कसाब को तुरंत हो फांसी

 बुधवार, 29 अगस्त, 2012 को 12:32 IST तक के समाचार
हेमा थंकी

हेमा थंकी चाहती हैं कि कसाब को जल्दी से जल्दी फांसी दे दी जाए

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई में 26 नवंबर के हमलों के दोषी करार दिए गए अजमल क़साब के खिलाफ फांसी की सज़ा बरक़रार रखी है जिससे मुंबई में इन हमलों से प्रभावित होने वालों ने राहत की सांस ली है. लेकिन वो उसे तुरंत फाँसी देने के हक में हैं.

हेमा थंकी, जो हमलों की रात अपने पति और दस साल के बेटे के साथ ताज महल होटल में थी, वो बताती हैं कि फैसला सुन कर चैन तो ज़रूर मिला लेकिन "मैं इत्मीनान की सांस उसी समय लूंगी जब उसे फांसी के फंदे पर देखूँगी".
हमले की रात वो और उनके पति अपने बेटे से रात भर बिछड़ गए थे.

उनके कई जानने वाले कसाब के साथियों की गोलियों का निशाना बने थे. वो कहती हैं,"जब हमला शुरू हुआ तो हम लोग शामियाना रेस्तरां में खाना खा रहे थे.

हम सभी लोग टेबल के नीचे छिप गए. हमारे करीब के एक टेबल में दो लोगों को गोलियां लगीं और वो ज़ख़्मी हो गए. बाद में उनकी मृत्यु हो गयी"

हेमा थंकी

"हमें एक नया जीवन मिला. लेकिन कसाब और उसके साथियों ने कितने लोगों को मारा, कितना नुकसान किया. उसे फाँसी तुरंत देनी चाहिए"

जिंदा बच जाने के बाद हेमा थंकी और उनके पति अपने बेटे का बेसब्री से इंतज़ार करने लगीं.

वो हमले से कुछ ही मिनट पहले टायलेट गए थे जो रिसेप्शन के पास है.

वो अगले दिन ही अपने बेटे से मिल पाए. "हमें एक नया जीवन मिला. लेकिन कसाब और उसके साथियों ने कितने लोगों को मारा, कितना नुकसान किया. उसे फाँसी तुरंत देनी चाहिए."

सलीम पेशे से खानासामा हैं.वो उस रात को अपने परिवार के साथ अपने घर के बाहर जा रहे थे कि अचानक उन पर गोलियां बरसने लगीं. "मेरे समेत मेरे परिवार के छह लोगों को गोलियां लगीं. आज भी हम उससे संभल नहीं सके हैं. कसाब को सजा देना ही काफी नहीं है. हर उन लोगों को फाँसी देनी चाहिए जो इसमें शामिल थे."

दक्षिण मुंबई के एक रेस्तरां में एक साथ दो भाई वेटर थे. दोनों उस रात काम पर थे. एक बच गया लेकिन दूसरा हमले में मारा गया. एक साल बाद अपने और अपने भाई के परिवार का बोझ न संभल सका और उसका दिल का दौरा पड़ने से उसका देहांत हो गया.

उसके रिश्तेदार कहते हैं: "कसाब को फ़ौरन फाँसी देनी चाहिए. इंतज़ार करने की ज़रुरत नहीं. अब उसे लटका देना ही ठीक होगा."

कसाब राष्ट्रपति से रहम की भीख मांग सकता है. अब सारा मामला राष्ट्रपति के हाथ में होगा.

हेमा राष्ट्रपति को एक पैगाम देना चाहती हैं " जब मामला आपके पास आये तो हम लोगों की परेशानियों और जानी नुकसान का ध्यान रखना. उसे कोई रहम देने की ज़रुरत नहीं."

मुंबई में 26 नवम्बर 2008 की रात पाकिस्तान से दस लोग एक कश्ती में सवार हो कर आये और शहर के पांच अहम् इलाकों पर हमला कर दिया. अंधाधुंध गोलियां चलाईं गई और कई हथगोले फेंके गए.

पुलिस ने हमला करने वाले नौ लोगों को ढेर कर दिया और अजमल कसब को ज़ख़्मी हालत में गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार होने के बाद उसने इस षडयंत्र का राज़ फाश किया. उसने बताया की किस तरह से इन हमलों की योजना पाकिस्तान में बनायी गयी और किस तरह से उन्हें इस के लिए ट्रेनिंग दी गई.

कसाब के खिलाफ मई 2010 में मुंबई की एक विशेष अदालत ने पहले फाँसी की सजा सुनाई, उसके बाद बांबे हाई कोर्ट ने इस फैसले को बरक़रार रखा और आज सुप्रीम कोर्ट ने भी फाँसी के इस फैसले को कायम रखा है.

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