कोलकाता का आखिरी नीलामीघर

 सोमवार, 24 सितंबर, 2012 को 09:04 IST तक के समाचार
कोलकाता का आखिरी नीलामी घर

भारत के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल के शहर कोलकाता में नीलामी का काम करना एक संपन्न व्यापार था, लेकिन समय के साथ-साथ शहर के लगभग सभी नीलामघर बंद हो गए.

20वीं सदी के मध्य में कोलकाता के कई नीलामीघरों में भारत के अमीर एवं मशहूर लोगों, अभिनेताओं, व्यापारियों और राजदूतों का जमावड़ा लगा रहता था.

लेकिन भारत की राजधानी दिल्ली बनने के साथ ही कोलकाता की अर्थव्यवस्था में ठहराव सा आ गया और तकरीबन सभी नीलामीघर बंद हो गए, सिर्फ एक को छोड़कर और वो था रस्सेल एक्सचेंज.

रस्सेल एक्सचेंज को वर्ष 1940 में कोलकाता के एक परिवार ने ब्रितानियों से खरीदा था और तब से ये कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाक़े में चल रहा है.

अपने अच्छे दिनों में ये नीलामघर दुनिया के अन्य बड़े नीलामघर जैसे सोथेबीज़ तक को टक्कर देता था और इसके ग्राहक दिल्ली-मुंबई से यहां आते थे.

यहां अभी भी कई दुर्लभ सामान मिल जाते हैं, जिनमें मोटरसाइकिल हेलमेट से लेकर क्रिस्टल के शैंडलिर, माइली साइरस की टूटी हुई सीडी से लेकर बर्मा में पाए जाने वाला सागौन की लकड़ियों से बना पलंग शामिल है.

पुराने दिनों में ये सामान अक्सर विदेशी राजदूतों और बंगाली अभिजात वर्ग के घरों में मिलते थे. लेकिन अब इनमें से ज़्यादातर सामान उन बंगाली घरों से लाए जाते हैं जहां इन्हें रखने की जगह नहीं होती है.

भूली बिसरी यादें

"रस्सेल एक्सचेंज को वर्ष 1940 में कोलकाता के एक परिवार ने ब्रितानियों से खरीदा था और तब से ये कोलकाता के पॉश इलाके पार्क स्ट्रीट में चल रहा है."

रस्सेल एक्सचेंज घर में नीलामी का काम दो मेहनती और करिश्माई भाई करते हैं.

उन्होंने ये काम अपने पिता की मौत के बाद साथ-साथ संभाला है.

हालांकि दोनों भाइयों की पृष्टभूमि एक दूसरे से बिल्कुल अलग है. इनमें से बड़े भाई अनवर सलीम अब तक विदेश में रह रहे थे लेकिन अब वे अपने पिता की इस विरासत को उसकी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस दिलाना चाहते हैं.

सलीम ने विदेश में ज़मीन-जायदाद, इंटरनेट खुदरा विक्रेताओं और दिग्गज व्यापारियों के साथ काम किया है. उन्हें लगता है कि निवेश बैंकिंग से लेकर भारतीय रेस्तरां चलाने तक का उनका अनुभव उन्हें इस व्यापार में मदद करेगा.

इसके उलट उनके छोटे भाई अरशद सलीम पूरी तरह से कोलकाता के रंग में रंगे हुए हैं. वे 18 साल की उम्र से अपने पिता का व्यापार संभाल रहे हैं और कहते हैं कि वे एक सुई से लेकर हवाई जहाज़ तक बेच सकते हैं.

अरशद की नज़र में कोलकाता की अन्य 20 नीलामघरों के बंद होने का कारण एक शहर के रूप में कोलकाता का पतन है.

अरशद को इस बात का भी यकीन नहीं है कि आने वाली पीढ़ी इस काम को करना चाहेगी.

नए तरीके

रस्सेल एक्सचेंज को दोबारा प्रतिष्ठित करने के लिए दोनों भाई नित नए तरीके अपना रहे हैं.

उन्होंने अपनी बिल्डिंग का एक हिस्सा कुछ प्राचीन वस्तुओं को तय कीमत में बेचने के लिए लगा दिया है.

इतना ही नहीं उन्होंने कुछ स्थानीय फैशन डिज़ाइनरों के लिए एक फैशन-शो का भी आयोजन किया जिसमें कुछ नामी-गिरामी मॉडल्स ने उनकी दुकान के सामानों को प्रदर्शित किया.

उनकी योजना आगे अपने अहाते में संगीत-संध्या का आयोजन करवाने का है.

हालांकि इन कार्यक्रमों के दौरान होने वाली रौनक और एक सामान्य अलसाये दोपहर के माहौल का फर्क यहां साफ नज़र आता है.

लेकिन ये तय है कि रस्सेल एक्सचेंज हमेशा पहले एक नीलामी घर रहेगा फिर कुछ और. खासकर यहां काम करने वालों के लिए जो यहां दो या तीन पीढ़ियों से काम कर रहे हैं.

ये वो लोग है जो अपने बदलते हुए शहर का प्रतिनिधित्व करते हैं.

विस्मृत इतिहास

यहां आने वाले खरीदारों में पुराने खिलौनों को जमा करने के शौकीन, बिचौलिये और बुज़ुर्ग शामिल हैं.

"अरशद की नज़र में कोलकाता की अन्य 20 नीलामी घरों के बंद होने का कारण एक शहर के रुप में कोलकाता का पतन होना है."

कुछ के लिए यहां होने वाला सौदा भूला हुआ इतिहास तो कुछ के लिए नए रोमांच का परिचायक है.

कई मायनों में ये नीलामीघर कोलकाता शहर के भूत, वर्तमान और भविष्य को दर्शाता है. एक ऐसा शहर जो कभी अपने सांस्कृतिक-परिवेश और समृद्धि के लिए जाना जाता था और आज के माहौल में अपनी पहचान तलाशने की कोशिश में लगा है.

दोनों भाइयों की अपने व्यापार को आगे बढ़ाने की ये कोशिश कितनी सफल होगी, ये तो आने वाला समय ही बताएगा.

ऐसा इसलिए क्योंकि ये सब तब हो रहा है जब हर तरफ बदलाव की बयार बह रही है. ये नीलामीघर, फीकी पड़ती भव्यता का प्रतीक है.

ऐसे कठिन समय में भी ये नीलामीघर समकालीन फैशन और संगीत की दुनिया का ध्यान खींचने में सफल हो रहा है.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.