क्षमता से ज्यादा बिजली लेने पर मिले दंड

ग्रिड
Image caption बिजली ठप्प होने की वजह से कई ट्रेनें प्रभावित हुई.

नॉर्दन ग्रिड में खराबी की वजह से रविवार की रात उत्तर भारत के लोगों को गर्मी में काटनी पड़ी.पिछली बार ऐसी समस्या वर्ष 2001-2002 में सामने आई थी.

ऊर्जा मंत्रालय में पूर्व सचिव आरवी साही का कहना है उस समय प्रभावित राज्यों के अधिकारियों को बुलाकर एक एक्शन प्लान बनाया गया था.

उनका कहना था उस दौरान ये भी तय किया गया था कि मेट्रो या बड़े शहरों, जहां बिजली जाने से ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है, उन्हें आइलैंड बनाने पर जोर दिया गया था ताकि दिक्कत से बचा सके.

साही का कहना था, '' सामान्य तौर पर बिजली की फ्रीक्वेंसी 50 हर्टज होनी चाहिए और अगर बिजली की फ्रीक्वेंसी नीचे जाएगी तो ग्रिड ठप्प हो जाएगा लेकिन आइलैंड बना लिए जाते है तो वो अपने आप इन आइलैंड चिन्हित इलाकों में स्थानीय उर्जा केंद्रों से आपूर्ति होने लग जाती है. ''

साही कहते है कि महत्वपूर्ण इलाकों के लिए आइलैंड स्कीम का होना जरुरी है जिससे आस-पास जो भी उर्जा के केंद्र है वहां से बिजली निकल सकती है और इससे बिजली की सप्लाई होती रहती है उन दोनों से काम चलता रहता है.

समस्या

उनका कहना है कि मुंबई और दिल्ली में ऐसे ही तंत्र का इस्तेमाल किया गया था और पिछले कई सालों से ऐसी दिक्कते नहीं आई है. इसलिए शायद रिले फिक्सिंग और रिले सैंटिंग में ध्यान नहीं दिया गया हो.

ऊर्जा मंत्रालय में पूर्व सचिव का मानना है कि अगर बिजली की कमी होती है तो राज्यों को सहयोग करना चाहिए और राज्य अगर क्षमता से ज्यादा बिजली लेते है तो ग्रिड पर असर पड़ता है. और इस तरह की समस्या सामने आती है और इसके लिए सहयोग की कमी है.

उनका कहना था कि मुंबई और दिल्ली में ऐसा ही तंत्र लागू किया गया है.

11 वीं पंचवर्षीय योजना में 55000 हज़ार क्षमता जोड़ी गई थी लेकिन घरेलू कोयला या गैस की कमी होने की वजह से उसे चला नही पाएंगे तो इस पर फैसला लिया जाना चाहिए.

साही का कहना है कि ग्रिड का ठप्प होना राज्यों का क्षमता से ज्यादा बिजली लेने की वजह से हो सकता है.हालांकि उनका कहना था कि अभी जांच से पता चलेगा कि इसके पीछे क्या कारण है.

उनका कहना था कि एक्शन प्लान में ये भी प्रावधान किए गए थे अगर कोई भी राज्य क्षमता से ज्यादा बिजली लेता है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

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