सामूहिक बलात्कार, 'ब्लैकमेल' मामले में तीन गिरफ़्तार

घटना के विरोध में कैंडल-मार्च निकालते लोग
Image caption राज्य महिला आयोग ने पीड़ित लडकी से बयान लेकर महिला पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज कराई

पटना में एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार और फिर उस बलात्कार की सीडी बनाकर छात्रा को ब्लैकमेल करने संबंधी मामले में पुलिस ने तीन लड़कों को गिरफ़्तार किया है.

लेकिन अब इस आरोप पर यहाँ बवाल मचा है कि सीडी में दिखने वाले एक नेता के पुत्र को बचाने के लिए पुलिस असली घटना-स्थल को छिपा रही है.

घटना के बारे में पीड़ित लडकी ने अपने बयान में कहा है कि कुछ समय पहले तक एक लड़के से वह प्यार करती थी. उसी लड़के ने पिछली जून महीने में एक दिन उसे धोखे से उस जगह पर बुला लिया, जहाँ एक बंगले में और चार लड़के पहले से मौजूद थे.

लड़की का कहना है कि विरोध के बावजूद उन लड़कों ने उसके साथ बलात्कार किया और ये तमाम दृश्य मोबाइल फ़ोन के ज़रिए रिकॉर्ड कर लिए.

बाद में उन दृश्यों की सीडी बना लेने की बात कहकर उसे चुपचाप सब कुछ सहते रहने को विवश किया गया.

'सुशासन' की भद पिटने लगी

बयान के मुताबिक़, एक दिन तंग आकर उस लडकी ने और अत्याचार नहीं सहने की बात उन लड़कों से खुलकर कह दी. फिर वही सीडी किसी के हाथ लग गई.

एक क्षेत्रीय टेलीविज़न चैनल ने बलात्कार के धुंधले किए हुए दृश्य और चार बलात्कारियों के नाम सहित चित्र कई दिनों तक लगातार दिखाए.

इन्टरनेट पर भी किसी ने वे चित्र डाल दिए और इस तरह मामला तूल पकड़ने लगा.

राज्य पुलिस-प्रशासन की नाक के नीचे हुए इस घृणित अपराध के सामने आ जाने से कथित 'सुशासन' की भद पिटने लगी.

आम नागरिकों और ख़ासकर महिला संगठनों ने इस घटना के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरकर रोषपूर्ण प्रदर्शन किए.

फिर भी पुलिस और सत्ता पक्ष की तरफ़ से कोई कार्रवाई जैसी सुगबुगाहट भी नहीं हुई.

इस पर पुलिस ने अब सफ़ाई दी है कि ना तो पीड़ित लडकी सामने आ रही थी, और ना ही उसका कोई परिजन ऐसी शिकायत दर्ज कराने आया था.

अभियुक्त को बचाने का आरोप

पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमृत राज ने बीबीसी को बताया, ''नामज़द चार अभियुक्तों में से तीन को गिरफ़्तार कर लिया गया है. पहले पी.ओ. यानी प्लेस ऑफ़ औकरेंस को लेकर कन्फ्यूज़न था, लेकिन अब उस जगह की पहचान कर ली गई है.''

असली 'पी.ओ.' को छिपाने और पांचवें अभियुक्त को बचाने संबंधी आरोप पर उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि अभी छानबीन चल ही रही है.

इसी बीच ख़बर फैली कि पटना के सिटी एसपी किम गुप्ता का यहां से फ़ौरन तबादला इसलिए कर दिया गया क्योंकि वह असली अभियुक्तों पर हाथ डालने जा रही थीं. लेकिन तबादले के इस कारण की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है.

आरोप ये भी उछला कि सत्ता पक्ष के एक प्रभावी नेता इस मामले में किसी को बचाना चाहते थे, इसलिए पुलिस को सक्रिय होने में इतनी देर लगी.

जब जन-विरोध तेज़ी से फैलने लगा, तो राज्य महिला आयोग ने पीड़ित लडकी से बयान लेकर महिला पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज कराई.

यहीं पर इस आरोप ने जन्म लिया कि सिर्फ चार लड़कों को अभियुक्त बनाने और पांचवें को बचाने की कोशिश हो रही है.

लड़की के बयान

सवाल उठा है कि सीडी में दिखने वाला वह पांचवां अभियुक्त कौन है? आरोप लगने शुरू हो गए हैं कि बेली रोड स्थित हनुमान मंदिर के पीछे किसी बंगले में बलात्कार हुआ.

अब पुलिस कहती है कि एक अपार्टमेन्ट के फ्लैट में इस बलात्कार के सबूत मिले हैं और पीड़ित लडकी ने उस जगह की पुष्टि कर दी है.

इस फ्लैट में जो लड़का रहता था, वह झारखंड में कार्यरत एक अधिकारी का बेटा है और पुलिस ने उसे भी हिरासत में ले लिया है.

उधर लड़की की ओर से दिए गए पहले के बयान में बतौर घटना-स्थल हनुमान मंदिर के पीछे वाले वीआइपी इलाक़े का ज़िक्र आया था.

उस जगह पर सरकारी अधिकारियों और सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड के कुछ विधायकों के आवास हैं.

सरकारी आवास और सेक्स-रैकेट के सूत्र जुड़े होने जैसी इस आशंका से यहाँ राजनीतिक हलक़ों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

कहा जा रहा है कि इस मामले के कई तथ्य रहस्य के परदे में ही रहकर दफ़न हो जाएं, ऐसी कोशिशें हो रही हैं.

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