'मुसलमानों ने हमारे घर जलाए, हमने उनके..'

 शनिवार, 8 सितंबर, 2012 को 07:25 IST तक के समाचार

असम के कोकराझार इलाके में यूँ तो शांति लड़खड़ाती हुई लौट रही है लेकिन दंगों की बुरी यादें फिर से सब तहस नहस कर सकती हैं.

क्लिक करें असम के बोडो स्वायत्त इलाके के तीन जिलों में हुए क्लिक करें बोडो-मुसलमान दंगों ने इस इलाके के सामाजिक ताने बाने को छिन-भिन्न कर दिया है.

राज्य में मुसलमानों की पार्टी समझी जाने वाली ऑल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट या एआईयूडीएफ़ के महासचिव और विधायक हाजी बशीर अहमद काजमी का दावा है, "बोडो लोग अलग राज्य चाहते हैं, और वो तब तक नहीं होगा जब तक की बोडो इलाकों में उनकी बहुलता नहीं होगी. इसलिए वो क्लिक करें मुसलमानों को वहां से भगा कर जातीय समीकरणों को अपने पक्ष में करना चाहते हैं."

"अगर यहाँ की अन्य जातियां हमारी मदद कर दें तो हम बोडो लोगों को एकदम खत्म कर देंगे. वो हैं ही कितने. बस उनके पास घातक हथियार हैं."

स्थानीय निवासी

कोकराझार के पास दोतोमा के एक क्लिक करें शरणार्थी शिविर में एक बोडो लड़ाके ने नाम ना बताने की शर्त पर बातचीत के दौरान कबूला, "मुसलमानों ने हमारा घर जलाया और हमने भी भागने के पहले उनके घरों में आग लगा दी."

दूसरी तरफ़ एक टैक्सी चलाने वाले बिलासीपाड़ा के एक जवान मुसलमान लड़के ने बातचीत के दौरान कहा, "अगर यहाँ कि अन्य जातियां हमारी मदद कर दें तो हम बोडो लोगों को एकदम खत्म कर देंगे. वो हैं कितने. बस उनके पास घातक हथियार हैं."

कितने बांग्लादेशी?

असम में अवैध बांग्लादेशियों की संख्या पर जितने लोग उतने अनुमान हैं.

भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि असम में "घुसपैठिए" अगले "किंग मेकर" होंगे. बोडो महिला न्याय अधिकार मंच की अध्यक्ष अंजलि देईमारी के अनुसार ऐसे लोगों की संख्या लाखों लाख है.

अंजलि कहती हैं, "दंगे शुरू होने के एक दो दिनों के भीतर ही डुबरी से सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि अकेले कोकराझार ज़िले में छह लाख मुसलमान प्रभवित हुए हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार कोकराझार ज़िले में क़रीब 1.81 लाख मुसलमान थे और तब कोकराझार का आज की तरह दो हिस्सों में विभाजन नहीं हुआ था. तब इतने मुसलमान कहाँ से आए वो भी केवल एक ज़िले में."

अंजलि के भाई एक प्रतिबंधित छापामार संगठन रंजन देईमारी नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ बोडोलैंड के एक हथियारबंद धड़े के प्रमुख हैं और एक स्वतंत्र बोडो लैंड राष्ट्र के लिए उनका संगठन लड़ रहा है.

"बोडो लोग अलग राज्य चाहते हैं, और वो तब तक नहीं होगा जब तक की बोडो इलाकों में उनकी बहुलता नहीं होगी. इसलिए वो मुसलमानों को वहां से भगा कर जातीय समीकरणों को अपने पक्ष में करना चाहते हैं. "

हाजी बशीर अहमद काज़मी, महासचिव एआईयूडीएफ़

रंजन को भारतीय गुप्तचर एजेंसी आरएडब्ल्यू ने बांगलादेश से हाल ही में गिरफ़्तार किया था. असम पुलिस की मान्यता के अनुसार उनके संगठन के लड़ाकों के पास कई स्वचालित हथियार हैं.

विवादित अनुमान

कोकराझार के पास दोतोमा के एक क्लिक करें राहत शिविर में बातचीत के दौरान एक बोडो युवा ने कहा, "बांग्लादेशी मुसलमान यहाँ से नहीं जाते तो यह होता रहेगा. जब मैं पैदा हुआ था हमारे गाँव में मुसलामानों के 10-12 घर थे और बोडो के भी इतने ही थे. आज मुसलमानों के 150 घर हैं और बोडो के 12."

हालाँकि बोडो और मुसलमान दोनों ही अवैध रूप से आए बांग्लादेशी लोगों की बात को स्वीकार करते हैं लेकिन ऐसे लोगों की संख्या यहाँ सबसे ज़्यादा विवादित है.

एआईयूडीएफ़ के महासचिव और विधायक हाजी बशीर अहमद काजमी कहते हैं कि राज्य में बांग्लादेशियों की उतनी संख्या नहीं है जितने दावे किए जाते हैं. वो कहते हैं कि राज्य में जितने भी बांग्लादेशी हैं उन्हें यहाँ से हटा दिया जाये लेकिन आम मुसलमानों को परेशान ना किया जाए.

असम के मुख्यमंत्री क्लिक करें तरुण कुमार गोगोई कहते हैं कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में 2.5 लाख से कम बांग्लादेशी हैं.

गोगोई कहते हैं, "हो सकता है कि संख्या इससे कुछ कम या ज़्यादा हो लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है. जो दल बांग्लादेशियों के बारे में शोर मचा रहे हैं वो उनकी पहचान करने के सरकारी काम में मदद नहीं कर रहे हैं. भाजपा और एयूडीएफ़ केवल अपने राजनीतिक हितों के लिए माहौल को ख़राब कर रहे हैं."

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