कोयला मुद्दे पर मनमोहन घिरे, गतिरोध जारी

 गुरुवार, 23 अगस्त, 2012 को 12:10 IST तक के समाचार
कोयले की खान

कोयला आवंटन में भ्रष्टाचार का आरोप पहले भी लगता रहा है लेकिन कैग रिपोर्ट के बाद विवाद बढ़ गया है.

कोयले के आवंटन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग कर रही बीजेपी अपनी मांग पर अड़ी है और इस मामले के तूल पकड़ने से संसद का मानसून सत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.

मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक लाए जाने वाले हैं लेकिन अब कोयले पर आई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के कारण संसद के इस सत्र में कोई भी बैठक पूरी तरह नहीं चल पाई है.

मुद्दा इतना बढ़ चुका है कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ पार्टी सदस्यों ने सभी संयुक्त संसदीय समितियों से इस्तीफा देने की रणनीति बनानी शुरु कर दी है.

भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि वो बिना प्रधानमंत्री के इस्तीफे के इस मुद्दे पर बहस नहीं करना चाहती जबकि यूपीए का कहना है कि वो इस मुद्दे पर बहस के लिए पूरी तरह से तैयार है.

संविधान विशेषज्ञ- सुभाष कश्यप

संसद का सत्र चलने में खर्च होता है वो तो ठीक है लेकिन मुझे डर किसी और बात का है. जिस तरह से कुछ वर्षों में संसद के न चलने से जो संदेश जा रहा है वो गंभीर है. ऐसा लगने लगा है कि देश की सर्वोच्च संस्था का गैरसंस्थानीकरण हो रहा है. सांसद इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. संसद प्रभावहीन होती जा रही है. ये संसदीय लोकतंत्र के लिए सोचने वाली बात है. संदेश ये जा रहा है कि संसद काम नहीं कर रही है. जनता का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही है.


टीवी प्रसारण के लिए मैं खुद को ही दोषी मानूंगा. मेरे कार्यकाल में ही टीवी प्रसारण शुरु हुआ था संसद की कार्यवाही का लेकिन इसके फायदे नुकसान दोनों हैं. संसद घर घर पहुंची है लेकिन ये सच है कि सांसद बेवजह हल्ला करते हैं ताकि ये साबित करें कि वो जनता की आवाज़ उठा रहे हैं गंभीर बहस कम हो गई है.

सत्ता और विपक्ष के बीच अविश्वास की कमी तो दिखती है. सत्ता पक्ष अपने गठबंधन के सहयोगियों का दबाव मानता है लेकिन विपक्ष से बात नहीं करता चाहे सत्ता में कोई भी दल हो. नेहरु जी प्रधानमंत्री होते हुए खुद अविश्वास प्रस्ताव का स्वागत करते थे कहते थे कि इस मौके पर वो सरकार की बात रख सकेंगे. एक बार तो उन्होंने यहां तक कहां कि मुझे नहीं पता विपक्ष कैसे मेरी सरकार बर्दाश्त कर रही है.

इस तरह की बहस अब देखने को नहीं मिलती है जो दुखद है. सत्ता और विपक्ष दोनों संसद के अंग हैं और दोनों को मिलकर संसद चलानी चाहिए.

लेकिन अविश्वास प्रस्ताव के लिए बीजेपी के सहयोगी दल तक तैयार नहीं हैं. ये बस आम जनता के बीच अपने नंबर बढ़ाने की कवायद है.

बीबीसी संवाददाता रेहान फजल के अनुसार अगर बीजेपी को सरकार गिरानी है तो प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगने की बजाय अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहिए.

सांसदों के इस्तीफों पर अटकलें

मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों में जल्दी आम चुनावों की आशंका और इससे जुड़े कयास लगाए जा रहे हैं लेकिन लगता नहीं है कि बीजेपी के अलावा विपक्ष के और सदस्य इस्तीफा देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

ऐसे में संसद में गतिरोध बने रहने की संभावना है क्योंकि न तो बीजेपी इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार दिखती है और न ही कांग्रेस पार्टी या यूपीए के घटक दल.

अभी आम चुनावों में काफी समय बाकी है और इस तरह की स्थिति का सामना कांग्रेस पार्टी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में कर चुकी है.

बोफोर्स तोप घोटाले के आरोपों के बाद विपक्ष के 100 से अधिक सांसदों ने 1989 में पद त्याग दिया था जिसके बाद आम चुनाव जल्दी कराने पड़े थे. हालांकि वो राजीव गांधी के पांच साल के कार्यकाल का आखिरी साल था और इस समय यूपीए सरकार का कार्यकाल पूरा होने में बीस महीने से अधिक समय है.

फिलहाल सत्ता और विपक्ष से बार बार बयान आ रहे हैं. प्रधानमंत्री इस मामले में कह चुके हैं कि वो बहस के लिए तैयार हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री को सीधे सीधे कोयला घोटाले में लिप्त बताकर उनका इस्तीफा मांग रही है.

ऐसी स्थिति में देखना होगा कि संसद की कार्यवाही कैसे चलती है और सांसद आगे क्या रणनीति बनाते हैं. हो सकता है कि आज बीजेपी के सांसद कई संयुक्त संसदीय समितियों से अपना नाम वापस लें और सरकार पर दबाव बनाना जारी रखें.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.