हाथी हुए मोटे, लो अब उनकी डाइटिंग शुरू...

 बुधवार, 19 सितंबर, 2012 को 18:58 IST तक के समाचार

तमिल नाडू के मंदिरों में 37 हाथी काम करते हैं.

भारत के दक्षिणी राज्य तमिल नाडू के मंदिरों में रहने वाले अधिकतर हाथियों का वज़न ज्यादा है.

अधिकारियों ने बीबीसी को बताया है कि अब कोशिश की जा रही है कि इन हाथियों को 'पतला' किया जा सके.

जानवरों के डॉक्टरों के निर्देश पर मंदिर के अधिकारी इन हाथियों का आहार को बदल रहे हैं.

मदुरई मिनाक्षी मंदिर के एक अधिकारी पोन जयरमन ने कहा, "पंद्रह साल की हथिनी पार्वती का वज़न सामान्य से 500 किलोग्राम ज्यादा है. उसके वज़न को कम करने की कोशिश की जा रही है."

मोटापा

"पंद्रह साल की हथिनी पार्वती का वज़न सामान्य से 500 किलोग्राम ज्यादा है. उसके वज़न को कम करने की कोशिश की जा रही है."

पोन जयरमन, मदुरई मिनाक्षी मंदिर के अधिकारी

वहीं कलड़गर मंदिर की हथिनी मदुरावल्ली भी अपनी उम्र के हिसाब से 700 किलोग्राम ज्यादा वज़नदार है.

माना जाता है कि इन हाथियों का वज़न ज्यादा होने की एक वजह उन्हें ज्यादा खाना खिलाया जाना है.

लेकिन वेटरिनेरी डॉक्टरों का कहना है कि कैद में रहने से मोटापा तो आएगा ही.

जंगल में हाथी 200 अलग-अलग प्रकार का भोजन करते हैं जिनमें फल, फूल, जड़ें, टहनियां आदी शामिल होती हैं.

लेकिन कैद में उन्हें जो खाना मिलता है वो इतना विविध नहीं होता है.

व्यायाम की कमी

वन में रहने वाले हाथी चावल, बाजरा, नमक, गुड़ जैसे चीजों को खाने के आदी नहीं होते है जो उन्हें कैंद में मिलता है.

इसके अलावा वन में रहने वाले हाथी मेहनत भी ज्यादा करते हैं. वो ज्यादा चलते हैं, चढ़ाई करते हैं और दूसरे जानवरों के साथ प्रतिस्पर्धा भी करते हैं.

राज्य के एक वरिष्ठ वेटरिनेरी अधिकारी ने कहा, "कैद में हाथी लगातार कुछ न कछ खाते रहते हैं और इसके साथ साथ वो परिश्रम भी कम करते हैं जिससे वो मोटे हो जाते हैं."

अधिकारियों के सलाह पर महावत इन हाथियों को रोज़ाना कम से कम पांच किलोमीटर की चहलकदमी पर लेकर जाते हैं. लेकिन ये भी कम है क्योंकि जंगल में हाथी अममून भोजन की तलाश में 20 वर्ग किलोमीटर का इलाका छान मारते हैं.

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