सरिस्का में आया नया मेहमान

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Image caption राजस्थान में इस वक्त करीब साठ बाघ हैं

राजस्थान में बाघों से निर्जन हुए सरिस्का अभयारण्य में रणथंभौर से लाई गई बाघिन ने एक बच्चे को जन्म दिया है.

इस अभयारण्य में साल 2004 तक 15 बाघ थे, लेकिन शिकारियों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया.

अब जंगल में बाघ की दहाड़ एक बार फिर से सुनाई देने लगी है.

रणथम्भौर अभयारण्य से सरिस्का में लाकर आबाद किए गए बाघों के कुनबे में ये पहला बच्चा पैदा हुआ है.

जब तीन बाघिन और दो बाघों को सरिस्का में लाया गया था तो इस पर बहुत सवाल उठे थे.

लेकिन बाघिन का नन्हा शावक जब जंगल में नजर आया तो वन-विभाग ने खुशी का इज़हार किया है.

बड़ी कामयाबी

राजस्थान की वन मंत्री वीना काक कहती हैं कि ये एक बड़ी कामयाबी है.

उनका कहना है, ''ऐसी धारणा बनी हुई थी कि बाघों को एक अभयारण्य से दूसरे अभयारण्य ले जाने पर उन्हें दिक्कत होती है, वे वातावरण के साथ घुलमिल नहीं पाते हैं. बाघ का शावक नजर आने से इन सवालों का जबाव मिल गया है.''

वे कहती हैं, ''सरिस्का इसलिए भी महत्वपूर्ण था कि चार-पांच साल पहले शिकार की वजह से यहां बाघों का एकदम सफाया हो गया था. हमारे लिए भी सरिस्का को दोबारा आबाद करना जरूरी था. मेरे ख्याल है कि बाघों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर बसाने का भारत सरकार का प्रयास सफल हुआ है.''

राजस्थान में इस वक्त करीब साठ बाघ हैं लेकिन सरिस्का में नया शावक नजर आने से खुशी इस तरह मनाई जा रही है जैसे किसी बेऔलाद शहशांह के यहां बहुत मन्नतों के बाद चश्मे-चराग पैदा हुआ है.

बाघ जंगल का बादशाह है, ये उसकी सल्तनत है. उसे सबसे खतरनाक जानवर माना जाता है.

लेकिन जिस तरह एक-एक करके 15 बाघ शिकारियों का निशाना बने, कहना मुश्किल है कि कौन ज्यादा खतरनाक है इनसान या जानवर.

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