असम के मसले पर हंगामे की संभावना

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Image caption मानसुन सत्र में मनमोहन सिंह सरकार पर विपक्ष तीखे प्रहार करेगा.

संसद के बुधवार से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में विपक्षी दल असम में हाल में हुई धार्मिक हिंसा, बढ़ती मंहगाई, देश की अर्थव्यवस्था और सूखे की बन रही स्थिति पर सरकार को धेरने की कोशिश करेंगे.

भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि वो असम का मामला सत्र के पहले दिन ही उठाएगी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने असम के दंगों को राष्ट्र के माथे पर कंलक क़रार दिया था.

असम के मामले को लेकर संसद में ख़ासा हंगामा होने की बात कही जा रही है. इस मामले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष पहले से ही एक दूसरे पर आरोप मढ़ते रहे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि विरोधी राजनीतिक दलों ने पहले ही नोटिस देकर कहा है कि वो स्पेक्ट्रम और कोयला खदान आवंटन घोटाले, एयरसेल-मैक्सिस सौदे का मामला संसद में उठाएंगे.

विरोधी खेमा सरकार में सहयोगी दल- त्रिणमूल कांग्रेस द्वारा रेलवे मंत्रालय की देख-रेख का मामला भी संसद में उठाएगा.

रेलवे का कार्यभार

मनमोहन सिंह सरकार में रेलवे मंत्रालय शुरू से ही ममता बनर्जी की त्रिणमूल कांग्रेस के पास रहा है. लेकिन आरोप लगते रहे हैं कि पहले ममता बनर्जी और बाद में वर्तमान मंत्री मुकुल राय का ज़्यादा समय कोलकाता में बीता है और उन्होंने विभाग के काम-काज पर पूरा ध्यान नहीं दिया है.

सरकार पर हाल में महाराष्ट्र के पुणे में हुए बम धमाके और बिजली की हालत को लेकर भी तीखे प्रहार होंगे.

कहा जा रहा है कि विपक्ष ये मांग उठा सकता है कि सरकार एक नई सिंचाई नीति लाए और किसानों के लिए भी नई सुविधाओं की घोषणा हो.

प्रणव मुखर्जी को राष्ट्रपति चुने जाने के बाद शुशील कुमार शिंदे को लोकसभा में सत्ता पक्ष की ओर से सदन का नेता बनाया गया है. नए गृह मंत्री के लिए नया सत्र काफी चुनौती भरा होगा.

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा है कि वो सरकार से अर्थव्यवस्था पर चर्चा करवाने की मांग करेंगी.

विदेशी पूंजी निवेश

उन्होंने कहा है कि वो सरकार से मांग करेंगी की वो ख़ुदरा व्यापार में विदेशी पूंजी निवेश पर अपना रुख़ साफ़ करे.

इस मामले पर वामपंथी दल और बीजेपी दोनों एक ही मत रखते हैं. उधर त्रिणमूल कांग्रेस भी ख़ुदरा व्यापार में विदेशी पूंजी निवेश के ख़िलाफ़ है.

वामपंथी दलों की ओर से संकेत मिले हैं कि वो सत्र के भीतर छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की हत्या और मारुति के मानेसर कारख़ाने में हिंसा का मामला उठाएंगे.

संसद सत्र के पहले दिन ही संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन समन्वय समिति की बैठक भी बुलाई गई है.

इस सत्र के दौरान 31 बिल चर्चा के लिए सूचीबद्ध किए गए है. संसद सत्र सात सितंबर को समाप्त होना है.

हालांकि इस सूची में लोकपाल विधेयक शामिल नहीं किया गया है कि लेकिन सत्ता पक्ष की ओर से कहा जा रहा है कि उसे भी सदन के पटल पर रखा जाएगा.

उनका कहना है कि उन्हें फिलहाल संसद की विशिष्ट समीति की रिपोर्ट का इंतज़ार है.

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