क्या सुभाष चंद्र बोस 'उग्रवादी' हैं?

 गुरुवार, 6 सितंबर, 2012 को 11:44 IST तक के समाचार

क्या भारत की आज़ादी के नायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस 'उग्रवादी' थे? इस बात पर छत्तीसगढ़ में बहस छिड़ गई है.

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढने वाले बच्चे तो नेताजी को 'उग्रवादी' के रूप में ही जान रहे हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पाठ्य पुस्तक में ऐसा ही लिखा गया है.

इस किताब के 103वें पन्ने में लिखा गया है, "33 वर्ष की उम्र में वह कलकत्ता के मेयर और 1938 में कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए. बाद में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर फ़ॉरवर्ड ब्लाक नामक राजनीतिक पार्टी का गठन किया. सुभाष चंद्र बोस उग्रवादी थे."

इस पुस्तक को लेकर 'प्रबुद्ध नागरिक मंच' नाम के सामाजिक संगठन ने समाज को लामबंद करना शुरू कर दिया है. संगठन ने नेताजी के बारे में इस तरह के वाक्य का प्रयोग किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है.

निगम के अध्यक्ष अशोक शर्मा का कहना है कि उनका विभाग सिर्फ़ पुस्तकें छपवाने का काम करता है.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, “सरकार की ओर से नियुक्त की गई समिति पुस्तकों के संपादन का काम करती है. वह कहते हैं कि हो सकता है कि छपने में कोई चूक हो गई हो.”

'नेताजी का अपमान'

किताब का हिस्सा

"33 वर्ष की उम्र में वह कलकत्ता के मेयर और 1938 में कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए. बाद में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर फारवर्ड ब्लाक नामक राजनीतिक पार्टी का गठन किया. सुभाष चन्द्र बोस उग्रवादी थे"

सरकार के सूत्रों का कहना है कि सामाजिक विज्ञान की इस पाठ्य पुस्तक का संपादन रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति सच्चिदानंद जोशी की अध्यक्षता वाली 14 सदस्य समिति ने किया है.

निगम के अध्यक्ष शर्मा कहते हैं कि ये 'छोटी-सी भूल' मात्र ही है चूँकि लिखने वालों ने नेताजी को 'अग्रेसिव' लिखने के बजाय उग्रवादी लिख दिया. उनका कहना है कि इस बारे में सरकार को बता दिया गया है.

अब 'प्रबुद्ध नागरिक मंच' ने दुर्ग जिले के कोतवाली थाने में एक शिकायत दर्ज की है. शिकायत में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष और उन 14 लोगों का ज़िक्र किया गया है जिन लोगों ने सामाजिक विज्ञान की इस पुस्तक का संपादन किया है.

बीबीसी से बात करते हुए मंच के अध्यक्ष पवन केसवानी कहते हैं कि यह नेताजी का अपमान है.

उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद राज्य सरकार ने इस पर खेद नहीं प्रकट किया है और न ही पुलिस ने ही कोई कदम उठाया है. अब 'प्रबुद्ध नागरिक मंच' इस मामले को लेकर अदालत का दरवाज़ा खटखटाने का मन बना रहा है.

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