कैसे डॉन से राजनेता बने अरुण गावली..

 शनिवार, 1 सितंबर, 2012 को 07:29 IST तक के समाचार

शिवसेना पार्षद की हत्या के एक मामले में अरुण गावली को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.

महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव 2004 के नतीजे आ रहे थे. मेरी नज़र पड़ी जीतने वालों की फेहरिस्त में क्लिक करें अरुण गावली पर. वो अंडर वर्ल्ड की अपनी ज़िंदगी छोड़ कर पहली बार विधान सभा का चुनाव लड़ रहे थे.

क्लिक करें 'गुंडा गर्दी से राजनीति तक' का उनका सफ़र कामयाबी तक पहुंच चुका था और मुंबई के अंडर वर्ल्ड के वो पहले डॉन थे जो सियासत में सफ़ल हुए थे.

मैं उसी समय उनके इलाके के लिए रवाना हो गया. मेरी गाड़ी का ड्राइवर जो मराठी मूल का था बहुत उत्साहित हो रहा था. उसका भी नाम था अरुण. वो गाड़ी तेज़ चला रहा था तो मैंने पूछा इतना उत्तेजित क्यूँ हो रहे हो? उस ने कहा वो अपने हीरो के इलाके में जा रहा है इसलिए.

मैंने सोचा मेरा ड्राइवर कुछ ज़्यादा ही जुनूनी है, लेकिन हमारी गाड़ी जब एक बड़े फाटक से हो कर अंदर घुसी तब मुझे समझ में आया की मेरे ड्राइवर से भी अधिक उत्साहित एक बड़ी भीड़ अरुण गावली की जीत पर जश्न मन रही है.

'आइ ऐम द डैडी'

फाटक के बहार लगा की अंदर एक दो बड़े घर होंगे जहाँ अरुण गावली रहे होंगे. लेकिन अंदर जाकर देखा तो एक पूरी बस्ती आबाद थी. लोग नाच रहे थे, नारे लगा रहे थे और पटाखे छोड़ रहे थे. अरुण गावली बस्ती में मौजूद नहीं थे.

मुझे अरुण गावली के बेटे से मिलाया गया. बेटे ने बताया की उनके पिता चुनाव दफ्तर से अपने समर्थकों के साथ आने वाले हैं. हमें एक कमरे में बैठाया गया जहाँ कई रिपोर्टर और कैमरामैन बैठे क्लिक करें डॉन का इंतज़ार कर रहे थे. मुंबई के लिए ये एक बड़ी खबर थी.

मैंने एक टीशर्ट पहन रखी थी जिस पर लिखा था 'आइ ऐम द डैडी'. एक महिला रिपोर्टर की इस पर नज़र पड़ी और उस ने मुझे टीशर्ट बदलने की सलाह दी. मैं ने पूछा क्यूँ? उस ने कहा इस इलाके में दो नहीं हो सकते. और फिर मुस्कुराते हुए उसने कहा अरुण गावली को यहाँ के लोग 'डैडी' के नाम से बुलाते हैं.

मुझे मालूम था की अरुण गावली को उनके इलाके में राबिन हुड का दर्जा दिया जाता है. वो इस बस्ती के मसीहा के तौर पर देखे जाते हैं क्यूंकि बस्ती के लोगों के लिए गावली ने काफी काम किया था. इसी लिए बस्ती के लोग उन्हें प्यार से 'डैडी' कह कर बुलाते हैं

गावली की लोकप्रियता

दो घंटे के इंतज़ार के बाद आखिर अरुण गावली फाटक के अंदर एक बड़ी भीड़ के साथ आये. पूरी बस्ती बाहर उमड़ आई उन्हें बधाई देने. बस्ती के लोग आ रहे थे और उनके सामने सजदा करते जा रहे. थे. मुझे अरुण गावली की लोकप्रियता का अंदाज़ा था. लेकिन उस दिन पहली बार मैं ने अपनी आँखों से देखा की उनके समर्थकों में उनकी कितनी बड़ी इज्ज़त है.

थोड़ी देर के बाद वो घर के अनदर आए जहाँ मीडिया वाले उनका इंतज़ार कर रहे थे. मैं ने टीशर्ट नहीं बदली थी. उस महिला रिपोर्टर ने एक बार फिर कहा अरुण गावली हमारी टीशर्ट से नाराज़ हो सकते हैं और उनके इलाके में उन्हें नाराज़ कोई नहीं कर सकता.

मैं ने हिम्मत की और 'डैडी' का सामना किया. दस मिनट के बाद 'डैडी' अनदर आये और मराठी में बोलना शुरू किया. जितना भारी भरकम अंडर वर्ल्ड की दुनिया में उनका नाम था उतनी हल्की उनकी शख्सियत.

क्या इसी छोटे, काफी छोटे क़द के दुबले पतले सांवले इंसान से एक समय पूरी मुंबई डरती थी और पुलिस उनको हाथ लगाने से कतराती थी? उनकी मोटी मूंछ को छोड़ कर उनकी शख्सियत में कोई भी डराने वाली बात नहीं थी.

लेकिन ये सच है की एक समय मुंबई में और ख़ास तौर से मुंबई के अंडर वर्ल्ड में उनकी तूती बोलती थी.

मैं उनके सामने बैठा था. उन्होंने मेरे सवालों का जवाब दिया और मेरी टीशर्ट पर लिखे शब्द भी देखे होंगे.

लेकिन उनकी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई. मैं समझ गया उन्हें अंग्रेजी नहीं आती. मैं ने उसके बाद और भी हिम्मत दिखाई और उन्हें इन शब्दों का मतलब बताया और मज़ाक से कहा, "आप अकेले 'डैडी' नहीं." वो अपनी मोटी और चौड़ी मूंछों पर ताव देकर मुस्कुराए. मैंने अपनी हमदर्द महिला रिपोर्टर की तरफ देखा. उसके चेहरे पर घबराहट थी. लेकिन मैं शांत था. गावली की बातों और हावभाव से मुझे समझ में आ गया था की इस शेर के दांत झड़ चुके हैं.

बड़ा झटका

बॉलीवुड फिल्मों के अंदाज़ में अंडर वर्ल्ड से राजनीति के इस सफ़र पर चलने वाले अरुण गावली के अतीत ने उनका दामन नहीं छोड़ा. आज अदालत के उम्र क़ैद के फैसले से न केवल अरुण गावली को बल्कि मुंबई के पुरे अंडर वर्ल्ड को ये पैग़ाम जाता है की उनके काले कारनामों का अंजाम जेल की सलाखों के पीछे पूरी उम्र काटना हो सकता है.

अदालत के फैसले को मुंबई पुलिस की अंडर-वर्ल्ड के खिलाफ एक बड़ी सफलता भी मानी जायेगी.

यूँ तो दस साल पहले काफी हद तक अंडर वर्ल्ड का सफाया हो चुका था.

उनके खिलाफ मुंबई पुलिस ने एक मुहिम चलायी थी जिसके नतीजे में कई डॉन मारे गए थे और कई देश से फ़रार हो गए थे. लेकिन पिछले कुछ सालों में उनकी वापसी शुरू हो गयी थी. हाल में अंडर वर्ल्ड गैंग द्वारा मुंबई के एक पत्रकार की हत्या इसका उदाहरण है.

लेकिन अरुण गावली और उनके दस साथियों के खिलाफ अदालत के फैसले से अंडर वर्ल्ड को एक बड़ा झटका ज़रूर लगा होगा.

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