सरकार के सिर से उठ जाएगा ममता का साया

 शुक्रवार, 21 सितंबर, 2012 को 08:41 IST तक के समाचार

एफ़डीआई के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ़ मोर्चा खोल चुकी क्लिक करें तृणमूल कांग्रेस के मंत्री शुक्रवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात कर उन्हें इस्तीफ़ा सौंप देंगे.

हालांकि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के दूसरे सबसे बड़े घटक दल क्लिक करें तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वापसी के बाद भी सरकार अपने बहुमत को लेकर आश्वस्त दिख रही है.

खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश और डीज़ल के बढ़े दाम के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस ने क्लिक करें संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की थी. मौजूदा लोकसभा में ममता बनर्जी की अध्यक्षता वाली तृणमूल के 19 सांसद हैं.

लोकसभा के 543 सदस्यों में यूपीए को बहुमत के लिए 272 की जरूरत है. यूपीए के लोक सभा में तृणमूल के समर्थन के साथ 273 सांसद थे मगर उसके बाहर जाने के बाद भी उसे समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल का बाहरी समर्थन हासिल है.

विपक्षी नेता

एफ़डीआई के मुद्दे पर गुरुवार को हुए बंद में एनडीए सहित समूचा विपक्ष एकमंच पर आया.

माना जा रहा है कि दोपहर लगभग तीन बजे प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद सभी मंत्री राष्ट्रपति भवन जाएंगे और राष्ट्रपति से मुलाकात कर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार से अपने क्लिक करें समर्थन वापसी की चिठ्ठी औपचारिक रूप से उन्हें सौंप देंगे.

यूपीए का भविष्य

ममता बनर्जी ने कहा था कि यदि केंद्र सरकार खुदरा क्षेत्र में विदेशी पूँजी निवेश के फैसले को वापस लेती है, प्रति वर्ष प्रत्येक परिवार के मिलने वाले गैस के सिलिंडरों की संख्या 12 तक बढ़ाती है और डीजल की कीमत में वृद्धि में कुछ कमी लाती है तो वे समर्थन वापस लेने के फैसले पर दोबारा विचार कर सकती हैं. क्लिक करें

क्लिक करें ममता के समर्थन वापसी के बाद अल्पमत में आई क्लिक करें सरकार को विश्वासमत के ज़रिए सदन में अपना बहुमत साबित करना होगा.

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक तृणमूल के मंत्रियों के इस्तीफ़े के बाद केंद्रीय मंत्रीमंडल में फेरबदल किया जाएगा. भारतीय अखबारों में चर्चा है कि मंत्रिमंडल के फेरबदल के ज़रिए कांग्रेस के कुछ प्रमुख नेताओं को 2014 के चुनाव की तैयारी और कुछ को पार्टी संगठन के काम में लगाया जाएगा.

मुमकिन है कि ममता के समर्थन वापसी के बाद क्लिक करें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह टेलीविज़न पर देश को संबोधित कर एफ़डीआई से जुड़े फैसले और इसकी ज़रूरत के बारे में जनता को जानकारी देंगे.

ममता के साथ छोड़ने के बाद यूपीए का भविष्य समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के रुख पर निर्भर हैं. इन दलों ने यूपीए को बाहर से समर्थन दे रखा है.

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