कश्मीर पर भारत-पाक दोनों ग़लत: रुश्दी

 मंगलवार, 18 सितंबर, 2012 को 12:53 IST तक के समाचार
सलमान रुश्दी

सलमान रुश्दी के मुताबिक कश्मीर में शांति के रास्ते में बहुत अड़चने हैं

भारतीय मूल के ब्रितानी लेखक क्लिक करें सलमान रुश्दी ने बीबीसी से विशेष बातचीत में कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान दोनों की निंदा करते हुए कहा है कि कश्मीर कश्मीरियों के लिए है.

सलमान रुश्दी का संबंध भारत में कश्मीर से रहा है.

रुश्दी ने कहा, “कश्मीरी हमेशा से कहते आए हैं कि आप दोनों चले जाइए, लेकिन किसी ने भी उनकी बात नहीं सुनी है.”

रुश्दी के अनुसार, “एक आदर्श समाज में आप पाकिस्तान और भारत के कब्जे वाले कश्मीर को मिला सकते हैं और पुरानी सीमाओं को दोबारा स्थापित कर सकते हैं. आप भारत और पाकिस्तान को इस बात के लिए राजी करवा सकते हैं कि वो इन सीमाओं की गारंटी दें, इलाके से सेना को हटाएँ, वहाँ निवेश करें. एक समझदार समाज में ऐसा ही होगा, लेकिन हम एक समझदार समाज में नहीं रहते हैं.”

आजकल रुश्दी अपनी नई किताब 'जोज़ेफ ऐंटन: ए मेमॉयर' के प्रचार में व्यस्त हैं.

उदारवादी विचार

‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ और ‘सैटेनिक वर्सेज़’ जैसी किताबों के लेखक सलमान रुश्दी ने कहा कि पाकिस्तान में बड़ी संख्या में लोगों ने अपने उदारवादी विचार छोड़ दिए हैं.

रुश्दी ने कहा कि पिछले साल पाकिस्तानी पंजाब के पूर्व गवर्नर सलमान तासीर की हत्या से पाकिस्तान में बदलाव की शुरुआत हुई.

हिंसा क्यों?

"अगर आप किसी किताब को पढ़ना शुरू करते हैं तो किसी ने नहीं कहा है कि आप उसे खत्म कीजिए"

सलमान रुश्दी

उन्होंने कहा, “तासीर की हत्या इसलिए हुई क्योंकि वो एक मासूम सी दिखने वाली महिला के पक्ष में बोल रहे थे, लेकिन उनके देश ने हत्यारे का साथ दिया.”

रुश्दी का कहना था, “एक मासूम महिला का बचाव करने को पूर्ण रूप से गैर-इस्लामी माना गया. ना सिर्फ सलमान की हत्या कर दी गई, बल्कि लोगों ने उनकी हत्या पर खुशियाँ भी मनाईं.”

अड़चनें

सलमान रुश्दी के मुताबिक कश्मीर में शांति के रास्ते में बहुत अड़चनें हैं.

उन्होंने कहा, “ये साफ है कि भारत ने कश्मीर में अच्छा बर्ताव नहीं किया है. भारतीय सुरक्षा बल ऐसा बर्ताव करते हैं कि वो वहाँ कब्जा करने आए हैं. उनकी उपस्थिति से भी ऐसा लगता है कि वो कब्जा करने वाली सेनाएँ हैं. उनके ऊपर हिंसा, बलात्कार और हत्या के ढेरों इल्जाम लगे हैं. पाकिस्तान ने भी लश्कर-ए-तैबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे जिहादी गुटों का इस्तेमाल करके स्थिति को खराब किया है.”

क्लिक करें सलमान रुश्दी की नई किताब में फतवे के बाद के उनके जीवन का ज़िक्र है.

रुश्दी की किताब ‘सैटेनिक वर्सेज’ का बहुत विरोध हुआ है.

गौरतलब है कि दुनिया भर के कई मुसलमान संगठनों ने. उनकी किताब ‘सैटेनिक वर्सेज’ का क्लिक करें विरोध किया है लेकिन रुश्दी अपनी किताब का बचाव करते हैं.

उन्होंने कहा, “मझे अपने उपन्यास पर गर्व है. करीब एक दशक से ज्यादा वक्त से उपन्यास के विरोधियों ने चिल्ला कर एजेंडा निर्धारित किया है. और अब मुझे लगता है कि उपन्यास के समर्थकों को बोलने का मौका मिला है. कई भाषाओं के ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें ये उपन्यास पसंद है.”

गुप्त नाम

रुश्दी ने कहा, “अगर आपको ठेस लगती है तो ये आपकी समस्या है, और सच बात ये है कि बहुत सारे लोग दूसरे लोगों को ठेस पहुँचाते हैं.”

उन्होंने कहा, “किसी किताब की दुकान में ऐसी बहुत सी किताबें हैं जो नीरस होती हैं लेकिन मुझे कभी भी ऐसा नहीं लगा कि मैं उस दुकान को जला दूँ. अगर आपको कोई किताब पसंद नहीं तो आप दूसरी किताब पढ़िए. अगर आप किसी किताब को पढ़ना शुरू करते हैं तो किसी ने नहीं कहा है कि आप उसे खत्म कीजिए. अगर आप 600 पन्नों की किताब को पढ़कर कहते हैं कि आपकी भावनाओं को ठेस पहुँची है तो आपने खुद को ठेस पहुँचाने के लिए बहुत मेहनत की है.”

सलमान रुश्दी ने कहा कि उन्होंने फतवे के बाद छिपने के लिए अपना नाम जोजेफ एंटन रख लिया था इसलिए उन्होंने इस किताब के लिए भी यही नाम चुना.

रुश्दी ने आगे कहा, “मैने सोचा कि अगर मुझे भारत नहीं मिल सकता तो मैं साहित्य का सहारा ले सकता हूँ जो मेरे लिए एक दूसरे देश जैसा है. मैने कॉनरैड और चेकोव के पहले नामों को जोड़ा और अपना नाम जोजेफ एंटन रख लिया.”

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