इस्लाम विरोधी फिल्म पर कश्मीर में संयम की अपील

 शुक्रवार, 14 सितंबर, 2012 को 09:31 IST तक के समाचार
इस्लाम विरोधी फिल्म का विरोध

इस फिल्म का कई मुस्लिम देशों में व्यापक विरोध हो रहा है.

भारत प्रशासित कश्मीर में धार्मिक गुटों ने उस इस्लाम विरोधी फिल्म को लेकर संयम बरतने की अपील की है जिस पर लीबिया और दूसरे अरब देशों में व्यापक प्रदर्शन और हिंसा हुई है.

हालांकि अधिकारियों को आशंका है कि शुक्रवार को इस मुद्दे पर प्रदर्शन हो सकते हैं जबकि मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी में धार्मिक संगठन बराबर संयम की अपील कर रहे हैं.

वहाबी संप्रदाय को मानने वाले एक अहम धार्मिक समूह ने सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देशों से अपील की है कि वो अमरीका के खिलाफ शिकायत दर्ज करें. इस संगठन ने अमरीका पर "इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक अभिव्यक्ति को संरक्षण देने" का आरोप लगाया है.

इस फिल्म के विरोध में लीबिया के बेनगाजी में अमरीकी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले में अमरीकी राजदूत जे क्रिस्टोफर स्टीवेंस समेत चार अमरीकियों की मौत हो गई.

'आमराय' की कोशिश

इससे पहले भी इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद के कथित अपमान से जुड़े मामलों को लेकर कश्मीर में लोग सड़कों पर उतरते रहे हैं.

"मुसलमान इस बात को बर्दाश्त नहीं कर सकते कि हमारे प्यारे पैगंबर का जानबूझ कर अपमान किया जाए. अगर अमरीका ओसामा बिन लादेन को ढूंढ सकता है तो उस इंसान को क्यों नहीं, जिसकी वजह से मुस्लिम दुनिया जल रही है."

जीआर मलिक, जमीयत अहलिहदीथ

सितंबर 2010 में अमरीका में कुरान जलाने की घटना के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान कई लोग मारे गए थे. लेकिन लीबिया की घटना पर घाटी में नपी तुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है.

जमीयत अहलिहदीथ के नेता जीआर मलिक ने गुरुवार को एक प्रेस कांफ्रेस बुलाकर कहा, “हम इन इस्लामी मूल्यों में विश्वास करते हैं कि सिर्फ दोषी को सजा मिलनी चाहिए, न कि उन लोगों को, जो इसमें शामिल न हों.”

जमीयत ने कश्मीर में इस्लाम से जुड़ी सभी विचारधाराओं के लोगों से सुझाव मांगे हैं कि किस तरह "बार बार हो रही इस्लाम का अपमान करने वाली घटनाओं" पर आमराय कायम की जाए.

अमरीका की आलोचना

यमन में प्रदर्शन

यमन की राजधानी सना में प्रदर्शनकारी अमरीकी दूतावास में घुस गए.

जब मलिक से पूछा गया कि क्या मुस्लिम संगठन लीबिया में अमरीकी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले की निंदा करते हैं तो उन्होंने कहा, “वो भावनाओं में बह कर की गई कार्रवाई थी. मुसलमान इस बात को बर्दाश्त नहीं कर सकते कि हमारे प्यारे पैगंबर का जानबूझ कर अपमान किया जाए. अगर अमरीका ओसामा बिन लादेन को ढूंढ सकता है तो उस इंसान को क्यों नहीं, जिसकी वजह से मुस्लिम दुनिया जल रही है. लेकिन सच बात ये है कि अमरीकी लोग ऐसे तत्वों को संरक्षण देते हैं. वो भले उन्हें कैसे कानून के कठघरे तक लाएंगे?”

इस बीच अधिकारियों ने श्रीनगर और बाकी अहम जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी है. उन्हें खुफिया जानकारी मिली है कि कुछ मुस्लिम संगठन शुक्रवार को प्रदर्शन की तैयारियां कर रहे हैं और लोगों को इसके लिए तैयार कर रहे हैं.

हालांकि अलगवावादियों नेताओं ने अभी तक इस मामले को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है. हुर्रियत कांफ्रेस के उदारवादी धड़े का नेतृत्व करने वाली मीरवाइज उमर फारूक ने उम्मीद जताई है कि अमरीकी अधिकारी “इस घिनौनी घटना” के पीछे मौजूद तत्वों को बेनकाब करेंगे.

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