अन्ना बनाम रामदेव का आंदोलन

 गुरुवार, 9 अगस्त, 2012 को 13:56 IST तक के समाचार

विशेषज्ञों की राय

रामदेव - अन्ना हजारे

विशेषज्ञों से लेकर सोशल मीडिया तक दोनों आंदोलनों पर विभाजन साफ़ है.

कोई बाबा रामदेव के आंदोलन को अन्ना हज़ारे के आंदोलन का दूसरा पहिया बता रहा है तो कोई उससे बहुत ज़्यादा अलग. विशेषज्ञों से लेकर सोशल मीडिया तक मत विभाजन साफ़ है.

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रामलीला मैदान पर बाबा रामदेव के आंदोलन पर ओपन पत्रिका के राजनीतिक संपादक हरतोष बल का कहना है कि अन्ना हज़ारे के आंदोलन को पंथ,धर्म या आरएसएस से निकला आंदोलन कहना मुश्किल था इसलिए मध्य वर्ग उसके साथ जुड़ा हुआ भी था लेकिन रामदेव के आंदोलन के बारे में यह नहीं कहा जा सकता.

आंदोलन का चरित्र

हरतोष बल जोर दे कर कहते हैं " रामदेव का आंदोलन पूरी तरह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या आरएसएस से निकला है इसलिए इसे एक दक्षिणपंथी आंदोलन कहा जा सकता है लेकिन अन्ना के आंदोलन के बारे में यह नहीं कहा जा सकता. "

लेकिन जवाहरलाल नेहरु विश्वविदयालय के समाज शास्त्र विभाग में प्रोफेसर आनंद कुमार का मत बल से अलग है. कुमार कहते हैं कि अन्ना का आंदोलन और रामदेव का आंदोलन दोनों एक गाड़ी के दो पहिए हैं. आनंद कुमार के अनुसार दोनों ही जनभावनाओं का प्रदर्शन कर रहे हैं और दोनों के उद्देश्य राजनीतिक नहीं हैं.

रामदेव के आंदोलन के आरएसएस के साथ रिश्तों की बात पर आनंद कुमार कहते हैं कि "हाँ यह साफ़ नहीं है कि दोनों में रिश्ते क्या हैं लेकिन कभी-कभी आंदोलन नेता से बड़े होते हैं जैसे स्वतंत्रता का आंदोलन गाँधी जी से बड़ा था और आपातकाल का आंदोलन जय प्रकाश नारायण से बड़ा था."

क्या होगा अंजाम

हरतोष का मानना है कि अन्ना का आंदोलन समाप्त हो गया लगता है, उसके आगे कोई बड़ा रूप लेने की कोई संभावना नहीं है. ज़्यादा से ज़्यादा उसका असर यह होगा कि अगले आम चुनाव में इसका कॉंग्रेस को कुछ नुकसान होगा. हरतोष कहते हैं, " रामदेव का आंदोलन अगर चुनाव तक किसी तरह से बच गया तो उसकी वजह से भारतीय जनता पार्टी को लाभ होगा और यही उसकी नीयत है लेकिन मुझे नहीं लगता कि उनका यह उद्देश्य सफल होगा."

आनंद कुमार का मानना है कि इन आन्दोलनों से क्रांति होगी और भारतीय राजनीति का दशा और दिशा दोनों बदल जाएंगी.

केवल विशेषज्ञ ही नहीं सोशल मीडिया पर मौजूद लोग भी इन आंदोलन के चरित्रों पर बंटे हुए हैं. फेसबुक के बीबीसी हिंदी के पन्ने पर छिड़ी एक गर्मा-गर्म बहस में यह विभजन साफ़ दिखता है.

फेसबुक पर अमित राठौर को "अन्ना की टीम कांग्रेसी लगती है." तो विनय जोशी कहते हैं " बाबा अब योग में ध्यान दें क्योंकि रामलीला मैदान से वो भागे थे तो हमने देखा था."

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सोशल मीडिया में प्रतिक्रियाएं

बाबा रामदेव

कई लोग मानते हैं कि रामदेव का आंदोलन ईश्वरीय योजना के तहत परवान चढ़ रहा है

फेसबुक पर अन्ना हज़ारे और बाबा रामदेव के आंदोलन के अंतरों पर छिड़ी बहस उतनी ही गंभीर और तीखी है जितनी विशषज्ञों के बीच की बहस.

बीबीसी हिंदी के फेसबुक पन्ने पर लिखी टिप्पणी में रवि नाईक का कहना है- "रामदेव के आंदोलन में भरोसे की कमी दिखती है."

दूसरी तरफ़ राजन तिवारी का मानना है- "इस आंदोलन के लिए जितना माहौल, मेहनत और जन जागरण स्वामी ने किया है उतना अन्ना जी ने नहीं किया था." इसी तरह नरेश पवार अपनी टिपण्णी में कहते हैं "किशन बाबूराव उर्फ़ अन्ना का 'आंदोलन' सरकार में बैठे लोगों के दिमाग की ही उपज थी, रामदेव बाबा का आंदोलन देश हित के लिये है."

बँटे समर्थक

दूसरी तरफ़ पारस गुप्ता बीच का रास्ता अपनाते हैं और कहते हैं " दोनों आंदोलन देश को देशद्रोहियों से मुक्त कराने के लिए है. एक का ध्यान भ्रष्टाचार पर है दूसरे का ध्यान काले धन पर."

अन्ना हज़ारे और बाबा रामदेव भले ही एक दूसरे के बारे में कोई नकारात्मक टिपण्णी करने से बचते हों लेकिन उनके समर्थक इस शांति को बनाए रखने के लिए कोई ख़ास प्रयास करते नहीं दीखते. फेसबुक पर अमित राठौर को "अन्ना की टीम कांग्रेसी लगती है." तो विनय जोशी कहते हैं " बाबा अब योग में ध्यान दें क्योंकि रामलीला मैदान से वो भागे थे तो हमने देखा था."वैसे रामदेव के आंदोलन का हर्ष क्या होगा इस पर जिस तरह के विचार आ रहे हैं उनसे रामदेव के आंदोलन के समाज के अलग हिस्सों पर प्रभाव को कहीं ना कहीं देखा जा सकता है. आम सड़क चौराहों ही की तरह फेसबुक पर भी मुसलमान बाबा रामदेव के आंदोलन पर ज़्यादा टिपण्णी नहीं कर रहे और जो कर भी रहे हैं वो रामदेव से सशंकित दिख रहे हैं.

इकबाल राजा का मानना है " बाबा का आंदोलन नहीं बल्कि सुर्खियों में रहने का तरीका है." जबकि मोहम्मद मिराज को लगता है कि बाबा रामदेव कानूनी पचड़े में फंसे अपने साथी बालकृष्ण को बचाने में लगे हैं. मिराज़ कहते हैं " बालकृष्ण के लिए बहुत परेशान है बाबा. उन्हें ही बाहर लाने के लिए दबाव बना रहे हैं. सेनापति ही रणभूमि छोड़कर भाग जाता है तो पब्लिक का क्या होगा."

ईश्वरीय योजना?

इन लोगों से अलग राकेश कुमार सिंह को लगता है कि रामदेव का आंदोलन ईश्वरीय योजना के तहत परवान चढ़ रहा है. सिंह अपनी टिपण्णी में कहते हैं " अगले दिनों मनीषियों की एक नई बिरादरी का उदय होगा, नया नेतृत्व उभरेगा, जो देश, जाति, वर्ग आदि के नाम पर विभाजित समुदाय को विश्व नागरिक स्तर की मान्यता अपनाने, विश्व परिवार बनाकर रहने के लिए सहमत करेंगे. नए लोग जिनकी पिछले दिनों कोई चर्चा तक न थी. वे इस तत्परता से बागडोर संभालेगे मानो वे इसी प्रयोजन के लिए कही ऊपर आसमान से उतरे हों या धरती फोड़ कर निकले हों. तब विग्रह नहीं, हर किसी पर सृजन और सहकार सवार होगा. (पंडित श्री राम शर्मा आचार्य की भविष्यवाणी स्रोत-अखंड ज्योति पत्रिका, जून 1974 , पृष्ट 19 से)"

इन सभी लोगों से अलग नवीन जोशी कहते हैं " अन्ना और रामदेव में तुलना करना सम्भव ही नहीं है यही कहा जा सकता है कि अन्ना और रामदेव दोनों विरोधी विचार है. अन्ना का जीवन खुली किताब है जबकि रामदेव रहस्यमय व्यक्ति हैं इनका अपना बडा आर्थिक साम्राज्य है जबकि अन्ना के पास कुल जमा पूंजी रू0 70 हजार हैं.रामदेव महिलाओं के कपडे पहन कर आंदोलन स्थल से भागते हुए पकडे गये.रामदेव जो कि अपने को महायोगी कहते है छह दिन के अनशन में ही हिम्मत हार गये जबकि अन्ना तेरह दिन तक अनशनरत रहे और आष्वासन दिये जाने के बाद भी उन्होनें आपाधापी में अनषन नहीं तोडा बल्कि सूर्यास्त के बाद भोजन न करने के अपने नियम के कारण अगले दिन ही अनषन तोडा,अन्ना जो भी वार्ता करते हैं वे मध्यस्थों के जरिए करते हैं जबकि रामदेव हर वार्ता खुद ही करते हैं यह भी एक रहस्य है.रामदेव बडी-बडी बातें करते हैं लेकिन उनके गुरू रहस्यमय ढंग से गायब हो गये यह मुद्दा उन्होने कभी नहीं उठाया. "

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