इलाके में अज्ञात लोगों ने रविवार शाम को तीन लोगों को मार दिया और इसी ज़िले के बिजनी शहर में एक गिरोह ने दो लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी.

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