भय नहीं पर दरार पैदा होती है: मुंबई में बसे बिहारी

 मंगलवार, 4 सितंबर, 2012 को 10:28 IST तक के समाचार
राज ठाकरे

राज ठाकरे का आरोप कि बिहारियों की वजह से अपराध बढ़ रहे हैं

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के संस्थापक राज ठाकरे ने मुंबई में बिहारियों का मुद्दा एक बार फिर उठाया है.

पिछले हफ्ते राज ठाकरे ने कहा था कि मुंबई में रहने वाले बिहारी घुसपैठिए हैं और उनको शहर से निकाला जाना चाहिए. सोमवार को उनके चाचा बाल ठाकरे ने उनके विचारों का समर्थन किया है.

क्या इस से मुंबई में हिंदी बोलने वाले उत्तर भारतीयों के बीच कोई भय पैदा हो गया है? क्या मुंबई में बिहारी विरोध भावनाएं फिर से जन्म ले रही हैं?

'भय नहीं पर दरार पैदा होती है'

मुंबई में रहने वाले बिहार विधान परिषद संस्था के सदस्य देवेश चन्द्र ठाकुर कहते हैं कि शहर में रह रहे बिहारियों के बीच इस बयान से किसी भी तरह का भय नहीं है.

"बिहारियों के खिलाफ इस तरह के भाषण से डर तो नहीं पैदा होता लेकिन बिहारी और मराठी जनता के बीच दरार जरूर पैदा करता है"

बांद्रा के मोहम्मद इकबाल

"लोगों के बीच किसी तरह की दहशत नहीं हैं. इससे पहले यहाँ बिहार के मुख्यमंत्री भी आए थे और लोगों ने उनका अच्छी तरह से स्वागत किया था."

देवेश चन्द्र ठाकुर ने इस साल अप्रैल में बिहार शताब्दी समारोह दिवस का आयोजन किया था जिसमें लाखों बिहारियों ने शिरकत की थी. बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार भी इसमें शामिल हुए थे.

बान्द्रा उपनगर में बिहारियों की एक कच्ची बस्ती में रहने वाले मोहम्मद इकबाल कहते हैं, "बिहारियों के खिलाफ इस तरह के भाषण से डर तो नहीं पैदा होता लेकिन बिहारी और मराठी जनता के बीच दरार जरूर पैदा करता है.”

कुछ लोग कहते हैं कि अगर पिछले कुछ सालों की घटनाओं पर नज़र डालें जिनमें से कुछ हिंसात्मक घटनाएँ भी हैं, तो राज ठाकरे के बयान को गंभीरता से लेना चाहिए.

मुंबई में मराठी भाषा के प्रचारक और भारतीय जनता पार्टी के एक सदस्य प्रोफ़ेसर विशुभाऊ बापट कहते हैं राज ठाकरे का बयान ग़लत है.

वे कहते हैं, “भारत सभी भारतीयों के लिए है. कोई भारतीय देश के किसी भी कोने में जा कर रह सकता है और काम कर सकता है. राज ठाकरे का बयान और इस पर बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार की प्रतिक्रिया सियासत की लड़ाई है.”

वो इसे ग़लत मानते हैं और कहते हैं, "देश के हर प्रांत से और हर मज़हब, हर जाति के लोग मुंबई आकर रह सकते हैं."

प्रोफ़ेसर बापट कहते हैं कि मुंबई सभी की है जिसमें यहाँ रहने वाले 15 से 20 लाख बिहारी भी हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार मुंबई की एक करोड़ साठ लाख आबादी में से 42 प्रतिशत लोग मराठी भाषा बोलते हैं. शहर की बाक़ी आबादी में गुजराती, सिंधी और हिंदी बोलने वाले सब से अधिक हैं.

'मुंबई पर किसी समुदाय विशेष का दावा नहीं'

अरुण टिकेकर मुंबई के एक प्रसिद्ध इतिहासकार हैं. वो कहते हैं कि मुंबई के पहले निवासी कोली, आगरी और भंडारी समूह के लोग थे.

आधुनिक मुंबई की स्थापना अग्रेजों ने की थी उसके बाद हर जगह से यहाँ आकर लोग बस गए.

"कोई भी विशेष समुदाय मुंबई पर अपने अधिकार का दावा नहीं कर सकता यह सभी की है . यह बात ज़रूर सच है कि मराठी संस्कृति की चाप मुंबई पर सबसे पहली पड़ी थी"

इतिहासकार अरुण टिककेकर

अरुण टेककेकर कहते हैं, "कोई भी विशेष समुदाय मुंबई पर अपने अधिकार का दावा नहीं कर सकता यह सभी की है . यह बात ज़रूर सच है कि मराठी संस्कृति की चाप मुंबई पर सबसे पहली पड़ी थी."

बिहारियों और उत्तर भारतीयों की एक बड़ी संख्या शहर की अर्थव्यवस्था से जुडी है. सुरक्षा कंपनियों में 90 प्रतिशत से अधिक लोग बिहार के हैं. इसी तरह से एक लाख टैक्सी चालकों में लगभग सभी पूर्वी उत्तर प्रदेश से आते हैं.

फिल्म की कई नामी गिरामी हस्तियाँ उत्तर भारत की हैं और इसे अपना घर समझती हैं. रोजाना मजदूरी करने वालों की एक बड़ी संख्या उत्तर भारत से आकर काम करने वालों की है. महाराष्ट्र के लोग भी ये स्वीकार करते हैं कि अगर हिंदी बोलने वालों को शहर से निकाल दिया जाए इसकी आर्थिक प्रगति रुक जाएगी.

बीबीसी हिंदी डाट काम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अंकिता वर्मा सिंह कहती हैं: "राज ठाकरे से किसी को कोई समस्या नहीं पर उन्होंने जो कहा वो ग़लत है"

पिछले दिनों मुंबई पुलिस ने बिहार पुलिस को जानकारी दिए बिना एक युवक को राज्य के सीतामढ़ी जिले से उठा लिया था जिसपर मुंबई में 11 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान एक शहीद स्मारक को नुकसान पहुंचाने का आरोप है.

इस मामले पर नाराजगी जताते हुए बिहार सरकार ने मुंबई पुलिस को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी थी.

इसी बात पर भड़के राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई पुलिस पर अगर कोई कार्रवाई हुई तो महाराष्ट्र में बिहारियों को भी घुसपैठिया मान कर मुंबई से खदेड़ दिया जाएगा.

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