दुग्ध क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन का निधन

 रविवार, 9 सितंबर, 2012 को 07:18 IST तक के समाचार

वर्गीज़ कुरियन लंबे समय से बीमार चल रहे थे.

भारत में श्वेत क्रांति के जनक माने जाने वाले वर्गीज़ कुरियन की मृत्यु हो गई है. वो 90 वर्ष के थे.

केरल में जन्मे कुरियन को गुजरात के आणंद शहर में सहकारी डेयरी विकास के एक सफल मॉडल की स्थापना करने और भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाने के लिए जाना जाता है.

वर्ष 1973 में उन्होंने गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फ़ेडरेशन (जीसीएमएमएफ़) की स्थापना की और 34 साल तक इसके अध्यक्ष रहे.

जीसीएमएमएफ़ ही वो संस्था है जो अमूल के नाम से डेयरी उत्पाद बनाती है.

11 हज़ार से अधिक गाँवों के 20 लाख से अधिक किसानों की सदस्यता वाली इस संस्था ने, सहकारिता के क्षेत्र में दूध और अन्य उत्पादों के लिए एक इतिहास रचा है.

पद्म पुरस्कारों से सम्मानित

कुरियन के जीवनकाल में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया.

वर्ष 1965 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

वर्गीस कुरियन आणंद के इंस्टिट्यूट ऑफ़ रुरल मैनेजमेंट (आईआरएमए) के अध्यक्ष भी रहे हैं.

इसी हफ्ते मुंबई में इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति ने डॉ.कुरियन के जीवन पर आधारित एक ऑडियो बुक का अनावरण किया था.

‘द मैन हू मेड द एलिफैंट डांस’ नाम की ये ऑडियो बुक, वर्ष 2005 में छपी उनकी जीवनी, ‘आई टू हैड ए ड्रीम’ पर आधारित है.

इसका अनावरण करते हुए नारायण मूर्ति ने कहा था, “एक सभ्य समाज वही है जो किसी के महत्वपूर्ण योगदान का आभार व्यक्त करे, अगर हमारा देश डॉ. कुरियन को भारत रत्न से सम्मानित नहीं करता तो मुझे नहीं समझ आता कि और कौन इस सम्मान के योग्य है.”

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