असम: ट्रेन से लोगों के फेंकने की घटना पर पुलिस चुप

 बुधवार, 22 अगस्त, 2012 को 16:12 IST तक के समाचार

इस घटना के बाद तनाव का माहौल है

पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ फैली अफवाह और दहशत के बीच बैंगलौर से असम के लिए जा रही एक विशेष ट्रेन में इकठ्ठा हुई भीड़ ने पहले तो लोगों के आई-कार्ड चेक किए और फिर मार-पीट पर ट्रेन से बाहर फेंक दिया.

रोंगटे खड़े कर देने वाली ये घटना है पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी की जहां शनिवार को उग्र भीड़ ने ट्रेन के एक डिब्बे के दरवाजों को अंदर से बंद कर दिया. ट्रेन के बंद कंपार्टमेंट में मुसलमानों को चिन्हित कर उनके साथ मारपीट की गई.

इस मामले पर राज्य पुलिस या रेलवे पुलिस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.

यात्रियों के साथ लूटपाट और मारपीट के दौरान 14 लोगों को ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और दस बुरी तरह से घायल हो गए. ये सभी मुसलमान थे.

मारे गए लोगों के शव और घायलों को जलपाईगुड़ी के फलाकट और बेलाकोबा स्टेशनों के पास पाया गया.

आपबीती

बैंगलौर में गार्ड का काम करने वाले 22 वर्षीय शाहजहान अहमद चौधरी भी इसी ट्रेन से अपने घर लौट रहे थे. शनिवार को उनके साथ भी मारपीट की गई, जिसके बाद वो नाजुक हालत में अस्पताल में भर्ती हैं.

पीड़ित के भाई का बयान

"ट्रेन के डिब्बे में सवार सभी लोगों के पहचान पत्र जांचे गए और वहा मिले 14 मुसलमानों को 40-45 लोगों की उग्र भीड़ ने अलग-थलग कर दिया. सभी दरवाजे बंद कर दिए गए और 14 लोगों को भीड़ मारने-पीटने लगी.

भीड़ के द्वारा चिन्हित किए गए हमारे क्षेत्र के लोगों से मोबाइल फोन और पैसे छीन लिए गए. मार पीट करने वाले लोग धमकी दे रहे थे कि वो चिन्हित किए गए लोगों का गला काट देंगे और ट्रेन से फेंक देंगे. करीब दो-ढ़ाई घंटे तक मारपीट के बाद उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया.

घटना के वक्त पुलिस वहां नही थी और डिब्बे का दरवाजा बंद होने के कारण दूसरे लोग भी वहां नहीं पहुंच पाए."

- जिलान अहमद चौधरी

हमले के बारे में शाहजहान ने ट्रेन में रहते हुए अपने बड़े भाई जिलान अहमद चौधरी को बता दिया था.

बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टाशाली ने जिलान चौधरी से बात की.

अपने भाई शाहजहान के ब्यौरे को याद करते हुए जिलान अहमद ने कहा, “ट्रेन के डिब्बे में सवार सभी लोगों के पहचान पत्र जांचे गए और वहा मिले 14 मुसलमानों को 40-45 लोगों की उग्र भीड़ ने अलग-थलग कर दिया. सभी दरवाजे बंद कर दिए गए और 14 लोगों को भीड़ मारने-पीटने लगी.”

उन्होंने आगे कहा, “भीड़ के द्वारा चिन्हित किए गए हमारे क्षेत्र के लोगों से मोबाइल फोन और पैसे छीन लिए गए. मार पीट करने वाले लोग धमकी दे रहे थे कि वो चिन्हित किए गए लोगों का गला काट देंगे और ट्रेन से फेंक देंगे. करीब दो-ढ़ाई घंटे तक मारपीट के बाद उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया.”

जिलान अहमद के अनुसार ट्रेन में सवार उनके भाई ने फोन पर उन्हें बताया था कि हिंसक हो चुकी भीड़ में शामिल लोग उसी ट्रेन के यात्री थे और बैंगलौर से ही ट्रेन में सवार हुए थे.

जिलान ने कहा, “घटना के वक्त पुलिस वहां नही थी और डिब्बे का दरवाजा बंद होने के कारण दूसरे लोग भी वहां नहीं पहुंच पाए.”

घायलों की हालत नाजुक

मारे गए चारों लोगों की अंत्येष्टी में करीब छह हजार लोग इकठ्ठा हुए,

मारे गए चारों लोगों को मंगलवार को उनके गांवों में दफना दिया गया, जबकि बाकी दस का सिलीगुड़ी के एक अस्पताल में उपचार किया जा रही है, जहां उनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है.

असम के हैलाकांडी जिले के पुलिस अधीक्षक ब्रजेनजीत सिंघा ने कहा, “मारे गए चारों लोगों की अंत्येष्टी में करीब छह हजार लोग इकठ्ठा हुए, इलाक़े में तनाव है लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई.”

पुलिस का कहना है कि जाकिर हुसैन नाम का एक युवक भी उसी ट्रेन में यात्रा कर रहा था जो हमले के बाद से गायब है.

उत्तर-पूर्व फ्रंटीयर रेल के प्रवक्ता एसएस हाजोंग ने कहा, “ट्रेन में आरपीएफ के दस विशेष तौर पर प्रशिक्षित जवान और पांच रेलवे पुलिस के जवान तैनात थे, लेकिन बंद दरवाजों के बीच क्या हो रहा था ये किसी ने सुरक्षाकर्मियों को नहीं बताया.”

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