ख़ुशी की लहर, भारत से दक्षिण कोरिया तक!

 बुधवार, 5 सितंबर, 2012 को 09:32 IST तक के समाचार

दक्षिण कोरिया की उम्मीद बने भारतीय बच्चे

मिलिए किम जे चैंग से, जो भारत के गरीब बच्चों की मुस्कुराहट चुरा कर दक्षिण कोरिया ले जाते हैं!

देखिएmp4

इस ऑडियो/वीडियो के लिए आपको फ़्लैश प्लेयर के नए संस्करण की ज़रुरत है

वैकल्पिक मीडिया प्लेयर में सुनें/देखें

शाम का वक्त है और पुणे के कृष्णा नगर इलाक़े की एक बस्ती में ज़्यादातर बच्चे या तो घरों में अपनी मां का हाथ बंटाने में जुटे हैं या फिर झुग्गियों के बीच से निकलती संकरी गलियों में क्रिकेट खेलने में व्यस्त हैं.

लेकिन जैसे ही गायकी प्रतियोगिता की घोषणा होती है, तो सब छोड़-छाड़ ये बच्चे बस्ती के इकलौते स्कूल के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं.

इनमें से ज़्यादातर बच्चों को देखकर लगता नहीं कि इन्हें संगीत में ज़्यादा रूचि है, लेकिन बस्ती के सभी बच्चे प्रतियोगिता में हिस्सा ज़रूर लेना चाहते हैं.

वो इसलिए क्योंकि ये जानते हैं कि अगर ये यहां बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं, तो इन्हें दक्षिण कोरिया जाकर गाने का मौक़ा मिल सकता है.

दरअसल दक्षिण कोरियाई ओपरा गायक अपने संगीत ग्रुप ‘बनाना चिल्ड्रन क्वायर’ के लिए बेहतरीन आवाज़ की तलाश में इस बस्ती में आए हैं.

सभी बच्चे अपनी गायकी से उन्हें प्रभावित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.

संगीत के ज़रिए उम्मीद

"दक्षिण कोरिया में बहुत से लोग खुदखुशी करते हैं. वहां लोग बहुत तनाव में रहते हैं और शायद खुश रहने की अहमियत नहीं जानते. मैं इन बच्चों को दक्षिण कोरिया ले जाकर परफॉर्म करवाता हूं ताकि इनकी आंखों में उम्मीद की किरण देख कर वे लोग भी जीने की तमन्ना रख सकें"

किम जे चैंग, दक्षिण कोरियाई ओपरा गायक

किम जे चैंग भारत आने से पहले कीनिया में थे, जहां उन्होंने ग़रीब बच्चों का एक म्यूज़िक ग्रुप बनाया.

भारत में भी इनका मकसद यही था– संगीत के ज़रिए इन बच्चों की ज़िंदगी में बदलाव लाना.

हर साल वे इन बच्चों को दक्षिण कोरिया लेकर जाते हैं, जहां वे स्थानीय लोगों के लिए परफॉर्म करते हैं.

लेकिन उनकी इस पहल के पीछे उनका उदारवादी रवैया ही नहीं, बल्कि एक ख़ास मक़सद भी है.

किम जे चैंग का कहना है, “दक्षिण कोरिया में बहुत से लोग खुदकुशी करते हैं. वहां लोग बहुत तनाव में रहते हैं और शायद खुश रहने की अहमियत नहीं जानते. मैं इन बच्चों को दक्षिण कोरिया ले जाकर परफॉर्म करवाता हूं ताकि इनकी आंखों में उम्मीद की किरण देख कर वे लोग भी जीने की तमन्ना रख सकें. तमाम मुश्किलों के बाद अगर ये बच्चे ख़ुश रहना सीख सकते हैं तो मेरे देशवासी क्यों नहीं? ”

दक्षिण कोरिया की इस समस्या का समाधान उन्होंने इन ग़रीब बच्चों की मुस्कान में ढूंढना चाहा और इसीलिए ‘बनाना चिल्ड्रन क्वायर’ नाम का ग्रुप बनाया जिसमें 30 बच्चे शामिल हैं.

‘भाषा नो कोलावेरी’

हर शाम जब ये बच्चे रियाज़ के लिए संगठित होते हैं और किम के झूमते हाथों के इशारों पर सुरों का खूबसूरत तालमेल बैठाते हैं.

चाहे ‘कोलावेरी डी’ हो या अंग्रेज़ी का ‘आई हैव अ ड्रीम’, मराठी का कोई लोक गीत हो और या कोरियाई भाषा के प्रेरणा भरे गीत... ये बच्चे सभी भाषाओं में बेधड़क गाते हैं!

इन बच्चों ने तो विदेशी भाषा को अपना ही लिया है, लेकिन किम की हिंदी में गाने की क्षमता भी कुछ कम नहीं है.

क्लिक करें किम को हिंदी में गाते हुए सुनने के लिए यहां क्लिक करें

किम का कहना है कि उन्हें चार भाषाओं में संगीत सिखाने में कोई दिक्कत नहीं होती क्योंकि उनका मानना है कि संगीत की एक ही भाषा होती है और वो है मीठे सुरों की भाषा.

उनका कहना है, “जब मैं यहां आया तो मुझे कोई भी स्थानीय भाषा नहीं आती थी. यहां तक कि अंग्रेज़ी भी मैं ठीक से नहीं बोल पाता था. लेकिन संगीत की भाषा मुझे और मेरे शिष्यों को क़रीब लाई. मुझे अपने बच्चों पर गर्व है. वे कोरियाई भाषा में भी इतनी कुशलता से गाते हैं कि कोरिया के लोग भी उन्हें सुन कर दंग रह जाते हैं.”

बाथरुम सिंगर बना क्वायर सिंगर

"संगीत सीखने से पहले मैं केवल अपने गले का इस्तेमाल कर गाता था. लेकिन किम सर ने मुझे सिखाया कि कैसे अपने गले के भीतर छिपी आवाज़ को बाहर लाना है. मैं उन्हीं की तरह एक बेहतरीन गायक बनना चाहता हूं"

किम का कहना है कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती.

लेकिन जहां तक इन बच्चों की बात है तो इन्हें उम्मीद है संगीत इन्हें ग़रीबी की सीमा लांघने में ज़रूर मदद कर सकता है.

12 साल के स्टैनली की मां कहती हैं कि क्वायर ग्रुप का हिस्सा बनने से पहले वो केवल एक बाथरुम सिंगर था, लेकिन अब उसके सुर पड़ोसियों को भी उनके घर खींच लाते हैं.

अपने सुर में आई तब्दीली का गायकी के ज़रिए बयान करते हुए स्टैनली कहते हैं, “संगीत सीखने से पहले मैं केवल अपने गले का इस्तेमाल कर गाता था. लेकिन किम सर ने मुझे सिखाया कि कैसे अपने गले के भीतर छिपी आवाज़ को बाहर लाना है. मैं उन्हीं की तरह एक बेहतरीन गायक बनना चाहता हूं.”

स्टैनली के पिता की दिमाग़ी हालत ठीक नहीं है. घर का ख़र्चा उनकी दादी की कमाई से ही चलता है जो लोगों के घरों में बतौर बावर्ची काम करती हैं.

परिवार में सबका यही सपना है कि स्टैनली बेटा बड़ा होकर एक मशहूर गायक बने और उनके परिवार को ग़रीबी के चंगुल से बाहर निकलने में उनकी मदद करे.

किम और इन बच्चों के बीच का ये संगीतमय रिश्ता, दरअसल भारत और दक्षिण कोरिया के बीच एक व्यापारिक रिश्ते जैसा लगता है.

व्यापार सपनों का, उम्मीद का और ढेर सारी खुशियों का...

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.