यौन उत्पीड़न रोकथाम बिल लोकसभा में मंजूर

 मंगलवार, 4 सितंबर, 2012 को 03:05 IST तक के समाचार
यौन उत्पीड़न

सभी कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए आंतरिक कमेटी बनाई जाएगी.

सरकारी और निजी कार्यस्थलों पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकने के उद्देश्य से तैयार किए गए विधेयक को लोकसभा ने मंजूरी दे दी है.

सोमवार को सदन में कोयला आवंटन के मुद्दे पर जारी शोर शराबे के बीच ‘कार्यस्थलों पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और सुधार) अधिनियम -2010 बिना चर्चा के पारित कर दिया गया.

महिला और बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने ये विधेयक सदन में पेश किया.

इसके जरिए कामकाजी महिलाओं को सुरक्षा प्रदान की जाएगी जिनमें घरों में काम करने वाली लाखों महिलाएं भी शामिल हैं.

कृष्णा तीरथ ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “पहली बार इस विधेयक को लाया गया है. इससे महिलाओं को समर्थन मिलेगा. उन्हें काम करने में सुविधा रहेगी. वो बिना डरे शांति से अपना काम कर पाएंगी.”

लगेगा 50 हजार का जुर्माना

"पहली बार इस विधेयक को लाया गया है. इससे महिलाओं को समर्थन मिलेगा. उन्हें काम करने में सुविधा रहेगी. वो बिना डरे शांति से अपना काम कर पाएंगी."

कृष्णा तीरथ, महिला और बाल विकास मंत्री

इस प्रस्तावित कानून के तहत शारीरिक संपर्क, शारीरिक संबंध बनाने की मांग या आग्रह या अश्लील टिप्पणियां करना या अश्लील सामग्री दिखाने को यौन उत्पीड़न माना जाएगा.

किसी भी तरह के अवांछित शारीरिक, मौखिक या गैर मौखिक यौन व्यवहार को भी यौन उत्पीड़न के दायरे में रखा गया है.

इस कानून का उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

अगर बार-बार इसका उल्लंघन किया जाता है तो जुर्माने की राशि बढ़ा दी जाएगी और जिस कार्यस्थल पर ऐसा होगा, उसका लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है.

सभी क्षेत्र शामिल

सरकार कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा के लिए इस बिल को महत्वपूर्ण बता रही है.

कृष्णा तीरथ ने कहा, “अभी तक यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए संगठित क्षेत्र खास कर सरकारी दफ्तरों में कमेटी बनाई गई थी. असंगठित क्षेत्र में ऐसा नहीं था. अब हमने इसमें संगठित और असंगठित क्षेत्र के साथ-साथ घरेलू काम करने वाली महिलाओं को भी शामिल किया है. इसके दायरे में निजी, गैर सरकारी और व्यवसायिक क्षेत्र के सभी प्रतिष्ठानों को लिया गया है.”

इस प्रस्तावित कानून में घर में काम करने वाली नौकरानी को एक ऐसी महिला के तौर पर परिभाषित किया गया है जिसे नकद राशि या अन्य तरीके से दिए जाने वाले मेहनताने पर घर का काम करने के लिए घर के मालिक ने खुद या किसी एजेंसी के जरिए अस्थायी या स्थायी तौर पर रखा है. लेकिन उसे काम पर रखने वाले परिवार के किसी सदस्य को उत्पीड़न से संरक्षण देना इस कानून की परिधि में नहीं आता.

इसका मतलब है कि ये विशेष रूप से कामकाजी महिलाओं को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है.

आंतरिक कमेटी का प्रावधान

"अब हमने इसमें संगठित और असंगठित क्षेत्र के साथ साथ घरेलू काम करने वाली महिलाओं को भी लिया है. इसके दायरे में निजी, गैर सरकारी और व्यवसायिक क्षेत्र के सभी प्रतिष्ठानों को लिया गया है."

कृष्णा तीरथ, महिला और बाल विकास मंत्री

इस विधेयक का जायजा लेने वाली स्थायी संसदीय समिति की मजबूत राय है कि विधेयक में प्रतिबिंबित होने वाला रोकथाम का पहलू सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक होना चाहिए जो उसने 1997 के विशाखा वाद के संबंध में दिए गए थे.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में न सिर्फ कार्य स्थलों पर यौन उत्पीड़न को परिभाषित किया गया बल्कि इसकी रोकथाम और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए दिशा निर्देश भी निर्धारित किए गए.

इस विधेयक में सभी दफ्तरों, अस्पतालों, संस्थानों और अन्य कार्यस्थलों को निर्देश दिया गया है कि वे यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों से निपटने के लिए एक आंतरिक कमेटी बनाएं. इस कमेटी का नेतृत्व कोई महिला ही करेगी.

चूंकि भारत में बहुत सारी कंपनियों में 10 से कम कर्मचारी काम करते हैं और उनके लिए ऐसी कमेटी का गठन करना संभव नहीं है, इसलिए इस विधेयक में प्रावधान है कि जिला अधिकारी स्थानीय शिकायत समिति का गठन कर सकता है.

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