आपका ड्राइविंग लाइसेंस बचा पाएगा किसी की जान

 शुक्रवार, 24 अगस्त, 2012 को 17:15 IST तक के समाचार

अंगदान को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ड्राइविंग लाईसेंस को अंगदान कार्ड का रूप देने की योजना बना रही है.

अंगदान को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ड्राइविंग लाईसेंस को अंगदान कार्ड का रूप देने की योजना बना रही है.

योजना के तहत ड्राइविंग लाईसेंस लेने वाले हर व्यक्ति को अनिवार्य रूप से बताना होगा की वो अंगदान करना चाहते हैं या नहीं.

सरकार के इस प्रस्ताव को अगले दो-तीन महीनों में पारित किये जाने की पूरी संभावना है क्योंकि डॉक्टरों और विपक्ष की पार्टियों ने इसका स्वागत किया है.

गुरुवार को डॉक्टरों की एक टीम उप-मुख्यमंत्री अजित पवार से मिली और कहा कि ये एक सही क़दम है.

बॉम्बे हॉस्पिटल के डॉक्टर आशीष तिवारी कहते हैं, "ये एक सही क़दम है क्योंकि देश में अंगदान को लेकर बहुत कम जानकारी है. लेकिन कई दूसरे कदम उठाने भी ज़रूरी हैं जिससे लोगों में जागरूकता फैले."

डा. तिवारी के मुताबिक, "अंगदान के लिए पहले अस्पतालों के ज़रिए जागरूकता फैलानी चाहिए और फिर इसके लिए और तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि भारतीय डॉक्टरों की सलाह को महत्व देते हैं."

भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सुमैया भी इसे सही क़दम है मानते हैं.

वे कहते हैं, "अगर मुझे ड्राइविंग लाईसेंस में ये सूचना दर्ज करानी हो तो मैं ख़ुशी से करूँगा. मैने अपनी आँखों का दान करने का फॉर्म पहले ही भरा है. अगर ये सूचना ड्राइविंग लाईसेंस पर भी हो तो अच्छी बात है."

"जानकारी ज़्यादा ज़रूरी"

लेकिन कुछ डॉक्टर इस क़दम को ग़ैर-ज़रूरी समझते हैं.

ब्रीच कैंडी अस्पताल के डाक्टर भवेश बरदे कहते हैं, "इस से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. अंगों की मांग बढ़ती ही जा रही लेकिन दान करने वालों की संख्या बहुत ही कम है. सरकार को चाहिए कि वो पहले लोगों में अंगदान के बारे में अधिक से अधिक जानकारी दे."

हाल में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलास राव देशमुख की मृत्यु के बाद इस प्रस्ताव का स्वागत स्वाभाविक है. उनकी मृत्यु का कारण था गुर्दों का पूरी तरह से न काम करना.

चेन्नई के जिस अस्पताल में उनका देहांत हुआ था वहां के डाक्टरों ने कहा था कि अगर समय पर कोई गुर्दा दान करने वाला मिल जाता तो संभव था की वो जिंदा बच जाते.

"ये एक सही क़दम है क्योंकि देश में अंगदान को लेकर बहुत कम जानकारी है. लेकिन कई दूसरे कदम उठाने भी ज़रूरी हैं जिस से लोगों में जागरूकता फैले."

डा.आशीष तिवारी, बॉम्बे हॉस्पिटल

अंगदान के मामले में मुंबई और महाराष्ट्र भारत के कई शहरों और राज्यों से पीछे है. जबकि मुंबई में पहला अंग प्रत्यारोपण का ऑपरेशन 1997 में हुआ था जिसे डाक्टर वत्सला त्रिवेदी ने किया था.

परिवार की अनुमति भी

लेकिन पिछले 15 वर्षों में मुंबई में केवल 321 अंगदान किये गए हैं जब कि तमिलनाडु में पिछले केवल चार सालों में 784 अंग दान किये गए.

राज्य सरकार के इस प्रस्ताव का मकसद है लोगों को अंगदान के लिए प्रोत्साहित करना और इस बारे में आम लोगों में जानकारी बढ़ाना.

लेकिन डॉक्टर वत्सला त्रिवेदी के हवाले से स्थानीय अखबारों ने कहा कि स्पेन में भी ड्राइविंग लाईसेंस को अंगदान के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इसके बावजूद अस्पतालों में जाकर ही अधिकतर अंग हासिल किये जाते हैं.

उनके अनुसार भारत में मरने वालों के अंग निकालने से पहले उसके परिवार से पूछना लाज़मी है तो ड्राइविंग लाईसेंस में जानकारी हो या न हो, इससे क्या फर्क पड़ेगा.

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