बीपीएल को मोबाइल देगा यूपीए

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Image caption अगर सरकार ये योजना लाती है तो 32 रुपए से कम कमाने वाले हर परिवार के पास एक मोबाइल फोन होगा.

केंद्र सरकार ने एक नई और महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों को मुफ्त में मोबाइल उपलब्ध कराने का फैसला किया है.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यूपीए सरकार ने सात हज़ार करोड़ रुपए की इस योजना को अंतिम रुप दे दिया है जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हर परिवार को एक फोन दिया जाएगा.

इस योजना को हर हाथ में फोन का नाम दिया गया है और संभवत इस योजना की घोषणा 15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह करेंगे.

अखबारों ने प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि हर फोन पर 200 मिनट का टॉक टाइम भी फ्री में दिया जाएगा.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार चुनाव से करीब डेढ़ साल पहले इस योजना को नरेगा की तरह प्रचारित प्रसारित कर सकती है.

सरकार का मानना है कि यह गरीबों की ताकत बढ़ाने का एक बड़ा प्रयास है.

लेकिन सरकार की इस आने वाली योजना की सोशल मीडिया में सुबह से ही आलोचना शुरु हो गई है.

जाने माने अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय <span > @bibekdebroy का ट्विट था- मैं हिंदी कविता के बारे में अधिक नहीं जानता लेकिन किसी ने लिखा है..हर हाथ में मुझे पत्थर नज़र आता है.

<span >@GabbbarSingh लिखते हैं- मोबाइल फोन बीपीएल परिवारों के लिए. अब वो चिट्ठी नहीं लिखेंगे आत्महत्या करने से पहले टेक्सट मैसेज कर देंगे.

<span >@centerofright यूपीए ने बीपीएल के लिए मोबाइल लांच किया. अब गरीब, भूखमरी, बीमारी, अशिक्षा, बेरोजगारी भूल जाएं और घटिया मोबाइल को स्वीकार करें.

मूल रुप से इस फैसले की आलोचना तो हो रही है लेकिन कुछ लोग ये भी मानते हैं कि इससे गरीब परिवारों का काफी भला भी हो सकता है.

फेसबुक पर अल्फ्रेड नोबल लिखते हैं.जहां हाथ हाथ में मोबाइल करता है बसेरा वो भारत देश है मेरा.

जाने माने पत्रकार रवीश कुमार लिखते हैं- अब बीपीएल वालों को भी पेस्की मैसेज आवेगा. प्लॉट ले लो. सॉना बाथ ले लो. थाईलैंड चलो. फ्री के मोबाइल से सरकार एक ठो भोटे न लेगी रे दीपू. ग़रीबी रेखा से जो ऊपर नहीं आएँगे उनको अमीरी रेखा से ऊपर वाले दीदी भैया का डुप्लीकेट मॉडल वाला सामान दे दे न रे .अंतर त ख़त्म हो जाएगा न जी. पावर्टी डेनसिटी में कम से कम टेली डेनसिटी त कमा जाएगा न रे दीपुआ. कोई टीभी दिया कोई मंगल सूत्र, कोई दिया पजामा, अरे अरे एंगरी मत हो, देखो डेमोक्रेसी का ड्रामा.

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