सुभाष बोस की साथी कैप्टन लक्ष्मी सहगल का निधन

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Image caption लक्ष्मी सहगल को वर्ष 1998 में पद्म विभूषण से नवाजा गया था

आजाद हिंद फौज की कैप्टन लक्ष्मी सहगल का निधन हो गया है.

वे 97 वर्ष की थीं और बीते कुछ दिनों से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी.

उन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद गुरूवार को कानपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

लक्ष्मी सहगल ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई थी.

उन्होंने सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी में रानी झांसी रेजीमेंट की कमान संभाली थी.

कलाम के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव लड़ा

पेशे से डॉक्टर लक्ष्मी सहगल एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी सक्रिय रहीं.

लक्ष्मी सहगल वर्ष 2002 के राष्ट्रपति चुनावों में वाम-मोर्चे की उम्मीदवार थीं, लेकिन एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें हरा दिया था.

उनका पूरा नाम लक्ष्मी स्वामीनाथन सहगल था. उनका जन्म वर्ष 1912 में एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था.

उन्होंने मेडिकल डिग्री हासिल करने के बाद सिंगापुर में गरीबों के लिए वर्ष 1940 में एक क्लीनिक की स्थापना की थी.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अटूट अनुयायी के तौर पर वे इंडियन नेशनल आर्मी में शामिल हुईं थीं.

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