नौकरी और छोकरी चाहता है युवा भारत- चेतन

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Image caption चेतन भगत भारत के सफल लेखकों में गिने जाते हैं.

भारत के जाने माने लेखक चेतन भगत का कहना है कि भारत के युवाओं की मांग बहुत सीधी सादी है- मेरी नौकरी, मेरी छोकरी.

फाइव प्वाइंट समवन और वन नाइट @ कॉल सेंटर जैसी किताबों के लेखक चेतन का कहना था, ‘‘ भारत के युवा अच्छी ज़िंदगी चाहते हैं. प्यारी सी गर्लफ्रेंड चाहते हैं. अगर आपके मुद्दे से उनकी ज़िंदगी बेहतर हो सकती है तो वो आपका साथ देंगे. यही युवा भारत की चाहत है. सामाजिक मुद्दों को युवा के लक्ष्यों के साथ जोड़ना ही होगा.’’

चेतन के अखबारों में छपे लेखों और अन्य निबंधों की पुस्तक आने वाली है जिसका नाम ही है ‘‘ what young india wants’’

इस पुस्तक में चेतन ने सामाजिक, राजनीतिक, अर्थव्यवस्था और युवा लोगों से जुड़े मुद्दों पर लेख लिखे हैं जिसमें दो कहानियां भी हैं यानी कि ये लेखों और कहानियों का एक संग्रह है.

चेतन की दो किताबों पर फिल्में भी बन चुकी हैं और एक किताब पर फिल्म बनने वाली है.

चेतन आईआईटी से पढ़ाई कर चुके हैं और जिसके बाद वो सफल बैंकर भी रहे. कुछ वर्ष पहले उन्होंने किताब लिखने का काम शुरु किया था जिसके बाद आज वो सबसे सफल लेखकों में गिने जाते हैं.

चेतन अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहते हैं, ‘‘ हमारी दो तिहाई कृषि भूमि वर्षा पर आधारित है. विकसित देशों में कृषि बारिश पर आधारित नहीं होती. हमें मानना होगा कि भारत के किसानों को कोई नहीं देख रहा है.’’

उन्होंने ये भी कहा कि सकल घरेलू उत्पाद में छह से आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी देश के आर्थिक प्रगति को नहीं दर्शाती है.

लोगों की राय

बीबीसी हिंदी के फेसबुक पन्ने पर कई लोगों ने अपनी राय दी है और ये राय बंटी हुई है. कई लोगों का मानना है कि चेतन जो कह रहे हैं वो बिल्कुल सही है वहीं कई लोगों का कहना है कि ये चेतन की निजी राय हो सकती है लेकिन भारत के सभी युवाओं के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता.

रोहित कुमार कहते हैं कि ये चेतन भगत की निजी सोच है लेकिन आरव सुधीर का मानना है कि चेतन को ये जानने की ज़रुरत है कि भारत का युवा अपने देश पर मर मिटने को तैयार है. नौकरी और स्टेटस से बिल्कुल परे.

अतीक अहमद और कमाल बरशिलिया संक्षेप में कहते हैं कि वो चेतन की बात से सहमत हैं क्योंकि अधिकतर युवा यही चाहते हैं.

अनिल वर्मा कहते हैं कि वो युवाओं के बारे में दावा नहीं कर सकते लेकिन वो अपने बारे में कहते हैं कि वो नौकरी तो कतई नहीँ चाहते लेकिन हाँ सोशल स्टेटस जरूर चाहता हैं. वो लिखते हैं, ‘‘मैँ चाहता हूँ कि देश के लिए कोई ऐसा काम जरूर करूँ कि मेरे बाद देश के लोग भले न याद करेँ लेकिन क्षेत्र के लोग जरूर याद करेँ.’’

परमवीर सिंह की राय है कि चेतन युवाओं की नब्ज़ पहचानते हैं और सही बात कह रहे हैं. वो कहते हैं कि चेतन की ये बात बिल्कुल सही है कि युवाओं के लिए नौकरी एकदम शीर्ष वरीयता वाली बात है.

हालांकि अमर प्रसाद परमवीर की राय से सहमत नहीं हैं वो कहते हैं कि चेतन बिल्कुल गलत हैं. एक राय को हम पूरे भारत की राय नहीं कह सकते हैं.

संदीप महतो बंगलौर में कार्यरत हैं.

वो स्पष्टता देते हुए कहते हैं, ‘‘कहीं ना कहीं आज का युवा भारत जिसे हम देश का भविष्य मानते हैं, उसे आज सबसे ज्यादा चिंता नौकरी की ही रहती है और जिन्हें नौकरी की चिंता नहीं वो आवारागर्दी में रहते हैं....ऐसे में चेतन जी की बात सही नजर आती है. वो पढाई भी करते हैं तो लक्ष्य नौकरी पाना ही होता है अन्यथा उसकी पढाई की कदर नहीं होती, शायद इसीलिए इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे व्यावसायिक पढाई आज ज्यादा फेमस हैं.’’

संदीप के उलट हरीश सिंह चेतन की बात से सहमत दिखते हैं. वो लिखते हैं- हाँ मैँ आपसे सहमत हूं क्योँकि आज के समय मेँ मानव की आवश्यकताऐँ बढ़ गयी हैँ जिस कारण मानव सबसे पहले पैसे के पिछे अंधी दौड़ में शामिल है.उसके बाद छोकरी की चाह होती है आज मानव को किसी भी चीज से सन्तुष्टि नहीँ है चाहे उसके पास सभी सुविधाऐँ पर्याप्त रूप मेँ क्योँ न हो.

नवल जोशी कहते हैं कि चेतन के बाज़ार में ज्यादा बिकने से उनकी बात को प्रमाणिक नहीं माना जा सकता है.

वो कहते हैं,‘‘बाजार के अपने नियम हैं जो उनका पालन करेगा वह बिकेगा.हमारा मकसद यह भी नहीं है कि चेतन ने कुछ कहा और हम प्रतिक्रिया कर दें कोई कुछ कहने को आजाद है.वास्तव में तो जब हम किसी के बारे में अपनी राय रखते हैं तो वह राय उससे सम्बन्धित होती ही नहीं है वह केवल हमारा नजरिया होता है इसीलिए एक ही मुद्दे पर इतनी अलग-अलग राय सामने आती हैं. कुछ यांकी टाईप लडकों के बारे में चेतन की यह राय सही भी हो सकती है लेकिन भारत बहुत बडी बात है चेतन को अभी उस मुकाम तक पहुंचना है.’’

उमेश खाके कहते हैं कि चेतन शायद शहरों के लिए ये बात कह रहे हैं वो संभवत गुस्से में लिखते हैं- चेतन भगत जरा देहात में जाए और मजदूर-किसान युवाओं कि भी सोच देखें. बाद में वो शायद अपनी किताब को फाड कर फेक दें.

अभिषेक अंशुल का मानना है कि चेतन अपनी किताब बेचने के लिए ऐसा कह रहे हैं वो कहते हैं. ‘‘चेतन भगत अपनी पुस्तक बेचने के लिए इस तरह की बात कह रहे हैं ये कोई आश्चर्य की बात नहीं है. उनकी पहले की पुस्तकों के पढ़ कर के कोई भी ये अंदाजा लगा सकता है. रही बात आज के युवा की तो वह इतना जागरूक हो गया है की उससे किस ऐरे गैरे नत्थू खैरे लेखक के राय की आवश्यकता नहीं है. चेतन भगत ने आईआईटी और आईआईएम के नाम को खराब करने का ही काम किया है.’’