कुडनकुलम रिएक्टर में ईंधन भरने का काम शुरू

 शनिवार, 22 सितंबर, 2012 को 00:09 IST तक के समाचार
कुलनकुलम प्लांट

काफी समय से कुडनकुल में काम ठप पड़ा था.

भारत सरकार ने पुष्टि की है कि तमिलनाडु के कुडनकुलम में रूसी मदद से तैयार 1000 मेगावॉट क्षमता वाले परमाणु बिजली संयंत्र में ईंधन भरने का काम शुरू हो गया है.

परमाणु ऊर्जा विरोधी उग्र प्रदर्शनों के कारण लगभग एक साल से इस प्लांट पर काम रुका हुआ था.

रूस ने कुडनकुलम में 1000 मेगावॉट क्षमता वाले दो अलग अलग रिएक्टर तैयार किए हैं. इनमें से एक में अब ईंधन भरा जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट इस रिएक्टर में ईंधन भरने के काम को रोकने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर चुका है.

‘लोगों की सुरक्षा अहम’

"हम संयंत्र के खिलाफ नहीं हैं और न ही याचिकाकर्ता खिलाफ है लेकिन हम सुरक्षा उपायों पर आण्विक ऊर्जा नियामक बोर्ड की उन सिफारिशों को देखना चाहते हैं जो लागू हुई है."

सुप्रीम कोर्ट

पिछले साल मार्च में जापान के फुकुशिमा में हुए परमाणु हादसे के बाद से कुलडकुलम में स्थानीय लोग सुरक्षा मुद्दों को लेकर इस परमाणु संयंत्र का विरोध कर रहे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार आणविक ऊर्जा नियामक बोर्ड ने मंगलवार को ईंधन के 163 गट्ठरों की लोडिंग को अंतिम मंजूरी दे दी.

अधिकारियों के अनुसार ईंधन भरने में 10 दिन तक का समय लग सकता है. इसके बाद इस रिएक्टर में पहली बार विखंडन प्रतिक्रिया शुरू की जाएगी.

भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड को रिएक्टर में बिजली उत्पादन से जुड़े हर चरण पर आणविक ऊर्जा नियामक बोर्ड की मंजूरी हासिल करनी होगी.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ईंधन भरने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया लेकिन ये जरूर माना कि इस परियोजना से जुड़े जोखिम का मूल्यांकन होना चाहिए क्योंकि आसपास के इलाकों में रह रहे लोगों की सुरक्षा सबसे अहम है.

सर्वोच्च अदालत की खंडपीठ ने कहा, “हम संयंत्र के खिलाफ नहीं हैं और न ही याचिकाकर्ता खिलाफ हैं लेकिन हम सुरक्षा उपायों पर आणविक ऊर्जा नियामक बोर्ड की उन सिफारिशों को देखना चाहते हैं जो लागू हुई है.”

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.