17 बच्चे हुए लेकिन माँ वो अब बनी

 सोमवार, 30 जुलाई, 2012 को 08:27 IST तक के समाचार

ये नवजात बच्ची बबली की 18वीं संतान है.

दिल में हिलोरे लेता वात्सल्य का भाव और खानदान के लिए चश्मो-चिराग की हसरत लिए जयपुर की बबली 17वीं बार माँ बनी है. उसे बेटी हुई है.

ये पहला मौका है जब बबली का नवजात शिशु स्वस्थ है. इससे पहले वो माँ तो बनी पर नियति ने हर बार उसे दगा दिया. बच्चे पैदा हुए और एक-एक कर दम तोड़ गए.

अब नवजात बेटी पा कर रामकिशोर मीना और उनकी पत्नी बबली बेहद खुश है.

रामकिशोर कहते है, “हमारे लिए इससे ज्यादा क्या ख़ुशी हो सकती है, ख़ुशी का ये लम्हा बहुत दुआओं के बाद नसीब हुआ है.”

नन्ही गुड़िया को इलाज के लिए जयपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में लाया गया है, जहाँ डॉक्टरों का कहना है कि वो अब ठीक है.

इससे पहले बबली को समय से पहले प्रसव हो जाता था, जिससे हर बार शिशु कमजोर होता था और उसे कोई न कोई बीमारी घेर लेती थी, लिहाजा एक भी शिशु नहीं बचा.

सामाजिक दबाव

जयपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल के निदेशक डॉ धनजय मंगल ने कहा, “इसे 18वां शिशु मान सकते हैं, क्योंकि बबली को 13वें प्रसव में जुड़वाँ हुए थे.”

डॉक्टरों के अनुसार, दरअसल दो बच्चों के बीच अन्तराल नहीं देने से ये सूरत पैदा हुई, क्योंकि बबली लगातार हर साल गर्भ धारण करती रही. इससे समय पूर्व प्रसव हो जाता था.

डॉ. मंगल ने बताया, “ये एक सोच का विषय है. ऐसा लगता है कि महिलाओं पर सामाजिक दबाव होता है कि वो माँ बने. इस फेर में महिलाएं अपने स्वास्थ्य के पहलू भुला देतीं हैं. घर परिवार में भी सन्तान प्राप्ति की चाह होती है.”

38 साल की बबली अलवर जिले के अपने गांव में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं. पति रामकिशोर भी मजदूरी कर परिवार के जीवन यापन में मदद करते हैं.

हर बार बच्चे की मौत

रामकिशोर कहते हैं, “हर बार बच्चा होता और उसकी मौत हो जाती, गर्भावस्था के सातवें माह में हर बार प्रसव हो जाता और हमें मायूस कर जाता, क्योंकि शिशु की मौत हो जाती.”

रामकिशोर बताते है कि इस बार बबली को भरतपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है जहाँ छह जुलाई को बबली ने इस बच्ची को जन्म दिया.

वो कहते हैं कि माँ होना उसे औरत की पूर्णता का भाव देता है, क्योंकि जिस घड़ी एक बच्चे का जन्म होता है, उसके साथ ही माँ का अवतरण होता है.

मगर भारत में सामाजिक मान्यताएं बांझपन को अभिशाप की तरह निरुपित करते है और एक निसंतान विवाहिता को उलाहने सुनने पड़ते है.

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