सीबीआई: कोयला आवंटन में अधिकारियों, कंपनियों की मिलीभगत

 मंगलवार, 4 सितंबर, 2012 को 20:49 IST तक के समाचार

पाँच एफआईआर में कंपनियों के 20 लोग और अज्ञात सरकारी अधिकारियों के नाम शामिल हैं

सीबीआई ने कोयला आवंटन मामले में कोयला कंपनियों और सरकारी अधिकारियों के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए पांच एफ़आईआर दर्ज किए हैं.

एफआईआर में निजी कंपनियों के 20 लोग और अज्ञात सरकारी अधिकारियों के नाम शामिल हैं.

हालाँकि मीडिया में इन कंपनियों के राजनीतिक संबंधों पर चर्चा हो रही है, सीबीआई अधिकारी किसी का भी नाम नहीं ले रहे हैं.

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साथ ही मंगलवार को 11 शहरों में कम से कम 30 जगहों पर छापे डाले गए और सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए.

इन शहरों में कोलकाता, पटना, हैदराबाद, धनबाद, नागपुर, दिल्ली और मुंबई शामिल हैं.

जिन कंपनियों के नाम एफआईआर में शामिल हैं वो हैं जेएएस इन्फ्रास्ट्रक्चर, एएमआर आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड, जेएलडी येवतमाल एनर्जी लिमिटेड, नवभारत पावर लिमिटेड और विनी आयरन ऐंड स्टील उद्योग लिमिटेड

जेएएस इन्फ्रास्ट्रक्चर को झारखंड की महुआगढ़ी कोयले की खदान आवंटित की गई थी. एएमआर को महाराष्ट्र की बंदर खदान मिली थी.

जेएलडी येवतमाल को छत्तीसगढ़ की फतेहपुर (पूर्व) खदान मिली थी. नवभारत पावर प्राइवेट लिमिटेड को उड़ीसा की रंपिया खदान में से एक खदान मिली जबकि विनी आरयन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड को झारखंड की रझारा (उत्तर) की खदान मिली थी.

आरोप

कब, क्या?

"जाँच जारी है और ज्यादा भी एफआईआर दर्ज किए जा सकते हैं"

सीबीआई अधिकारी

सीबीआई अधिकारी इन सभी पाँच कंपनियों पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने अपने बारे में गलत जानकारियाँ देकर खदाने हासिल की.

अधिकारियों के मुताबिक एएमआर, जेएएस और जेएलडी कंपनियों के कथित तौर पर प्रोमोटर एक ही है, लेकिन आवेदन करते वक्त जब प्रोमोटर से सवाल पूछा गया कि क्या उन्हें कोई और खदान दी गई है, तो जवाब भरा गया, नहीं.

सीबीआई ने कहा है कि प्रोमोटर ने कंपनियों की माली हालत को भी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया.

एक सीबीआई अधिकारी ने कहा, इन कंपनियों ने दूसरी कंपनियों के साथ छह महीने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए, लेकिन उन कंपनियों की हिस्सेदारी को अपनी हिस्सेदारी के तौर पर दिखाया.

सीबीआई ने आरोप लगाया कि इन खदानों में काम भी शुरू नहीं किया गया था.

नवभारत पावर लिमिटेड के बारे में अधिकारियों का कहना है कि कंपनी ने बैंक से आर्थिक मदद का पत्र लेकर अपनी आर्थिक हालत को कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर बताया.

सीबीआई के अनुसार नवभारत के एक व्यक्ति ने अपने 5,000 कंपनी शेयरों को अत्याधिक बढ़े हुए दामों में 50 करोड़ में बेचा, जबकि 85 करोड़ के कंपनी शेयरों को 12 करोड़ में बेचा गया.

सीबीआई का कहना है कि विनी आयरन ऐंड स्टील उद्योग ने भी अपनी आर्थिक स्थिति को गलत तरीके से पेश किया.

ये सभी कोयले की खाने 2006 और 2009 के बीच दी गईं थीं.

सीबीआई का कहना है कि जाँच जारी है और ज्यादा भी एफआईआर दर्ज किए जा सकते हैं.

आरोप है कि ऐसी कुछ कंपनियों को सिर्फ क्लिक करें कोयले के ब्लॉक हासिल करने के लिए स्थापित किया गया था और इसे मिलने के बाद उसे दूसरी कंपनियों को बड़ी प्रीमियम पर किराए पर दे दिया जाता था.

इससे पहले सोमवार को सरकार ने कोयला ब्लॉक के आवंटनो को एक सिरे से खारिज करने से मना कर दिया था.

उधर इस मामले पर क्लिक करें संसद की कार्यवाही भी प्रभावित हुई है.

भाजपा का कहना है कि अगर मनमोहन सिंह सरकार कोयला ब्लॉकों के आवंटन को रद्द नहीं करती और एक 'स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के आदेश नहीं देती है' तो भाजपा संसद के मॉनसून सत्र के ख़त्म होने के बाद देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी.

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