ममता और कांग्रेस की दूरियां और बढ़ीं

 शनिवार, 22 सितंबर, 2012 को 20:53 IST तक के समाचार
ममता बनर्जी

कांग्रेस के फ़ैसले को केंद्र सरकार पर लिए गए ममता के निर्णय के विरोध के तौर देखा जा रहा है.

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार में मौजूद कांग्रेस के सभी छह मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस सरकार में मौजूद दो कैबिनेट और चार राज्य मंत्रियों ने शनिवार को अपना त्यागपत्र मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सौंप दिया.

ख़बरों के मुताबिक़ मुख्यमंत्री से मुलाक़ात के बाद कांग्रेस की ओर से सरकार में शामिल ये मंत्री राज्यपाल एम के नारायनन से मिले और उन्हें सरकार से समर्थन वापस लेने के अपने फ़ैसले से अवगत कराया.

कुछ जगहों पर आई ख़बरों के मुताबिक़ राज्यपाल से मिलने गए लोगों में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य भी शामिल थे.

पीटीआई के अनुसार मीडिया से बात करते हुए पूर्व मंत्री मानस भूनिया ने कहा कि चूंकि तृणमूल कांग्रेस ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से अपने मंत्रियों का इस्तीफ़ा दिलवाया था और समर्थन वापस ले लिया था इसलिए जवाब में कांग्रेस पार्टी के मंत्री ममता बनर्जी सरकार से अलग हुए.

"हमारा इस्तीफ़ा उस घटना की कड़ी है और ये पार्टी हाईकमान और राज्य ईकाई के निर्णय के मुताबिक़ लिया गया है."

मानस भूनिया, कांग्रेस नेता

मानस भूनिया ममता बनर्जी सरकार में सिंचाई मंत्री थे.

उन्होंने कहा, "हमारा इस्तीफ़ा उस घटना की कड़ी है और ये पार्टी हाईकमान और राज्य ईकाई के निर्णय के मुताबिक़ लिया गया है."

असहज रिश्ते

इससे पहले ममता बनर्जी ने मल्टी ब्रांड रिटेल में विदेशी निवेश,डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी और रसोई गैस की सीमा तय करने के विरोध में पर केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. तृणमूल कांग्रेस के मंत्रियों ने शुक्रवार को अपना इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंप दिया था.

हालांकि इससे मनमोहन सिंह सरकार अल्पमत में आ गई है लेकिन सरकार गिरने की स्थिति अभी पैदा नहीं हुई है , क्योंकि मुलायम सिंह यादव ने सरकार को समर्थन देने की घोषणा कर दी है.

पश्चिम बंगाल में सहयोगी दोनों सहयोगी राजनीतिक दलों - तृणमूल और कांग्रेस पार्टी में रिश्ते शुरू से ही असहज रहे हैं और दोनों दलों के आपसी मतभेद भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं.

तृणमूल के पास राज्य विधानसभी में 184 सीटें हैं और उसे कांग्रेस के समर्थन की ज़रूरत नहीं है.

दोनों दलों ने पंचायत के चुनाव अलग-अलग लड़े थे. कहा जा रहा है कि दोनों के अलग होने से वोटों में बंटवारा हो सकता है. हालांकि कांग्रेस को राज्य में बहुत बड़ा समर्थन हासिल नहीं है.

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