ममता का यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला

  • 18 सितंबर 2012
Image caption ममता बैनर्जी ने पिछले वर्ष भी खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश का विरोध किया था

तृणमूल कांग्रेस ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की है. मौजूदा लोकसभा में ममता बनर्जी की अध्यक्षता वाली तृणमूल के 19 सांसद हैं.

लोक सभा के 543 सदस्यों में यूपीए को बहुमत के लिए 272 की जरूरत है. यूपीए के लोक सभा में 273 सांसद हैं लेकिन उसे समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल का बाहरी समर्थन हासिल है.

तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वापस लेने से ये संख्या 254 हो जाएगी जिससे यूपीए सरकार बाहरी समर्थन देने वाले दलों पर बुरी तरह से आश्रित हो जाएगी.

ममता बनर्जी ने मल्टीब्रांड खुदरा बाज़ार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, डीजल के दामों में वृद्धि के फैसलों के बाद केंद्र सरकार को ये फैसले वापस लेने के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया था.

वित्त मंत्री पी चिदंबरम सोमवार को ही किसी भी तरह के 'रोलबैक' यानि फैसला वापस लिए जाने से इनकार कर चुके थे.

'सशर्त पुनर्विचार संभव, बाहरी समर्थन नहीं'

दो घंटे से भी ज़्यादा चली तृणमूल कांग्रेस के संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद ममता बैनर्जी ने कहा, “इस सरकार ने एक के बाद एक जनता-विरोधी फैसले लिए हैं, इसलिए हम सरकार से समर्थन वापस ले रहे हैं. यूपीए टू में हम लोग नहीं रहेगें. जुम्मे के दिन नमाज़ के बाद रेल मंत्री मुकुल राय के साथ हमारे सभी मंत्री अपना इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री को सौंप देंगे.”.

हालाँकि ममता बनर्जी ने ये भी कहा कि यदि केंद्र सरकार खुदरा क्षेत्र में विदेशी पूँजी निवेश के फैसले को वापस लेती है, प्रति वर्ष प्रत्येक परिवार के मिलने वाले गैस के सिलिंडरों की संख्या 12 तक बढ़ाती है और डीजल की कीमत में वृद्धि में कुछ कमी लाती है तो वे समर्थन वापस लेने के फैसले पर दोबारा विचार कर सकती हैं.

ममता ने सरकार को बाहर से समर्थन देने की किसी भी संभावना से इनकार किया और कहा कि उन्होंने समर्थन वापसी का फैसला आधे मन से नहीं लिया है.

'सहयोगी दलों को सम्मान नहीं'

तृणमूल कांग्रेस के संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद ममता बैनर्जी ने कहा कि खुदरा व्यापार के असंगठित क्षेत्र में अपनी जीविका चला रहे गरीब और मध्य वर्ग के लोगों पर विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से बुरा असर पड़ेगा.

ममता बैनर्जी ने कहा, “सरकार हमारी पार्टी के विचारों को एक सहयोगी दल की तरह सम्मान नहीं दे रही है, अब लंबे समय तक इंतज़ार करने के बाद हमें ये दुखद फैसला लेना पड़ रहा है.”

इस घटनाक्रम से पहले राजधानी दिल्ली में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की.

सोमवार को चिदंबरम ने कहा था कि सरकार अपने सहयोगियों को समझाने का पूरा प्रयास करेगी. चिदंबरम ने ये भी दावा किया था कि सरकार को कोई खतरा नहीं है.

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