क्या राहुल गांधी का करिश्मा खत्म हो गया है?

 गुरुवार, 13 सितंबर, 2012 को 17:41 IST तक के समाचार

राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी ने युवाओं के नेता के रूप में पेश किया है

कांग्रेस के महासचिव और आम राय के अनुसार पार्टी के युवराज राहुल गांधी पर पिछले दिनों मीडिया में कई नकारात्मक टिप्पणियां हुई हैं.

एक लोकप्रिय मैगज़ीन 'द इकॉनोमिस्ट' ने राहुल गांधी के एक नेता के तौर पर उनके औचित्य पर ही कई सवाल खड़े किए हैं.

मैगजीन ने 'द राहुल प्रॉब्लम' यानी राहुल की समस्या शीर्षक से लिखा कि राहुल गांधी ने "एक नेता के तौर पर कोई योग्यता नहीं दिखाई है और ऐसा भी नहीं लगता कि उन्हें कोई भूख है. वो शर्मीले स्वभाव के लगते हैं, मीडिया से बात नहीं करते हैं और संसद में भी अपनी आवाज़ नहीं उठाते हैं."

कुछ ऐसे ही विचार पत्रकार और लेखिका आरती रामचंद्रन भी रखती हैं.

आरती रामचंद्रन ने हाल ही में राहुल गांधी पर एक किताब 'डिकोडिंग राहुल' लिखी है लेकिन उन्हें भी राहुल गांधी का साक्षात्कार लेने में बहुत दिक्कतें आईं.

उम्मीदें पूरी नहीं

"एक तो उन्होंने किसी भी नए वोटरों के दल को नहीं जीता है. दूसरा उन्होंने किसी राज्य में अपना प्रभाव नहीं दिखाया है कि वो वहां चुनावों के नतीजों को बदल सकते हैं"

आरती रामाचंद्रन, पत्रकार

आरती रामचंद्रन ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि पूरे डेढ़ साल तक वो राहुल गांधी का इंटरव्यू लेने की विफल कोशिश करती रहीं और बाद में उन्हें अपने सवालों का लंबा चिठ्ठा राहुल गांधी के दफ्तर भेजना पड़ा.

आरती कहती हैं, "उनसे जो उम्मीदें थीं जब वो राजनीति में वर्ष 2004 में आए वो सारी उम्मीदें तो पूरी नहीं हो पाई हैं. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि उन्होंने काम बिल्कुल नहीं किया है. कांग्रेस पार्टी ने यूपी चुनाव में जीत हासिल नहीं की लेकिन उनका वोट प्रतिशत भी तीन प्रतिशत बढ़ा है."

कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राहुल गांधी ने नए राजनैतिक दोस्त नहीं बनाए हैं.

आरती ने किताब में लिखा है कि राहुल गांधी की एक बड़ी कमज़ोरी आर्थिक मामलों में एकरूप नीति का न होना है.

आरती मानती हैं कि राहुल गांधी 2014 के चुनाव में पार्टी में बड़ी भूमिका जरूर निभाएंगे लेकिन क्या वो चुनाव का नतीजा प्रभावित कर पाएंगे कहना मुश्किल है

कमज़ोरी

वो कहती हैं, "आज जहां खड़े है वहां से देखें तो लगता है कि ऐसा संभव शायद नहीं है."

इसकी वजह बताते हुए वो कहती हैं, "एक तो उन्होंने किसी भी नए वोटरों के दल को नहीं जीता है. दूसरा उन्होंने किसी राज्य में अपना प्रभाव नहीं दिखाया है कि वो वहां चुनावों के नतीजों को बदल सकते हैं. उन्होंने राजनैतिक साथी नहीं बनाएं है और सबसे बड़ी बात न ही वो युवाओं के बीच एक मॉडल बन कर उभर सके हैं."

फिर भी आरती कहती हैं कि अगर राहुल गांधी पार्टी के भीतर अपने दांव सही लगा पाते हैं तो वो अगले आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी को एक नया चेहरा दे सकते हैं.

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