हजारों शवों का डीएनए टेस्ट न होने से आक्रोश

 गुरुवार, 6 सितंबर, 2012 को 21:47 IST तक के समाचार
फाइल फोटो

अनेक लोग सालों से अपने परिजनों या उनके शवों का सुराग पाने के लिए बेताब हैं

भारत प्रशासित कश्मीर में 6000 अंजान लोगों की कब्रों में रखे गए शवों की सरकार की ओर से डीएनए प्रोफाइलिंग न होने से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और लापता युवकों के परिजनों में आक्रोश है.

उधर सरकार का मानना है कि इनमें से अधिकतर कब्रें पाकिस्तानियों, चेचेन और सूडान के नागरिकों की हैं. सरकार कहती है कि डीएनए प्रोफाइलिंग दोतरफा प्रक्रिया है और यदि कोई किसी विशेष कब्र में अपने परिजन के शव के बारे में बताता है, तभी ऐसा किया जा सकता है.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ये कह कर गुमराह कर रही है कि अधिकतर शव विदेशियों या स्थानीय चरमपंथियों के हैं.

'सरकार ने पूरी तरह इनकार नहीं किया'

मानवाधिकार संस्थाओं के गठबंधन कश्मीर कोआलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी के खुर्रम परवेज ने सूचना का अधिकार के तहत एक अर्जी के जरिए इस बारे में सरकार के जवाब मांगा था.

"यदि मुझे पता होता कि मेरे पति कहाँ दफन हैं तो मैं अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाती. यदि कोई चरमपंथी भी है तो वह गिरफ्तार किए जाने के बाद या सुरक्षा बलों से उठाए जाने के बाद लापता नहीं होना चाहिए"

ताहिरा बेगम जिनके पति सालों से लापता हैं

उनका कहना है, "इस समय दुनिया में इस्लाम से भय का वातावरण है और केंद्र सरकार इसी का फायदा उठाकर ये कह रही है कि अंजान कब्रों में जो भी दफन है वो चरमपंथी है."

लेकिन सरकार का कहना है कि उसने डीएनए प्रोफाइलिंग से पूरी तरह से इनकार नहीं किया है.

जम्मू कश्मीर के गृह सचिव बीआर शर्मा कहते हैं, "हम इसके लिए तैयार हैं लेकिन डीएनए प्रोफाइलिंग दोतरफा प्रक्रिया होती है. यदि कोई किसी कब्र विशेष के बारे में बताता है कि उसका मानना है कि उस कब्र में उसके रिश्तेदार का शव दफन है तो हम उसका खून का नमून लेकर शव के साथ मिला सकते हैं."

जब उनसे पूछा गया कि क्या किसी भी शव पर इस प्रक्रिया को अंजाम दिया गया है, तो उनका कहना था कि ये संभव नहीं था क्योंकि जो गोलीबारी में मारे गए उनके कोड नाम थे.

साथ ही सरकार ने कहा है कि यदि इन शवों के बारे में विवरण को सार्वजनिक किया जाता है तो इससे कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है.

"हम इसके लिए तैयार हैं लेकिन डीएनए प्रोफाइलिंग दोतरफा प्रक्रिया होती है. यदि कोई किसी कब्र विशेष के बारे में बताता है कि उसका मानना है कि उस कब्र में उसके रिश्तेदार का शव दफन है तो हम उसका खून का नमून लेकर शव के साथ मिला सकते हैं"

गृह सचिव बीआर शर्मा

मानवाधिकार संगठनों ने इसे एक भद्दा मजाक बताया है.

ताहिरा बेगम के पति कई सालों से लापता हैं. वे कहती हैं, "यदि मुझे पता होता कि मेरे पति कहाँ दफन हैं तो मैं अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाती. यदि कोई चरमपंथी भी है तो वह गिरफ्तार किए जाने के बाद या सुरक्षा बलों से उठाए जाने के बाद लापता नहीं होना चाहिए."

ताहिरा के साथ उसके ससुराल वालों ने रिश्ता तोड़ लिया था और अब वह खुद काम कर अपने तीन बच्चों का पेट पाल रही हैं. लेकिन भारत प्रशासित कश्मीर में कही ताहिरा हैं.

खुर्रम परवेज का कहना है, "सरकार का दावा था कि राज्य में सभी जगह जितनी कब्रों में चरमपंथी दफन हैं, उनमें से 574 विदेशी चरमपंथी हैं. लेकिन जब अधिकारियों ने जाँच की तो ये सभी स्थानीय लोगों के शव पाए गए."

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