भारत में महंगाई की एक और मार

डीज़ल
Image caption डीज़ल की क़ीमत में पाँच रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी

भारत में राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने डीज़ल की क़ीमत में बढ़ोत्तरी को मंज़ूरी दे दी है. इस बैठक में डीज़ल की क़ीमत में प्रति लीटर पाँच रुपए की बढ़ोत्तरी का फ़ैसला किया गया है.

न सिर्फ विपक्ष ने बल्कि तृणमूल कांग्रेस जैसी सरकार की सहयोगी पार्टियों ने भी इस मूल्य वृद्धि को वापस लेने की मांग की है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर हुई बैठक में बैठक में ये भी फ़ैसला हुआ कि पेट्रोल, एलपीजी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बेचे जाने वाले केरोसीन तेल की क़ीमत में कोई बढ़ोत्तरी नहीं होगी.

लेकिन सरकार ने प्रति परिवार के लिए हर साल छह एलपीजी सिलिंडर तक की सीमा निर्धारित कर दी है.

यानी अब एक घर पर सब्सिडी वाले सिर्फ़ छह सिलिंडर मिलेंगे. इससे ज़्यादा सिलिंडर के लिए बाज़ार की ओर से तय क़ीमत अदा करनी होगी. बाज़ार की क़ीमत हर महीने तेल मार्केटिंग कंपनियाँ करेंगी.

विपक्ष की कड़ी आलोचना

भारतीय जनता पार्टी के नेता अनंत कुमार ने डीजल के दाम बढ़ाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि सरकार ने देश में कथित कोयला घोटाले की आग में डीजल डाल दिया है. पार्टी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि वो इस मूल्य वृद्धि के खिलाफ हैं क्योंकि इससे आम आदमी पर बोझ बढ़ेगा.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भी इसे आम आदमी की परेशानी बढ़ाने वाला कदम बताया है. उसका कहना है कि इससे उत्पादन की लागत बढ़ जाएगी और रियायती दर पर मिलने वाले सिलेंडरों की तादाद सीमित करके छह करने का फैसला पूरी तरह अस्वीकार्य है.

भाकपा नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि उनकी पार्टी सरकार के इस फैसला विरोध करती है और इसे वापस लेने की मांग करेगी.

वहीं यूपीए सरकार की सहयोगी तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी का कहना है कि वो इस बात को लेकर दुखी और आश्चर्यचकित हैं कि यूपीए गठबंधन में लंबे समय से होने के बावजूद इस तरह का फैसला करते वक्त उनकी राय नहीं ली गई.

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि सरकार तत्काल डीजल और रसोई गैस पर लिए गए इस फैसले को वापस ले.

कई मौकों पर सरकार को बचाने वाली समाजवादी पार्टी के नेता कमाल फारूकी ने भी विपक्ष के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि इससे आम आदमी का काफी नुकसान होगा. इसलिए वो इसे वापस लिए जाने की मांग करेंगे.

कांग्रेस का बचाव

दूसरी तरफ कांग्रेस ने सरकार के इस फैसला का बचाव करते हुए कहा कि ये दुखद फैसला है और पार्टी कीमतों में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी के पक्ष में कतई नहीं थी क्योंकि इसमें किसानों और आम आदमी का नुकसान है. लेकिन सरकार को कई बार देश हित में अलोकप्रिय फैसले लेने पड़ते हैं.

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बाद भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है. सीआईआई का कहना है कि ये फैसला आर्थिक मजबूरी के चलते लिया गया है.

फ़ैसला

पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 5.50 रुपए की कटौती का भी फ़ैसला सरकार ने किया है.

सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में बताया गया है कि डीज़ल में पाँच रुपए की बढ़ोत्तरी में से 1.50 रुपया उत्पाद शुल्क में बढ़ोत्तरी की मद में लिया जाएगा.

बाक़ी के प्रति लीटर 3.50 रुपए की बढ़ोत्तरी से तेल कंपनियाँ 15 हज़ार करोड़ रुपए बचाएगी, जबकि एलपीजी सिलिंडर की सीमा निर्धारित करके वो 5300 करोड़ रुपए बचा पाएगी.

वित्त मंत्रालय ने एलपीजी सिलिंडर की क़ीमत में 100 रुपए की बढ़ोत्तरी और प्रति लीटर डीज़ल की क़ीमत में चार रुपए की बढ़ोत्तरी करने का प्रस्ताव रखा था.

सरकार डीज़ल, केरोसीन तेल और एलपीजी पर सब्सिडी देती है ताकि ग़रीबों को इसका लाभ मिल सके.

लेकिन सरकार का कहना है कि राजस्व घाटे को कम करने के लिए क़ीमतों में बढ़ोत्तरी आवश्यक है.

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