असम में हिंसा: 41 मरे, डेढ़ लाख शिविरों में

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असम के कोकराझाड़ इलाक़े में हिंसा जारी है. वहां हिंसा में अभी तक 41 लोगों के मारे जाने की खबर है.

बुधवार को केन्द्र सरकार ने असम सरकार को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि हिंसा भड़काने वाले प्रमुख उपद्रवी को तत्काल गिरफ्तार करे.

राज्य प्रशासन ने हिंसाग्रस्त इलाकों में उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के आदेश दे रखा है और अनिश्चित काल का कर्फ़्यू लगा दिया है.

इस हिंसा की वजह से वहां से हज़ारों की संख्या में लोग अपना घर-बार छोड़कर भागना पड़ा है.

हिंसा से प्रभावित जिलों के लोगों के लिए जगह-जगह शरणार्थी कैंप खोले गए हैं जिसमें डेढ़ लाख से अधिक लोग रह रहे हैं.

नेताओं की तलाश

असम के वन मंत्री रोकिबुल हुसैन ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “विभिन्न शरणार्थी शिविरों में एक से डेढ़ लाख लोग रह रहे हैं. मुख्यमंत्री तरुण गगोई ने निर्देश दिया है कि शरणार्थी शिविरों में किसी चीज की कमी नहीं होने दी जाए.”

दूसरी तरफ केन्द्रीय गृह सचिव राज कुमार सिंह ने कहा कि हमने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उपद्रव करने वाले दोनों ही पक्षों के नेताओं को तत्काल गिरफ्तार करे जिससे कि हिंसा पर रोक लगाई जा सके.

गृह सचिव ने असम में हो रही हिंसा में बंग्लादेश का हाथ होने से इनकार किया है, उन्होंने कहा,"अभी तक इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं कि असम में हो रहे हिंसा में बांग्लादेश का हाथ है."

उधर राज्य के पुलिस महानिरीक्षक जेएन चौधरी ने असम में चल रही हिंसक घटनाओं को सांप्रदायिक हिंसा मानने से इनकार कर दिया.

चौधरी ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, “कोकराझाड़ और उसके इर्द-गिर्द हो रही हिंसा धार्मिक हिंसा न होकर जातीय हिंसा है, जिसमें जातीय गुट शामिल हैं.”

जेएन चौधरी ने कहा,“असम में हो रही हिंसा में कमी आई है और वहां हिंसा पर बहुत जल्द ही काबू पा लिया जाएगा.”

कैसे शुरु हुई हिंसा

पिछले गुरुवार को कोकराझाड़ ज़िले में मुस्लिम समुदाय के दो छात्र नेताओं पर अज्ञात लोगों ने गोली चलाई.

जवाबी हमले में बोडो लिबरेशन टाइगर्स संगठन के चार पूर्व सदस्य मारे गए. इसके बाद धीरे-धीरे हिंसा की जिलों में फैल गई.

मंगलवार को नोर्थ इस्ट फ्रंटियर रेलवे के हवाले से कहा गया था कि हिंसा से प्रभावित कोकराझाड़ जिले के गोसाईगांव में गुवाहाटी राजधानी एक्सप्रेस पर भी कुछ अज्ञात लोगों ने हमला किया.

रेल पर हो रहे हमले को ध्यान में रखकर बुधवार को दो हजार सैन्य बलों को रेलवे की सुरक्षा के लिए तैनात कर दिया गया है.

लगातार चल रहे जातीय हिंसा के कारण असम में रेल यातायात में काफी बाधा पहुंची है.

हिंसा की वजह से असम से आने-जाने वाली कई ट्रेनों को कामाख्यागुड़ी रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया है.

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