सीरिया के हालात पर चुप फुटबॉल खिलाडी़

 शुक्रवार, 24 अगस्त, 2012 को 01:51 IST तक के समाचार

सीरिया में लगातार संघर्ष चल रहा हैं और इस संघर्ष से दूर सीरिया की टीम दिल्ली में चल रही नेहरु कप फुटबॉल प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही हैं.

सीरिया के संघर्ष की तस्वीरें देख मन में सवाल उठता हैं कि इस तरह के संघर्ष के बीच वहाँ जीवन कैसा होता होगा.

हालांकि ये सवाल इतना राजनीतिक नहीं हैं लेकिन अगर इस सवाल का जवाब दिया जाए तो इसके राजनीतिक मतलब निकाले जा सकते हैं.

"हम यहां पर राजनीति के बारे में बात करने के लिए नहीं आए हैं. देखिए हम खिलाडी हैं, हम खेल के बारे ही बात कर सकते हैं राजनैतिक हालात पर बात तो नेता ही करते हैं."

मुस्साबिल, कप्तान सीरियाई फुटबॉल टीम

सीरियाई खिलाड़ी इस बात से वाकिफ हैं और इस बारे में कुछ नहीं बोल रहे हैं.

हालात पर चुप्पी

दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन कॉलेज के मैदान पर सीरिया की टीम अभ्यास के लिए पहुंची और उनसे मुलाकात करने को मैं भी वहां पहुंच गया.

एक घंटे से ज्यादा चले अभ्यास में खिलाड़ियों ने खूब पसीना बहाया. सभी खिलाड़ी अभ्यास पर ध्यान दे रहे थे हालांकि उनके बीच कोई खास हंसी मज़ाक नहीं चल रहा था.

ये कहना मुश्किल हैं कि ये अभ्यास की गंभीरता हैं या सीरिया के हालात का असर. हालांकि जब मैंने तस्वीर लेनी शुरु की तो खिलाड़ी ज़रुर मुस्कुराए.

अभ्यास के खत्म होने के बाद मैंने एक खिलाड़ी से पूछा कि सीरिया के हालात से क्या उनपर असर पड़ता हैं. इस सवाल के जवाब में खिलाड़ी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया " ये सवाल बहुत मुश्किल है. हम इसका जवाब नहीं दे सकते."

मुश्किल सवाल

सीरियाई कप्तान मुस्साबिल (बांए) साथी खिलाडी ख़ालिद ब्रिज़ावी

इसके बाद मैंने कोच से बात की तो कोच ने बताया कि टीम में अंग्रेजी बोलने वाले बहुत कम हैं.

मेरे अनुरोध पर सीरियाई टीम के कोच ने टीम के कप्तान मुस्साबिल को बुलाया साथ ही टीम के एक और खिलाड़ी खालिद ब्रिजावी को भी बुलाया जिन्हें अंग्रेजी आती थी.

बातचीत में पता चला कि मुस्साबिल के पिता इंजीनियर हैं और 10 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार सीरिया के लिए फुटबॉल खेलने का सपना देखा. मुस्साबिल सीरियाई टीम के गोलकीपर हैं.

सीरिया में फुटबॉलरों के लिए हालात कैसे हैं इस सवाल के जवाब में मुस्साबिल कहते हैं, "हमारे देश में कंपनियां खिलाडियों की सहायता नहीं करती. हमारे देश में सरकार ही खिलाड़ियों की सहायता करती हैं इसके अलावा हम क्लब स्तर की फुटबॉल खेलते हैं."

जिस तरह के हालात सीरिया में हैं क्या उन हालात से खेल पर असर पड़ता हैं इस सवाल के जवाब में मुस्साबिल कहते हैं, " हम यहां पर राजनीति के बारे में बात करने के लिए नहीं आए हैं. देखिए हम खिलाडी हैं, हम खेल के बारे ही बात कर सकते हैं राजनीतिक हालात पर बात तो नेता ही करते हैं."

तो क्या उन्हें ना बोलने के लिए कहा गया हैं इस सवाल के जवाब में मुस्साबिल के बातों का हमारे लिए अनुवाद कर रहे खालिद ब्रिज़ावी कहते हैं "हम आपके इस सवाल का जवाब नहीं दे कहते हैं आप हमारी बात समझ रहे हैं ना."

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.