कोयला आवंटन मामले पर गतिरोध जस का तस

 सोमवार, 27 अगस्त, 2012 को 15:19 IST तक के समाचार
सुषमा स्वराज

सुषमा स्वराज ने सरकार पर तीखे प्रहार किए

कोयला आवंटन मामले में प्रधानमंत्री के बयान की राजनीतिक स्तर पर कड़ी आलोचना हो रही है और भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि कोयला आवंटन में हुए घोटाले में सरकार और कांग्रेस पार्टी दोनों शामिल हैं.

लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी की नेता सुषमा स्वराज़ ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कड़े तेवर अपनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने बस अपने बयान में एक अच्छी बात कही है कि वो मंत्रालय की ज़िम्मेदारी लेते हैं और उन्हें नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा देना चाहिए.

सुषमा स्वराज का कहना था, '' प्रधानमंत्री अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी लें. जबानी जमा खर्च न करें. इस सरकार खजाने के घाटे की नैतिक ज़िम्मेदारी प्रधानमंत्री की बनती है. नैतिक ज़िम्मेदारी लेकर इस्तीफा दें और सारे कोल ब्लॉक के आवंटन रद्द किए जाएं.''

सुषमा स्वराज

"मैं आरोप लगाती हूं की कोयला ब्लॉक के आवंटन में जो भ्रष्टाचार हुआ है.इससे जो पैसा आया है वो कांग्रेस पार्टी को गया है सरकार को गया है. जांच हो इसकी निष्पक्ष तो पार्टी और सरकार दोनों एक ही कटघरे में मिलेंगे"

उनका कहना था, ''मैं आरोप लगाती हूं कि कोयला ब्लॉक के आवंटन में जो भ्रष्टाचार हुआ है. इससे जो पैसा आया है वो कांग्रेस पार्टी को गया है सरकार को गया है. जांच हो इसकी निष्पक्ष तो पार्टी और सरकार दोनों एक ही कटघरे में मिलेंगे.''

उनका कहना था कि प्रधानमंत्री बार बार ये श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं कि कि कांपिटिटिव बीडिंग की प्रक्रिया उन्होंने शुरु की लेकिन प्रधानमंत्री को श्रेय तब मिलता जब से प्रक्रिया जल्दी लागू होती.इस प्रक्रिया का फैसला 2004 में लिया गया और जारी करने में आठ साल से अधिक समय लिया गया.

पार्टी ने आरोप लगाया कि जितनी जल्दी नीति लाने में हुई उससे अधिक जल्दी कोयला के ब्लॉक आवंटित करने में जल्दी हुई. सरकार ने चार वर्षों में 142 कोयला ब्लॉक आवंटित किए जबकि इन्हीं चार वर्षों में राज्य सरकारों ने करीब 70 कोयला ब्लॉक आवंटित किए.

प्रधानमंत्री के बयान में शेर के जवाब में सुषमा का कहना था, ‘‘जब आदमी सवालों के जवाब से खुद बेआबरु होने का खतरा रहता है तो आदमी चुप रहता है.’’

प्रधानमंत्री का बयान

मनमोहन सिंह

मनमोहन सिंह पर कोयला मामले में दबाव बढ़ रहा है

संसद से बाहर प्रधानमंत्री ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ मैं देश को ये आश्वासन देना चाहता हूं कि हमारा पक्ष बिल्कुल सही है. कैग की रिपोर्ट विवादास्पद है और जब ये रिपोर्ट संसदीय लेखा समिति के सामने आएगी तो हम उसे चुनौती देंगे. हम विपक्ष से आग्रह करते हैं कि संसद चलने दें ताकि जनता ये फैसला करे कि कौन सही है और कौन ग़लत.’’

पिछले चार दिनों से प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े की मांग को लेकर विपक्ष संसद नहीं चलने दे रही है. इस मुद्दे पर सोमवार को भी जब प्रधानमंत्री ने बयान रखा तो भारी शोर शराबा हुआ.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ मेरा रवैय्या यही रहा है कि मैं आधारहीन बार बार लगाए जा रहे आरोपों पर नहीं बोलता हूं. मेरा रुख रहा है कि हज़ारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरु रखी.’’

मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री

"मैं देश को ये आश्वासन देना चाहता हूं कि हमारा पक्ष बिल्कुल सही है. कैग की रिपोर्ट विवादास्पद है और जब ये रिपोर्ट संसदीय लेखा समिति के सामने आएगी तो हम उसे चुनौती देंगे. हम विपक्ष से आग्रह करते हैं कि संसद चलने दें ताकि जनता ये फैसला करे कि कौन सही है और कौन ग़लत"

हालांकि मनमोहन सिंह ने ये भी कहा कि वो इस मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहते थे. उनका कहना था, ‘‘ ये एक बड़ा मुद्दा था और मैं पूरे देश के सामने, संसद के सामने अपना पक्ष रखना चाहता था. मुझे दुख है कि विपक्ष ने मुझे अपनी बात नहीं रखने दी.’’

शोर शराबे के बीच बयान

प्रधानमंत्री ने भारी शोर शराबे के बीच लोकसभा में अपना बयान पढ़ा जिसे सुना जा सकना असंभव था.

प्रधानमंत्री कार्यालय के ट्विटर पर इस बयान के कुछ अंश जारी किए गए जिसके अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा है कि अनियमितताओं के आरोप निराधार बिना किसी सबूत के हैं.

उनका कहना था, ''मैं संसद के सदस्यों को आश्वस्त करना चाहूंगा कि इस कार्यालय के प्रभारी के तहत, मैं पूरी ज़िम्मेदारी लेता हूं मंत्रालय के फैसलों की. ''

प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि कैग की टिप्पणियां विवादित हैं और उस पर बहस हो सकती है.

प्रधानमंत्री के बयान पढ़ने के पूरे समय लोकसभा में भारी शोर शराबा होता रहा लेकिन प्रधानमंत्री चुप नहीं हुए और उन्होंने अपना पूरा बयान पढ़ा.

इसके बाद कई विधेयक भी लोकसभा में रखे गए लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि कौन से विधेयक पारित हुए क्योंकि विपक्ष पूरे समय शोर शराबा करता रहा..

स्पष्ट है कि विपक्ष प्रधानमंत्री का बयान सुनना नहीं चाहता है और वो इस्तीफे की मांग पर अड़ा है जबकि यूपीए सरकार किसी बी शर्त पर प्रधानमंत्री के इस्तीफे के लिए राज़ी नहीं हो रही है.

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