क्या फ़र्क पड़ता है कि राजेश खन्ना जिंदा हैं या नहीं: काटजू

 शनिवार, 25 अगस्त, 2012 को 04:09 IST तक के समाचार
मार्कण्डेय काटजू

मार्कण्डेय काटजू ने बिहार में प्रेस स्वतंत्रता पर भी टिप्पणी की थी

अपने बयानों से कई बार विवादों में आए प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने इस बार टीवी न्यूज़ चैनलों को अपना निशाना बनाया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ उन्होंने फ़िल्म स्टार्स, क्रिकेट और ज्योतिष शास्त्र पर ज़रूरत से ज़्यादा समय देने के कारण समाचार चैनलों को आड़े हाथों लिया.

बंगलौर में 'मीडिया और उसकी ज़िम्मेदारी' विषय पर आयोजित सेमिनार में उन्होंने कहा कि टेलीविज़न चैनल अर्थव्यवस्था, ग़रीबी, बेरोज़गारी और किसानों की आत्महत्या जैसे असली मुद्दों पर ध्यान नहीं देते.

इस सेमिनार का आयोजन अखिल भारतीय छोटे और मध्यम समाचारपत्र फ़ेडरेशन ने किया था.

कवरेज

जस्टिस काटजू ने इस पर नाराज़गी जताई कि न्यूज़ चैनल अपना ज़्यादा समय इस पर लगाते हैं कि कौन सी अभिनेत्री गर्भवती है और किसने बच्चे को जन्म दिया है.

उन्होंने राहुल द्रविड़ के संन्यास और राजेश खन्ना की मौत पर कुछ चैनलों ने 'हाइपर करवेज' किया.

नाराज़ काटजू ने यहाँ तक कह दिया- इससे क्या फ़र्क पड़ता है कि राजेश खन्ना ज़िंदा हैं या नहीं. उन्होंने इस पर आश्चर्य व्यक्त किया कि ग़रीबी, बेरोज़गारी और किसानों की आत्महत्या को समाचारों में कम ही जगह मिल पाती है.

प्रेस परिषद के अध्यक्ष ने इस पर भी दुख व्यक्त किया कि चैनल ईमेल या एसएमएस के तथ्यों की जाँच-पड़ताल किए बिना फ्लैश चलाने लगते हैं.

उन्होंने उदाहरण दिया कि जब भी देश में कहीं बम धमाका होता है तो बिना तथ्यों की पड़ताल के ये ख़बर फ्लैश होने लगती है कि इंडियन मुजाहिदीन, जैशे मोहम्मद या हरकतुल मुजाहिदीन ने इसकी ज़िम्मेदारी ली है. जबकि ऐसे संदेश शरारती तत्वों की ओर से भी आ सकते हैं.

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