'टीम अन्ना के मतभेद से देश ज्यादा ज़रूरी'

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Image caption अन्ना हजारे ने पिछले हफ्ते दिल्ली के जंतर मंतर पर छह दिन तक अनशन किया था.

भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने शुक्रवार को छह दिन के बाद अपना अनशन खत्म किया और कहा कि मजबूत लोकपाल कानून और देश से भ्रष्टाचार मिटाने के लिए टीम अन्ना राजनीतिक विकल्प देने पर भी विचार कर रही है.

उन्होंने भारत की जनता से राय मांगी है कि टीम अन्ना को राजनीतिक दल बनाना चाहिए या नहीं इस बारे में लोग राय दें.

मनीष सिसोदिया से बातचीत सुनने के लिए यहां क्लिक करें

इस बीच टीम अन्ना के अन्य सदस्य अरविंद केजरीवाल, गोपाल राय और मनीष सिसोदिया अनशन के बाद स्वास्थ्य लाभ के लिए आराम कर रहे हैं और टीम में इस बात पर लगातार विचार चल रहा है कि राजनीति में उतरने का जो विकल्प चुना गया है उसे कार्यरूप में कैसे लाया जाए.

इसी विचार मंथन के बीच बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा ने टीम अन्ना के सदस्य मनीष सिसोदिया बात की तो उन्होंने कहा कि अनशन टूटने के साथ अन्ना का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है वो जारी है.

उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को टीम अन्ना सड़क से संसद तक, विधानसभाओं तक लेकर जाएगी.

जनता का समर्थन

ये पूछे जाने पर कि टीम अन्ना ने राजनीतिक दल बनाने के बारे में जनता से जो राय मांगी थी उस पर कैसी प्रतिक्रिया मिल रही है, मनीष सिसोदिया ने कहा कि इसपर बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है. 95 प्रतिशत तक लोगों ने कहा है कि राजनीतिक दल बनाना चाहिए.

कई लोग ऐसे भी हैं जो टीम अन्ना के राजनीतिक दल बनाने का विरोध कर रहे हैं. जब मनीष सिसोदिया से ये बात पूछी गई तो उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि अगर राजनीतिक दल अपना काम ठीक से कर लेते, बीजेपी जहां-जहां सत्ता में है वहां वो अपना काम ठीक से कर लेती और कांग्रेस जहां-जहां सत्ता में है या बाकी लोग जहां-जहां सत्ता में हैं, वहां-वहां अपना काम ठीक से कर लेते तो आंदोलन की ही ज़रूरत नहीं थी. आंदोलन की ज़रूरत तो इन राजनीतिक दलों के कुकर्मों की वजह से है. इन्होंने भारत को जो गड्ढे में धकेला है, इसकी वजह से है. मैं अब भी इन राजनीतिक दलों से कहूंगा कि आप वो चिंता करो जो आपको करनी चाहिए. आप टीम अन्ना क्या करेगी और क्या नहीं करेगी इस पर ध्यान दे रहे हैं. इस देश के गरीब लोग कैसे मर रहे हैं, महंगाई कैसे बढ़ रही है, इस पर क्यों नहीं ध्यान दे रहे हैं. उस पर ध्यान देंगे तो फर्क पड़ेगा."

देश ज्यादा अहम

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Image caption जंतर-मंतर पर अन्ना के समर्थन में जुटे लोग

इस बीच राजनीति में आने को लेकर टीम अन्ना में भी मतभेद की बात कही जा रही है.

लेकिन मनीष सिसोदिया ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि," टीम अन्ना में एकता है या नहीं है वो देश का मुद्दा ही नहीं है. देश का मुद्दा ये है कि महंगाई कैसे कम होगी, देश का मुद्दा ये है कि हमारे स्कूल और अस्पताल विश्व स्तरीय कैसे बनें, जिनको सारी पार्टियों ने मिलकर तीसरे दर्जे का बना दिया है. मुद्दे ये हैं. टीम अन्ना में अगर एकता नहीं हैं तो टीम अन्ना तो अपने आपसी होंगे भी तो सुलझा लेगी. लेकिन देश के अस्पतालों की हालत कैसे सुधारी जाए, इसपर चिंतन करना ज्यादा ज़रूरी है. किसानों की हालत कैसे सुधारी जाए, इसपर चिंतन करना ज्यादा ज़रूरी है. "

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